जब केशवराव पहुँचे क्रांति की भूमि कलकत्ता
प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से...
वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर
पानी पर लिखी हुई बातें लिखते- लिखते बह जाती हैं। नहीं शेष उनकी किंचित स्मृतियाँ भी रह जाती हैं। पर एक सदी से सागर के वक्षस्थल...
वीर सावरकर कृत ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक का इतिहास
कहते हैं 1857 की क्रांति विफल हुई। क्या यह कहना सही है? नहीं! 1857 का महासंग्राम उसके बाद की पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए सतत...
स्वातंत्र्यवीर सावरकर: एक समग्र मूल्यांकन
विनायक दामोदर सावरकर प्रखर चिंतक, गहन अध्येता, सत्यान्वेषी इतिहासकार, भावप्रवण कवि, सेवाभावी समाज सुधारक और महान स्वतंत्रता-सेनानी थे। उनका कोई भी रूप अन्य किसी रूप से...
राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक गौरव एवं हिन्दुत्व चिंतन की प्रधानता है सावरकर जी के लेखन में
स्वातंत्र्यवीर विनायक सावरकर का पूरा जीवन राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा के लिये समर्पित रहा। बालवय से जीवन की अंतिम श्वाँस तक वे कभी...
