Tagged: Nation Building

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जब केशवराव पहुँचे क्रांति की भूमि कलकत्ता

प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से...

करोड़ों देशभक्त नागरिकों के दिलों में है आरएसएस का पंजीयन 0

करोड़ों देशभक्त नागरिकों के दिलों में है आरएसएस का पंजीयन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पंजीकृत क्यों नहीं है? यह अपने आय-व्यय का हिसाब-किताब क्यों नहीं देता है? आरएसएस पारदर्शिता नहीं रखता है। ये ऐसे सवाल हैं,...

“बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं" 0

“बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं”

डॉक्टर जी अपनी बैठक में यह बार-बार बताते थे कि “बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं” तथा “यह कभी नहीं...