“हिन्दुत्व ही संविधान का रक्षक”
प्रशांत कुमार
भारत में “संविधान, संवैधानिक मूल्य, संवैधानिक संस्थाएँ और तथाकथित पंथ निरपेक्षता” यह सब तभी तक सुरक्षित है जब तक भारत का हिन्दुत्व सुरक्षित है।
जिस तरह इस तस्वीर में से पौधों को पानी देने वाले को हटाने से सुंदर दिखने वाला बगीचा जैसे खंडहर में बदल गया वैसे ही भारत की जड़ों को सींचने वाला हिन्दू यदि इस देश में कमजोर हुआ तो भारत का दृश्य भी कुछ ऐसा ही होगा।
यदि विश्वास नहीं होता तो अतीत में भारत से जुड़े भू-भाग (पाकिस्तान-बांग्लादेश) का अंधकारमय वर्तमान और अनिश्चित भविष्य देख सकते हैं।
जिन लोगों को “अशोक चिह्न” भी मजहबी खतरे का कारण दिखाई देता है उन्हें आपकी संवैधानिक संस्थाओं, आस्थाओं और व्यवस्थाओं में कोई रुचि नहीं है। उन्हें ना तो आपके संविधान में रुचि है, वह अपने शरिया को उससे श्रेष्ठ मानते हैं। उन्हें आपके तिरंगे में केवल अपना हरा ही दिखाई देता है। भारतमाता को तो इस समूह ने कभी स्वीकार ही नहीं किया। राष्ट्रगान और वंदेमातरम् जैसी राष्ट्र वंदना इन्हें अपने मजहब की तौहीन समझ आती है।
वह केवल तभी तक दिखावा / छलावा कर रहे हैं जब तक “ऐच्छिक राजनीतिक व्यवस्था” को प्राप्त नहीं कर लेते। जिस दिन उन्हें अपने राजनीतिक वर्चस्व के चिह्न दूर से भी दिखाई देने लगे उसी दिन वह अपने असली और भयावह रंग में आ जाएँगे।
इसके संकेत आपको विश्व में होने वाली उथल-पुथल से स्वाभाविक ही स्पष्ट हो रहे होंगे। आज विश्व का कोई भी देश इस षड्यंत्र से अछूता नहीं है, अनिष्टकारी शक्तियां वैश्विक परिदृश्य को अस्थिर करने के हर संभव प्रयास, प्रत्येक स्तर पर कर रही है। वो अनेक चेहरों का उपयोग कर अपनी पहचान छुपा रही है।
स्वर्णमृग का रूप धारण कर मारीच फिर से राम को भ्रमित करने का प्रयत्न कर रहा है। देश के प्रत्येक नागरिक को इन षड्यंत्रों को समझने योग्य क्षमताएं विकसित करनी ही होंगी। दिखाई देने वाले दृश्यों के पीछे का सत्य कुछ भिन्न ही प्रतीत होगा, इसलिए अपने चर्म चक्षुओं से अधिक अपने ज्ञान चक्षुओं का उपयोग करने होगा।
देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका तय करनी होगी, दैनिक जीवन-आचरण में देशभक्ति और हिन्दुत्व को अपनाना ही होगा।
आप और मैं तब सुरक्षित हैं जब यह देश सुरक्षित है और यह देश तभी और केवल तभी तक सुरक्षित है जब तक यहाँ का हिन्दु सुरक्षित है।
भारतमाता की जय ![]()

