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श्री गुरुजी – जिनके एक आह्वान पर युवाओं ने जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया

डॉ. शुचि चौहान वर्ष 1942, दिनांक 17 मार्च, अवसर था वर्ष प्रतिपदा का। एक कृश काय सन्यासी लोगों को सम्बोधित कर रहा था – “हमारा अहोभाग्य है कि हम आज जैसी संकटपूर्ण परिस्थिति में पैदा हुए हैं। संसार में उसी का नाम अमर होता है जो संकटकाल में कुछ कर दिखाता है। एक वर्ष के…

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राजा हो कर देश की समस्याएं नहीं सुलझा सकता कोई: नाना जी देशमुख

राजा हो कर देश की समस्याएं नहीं सुलझा सकता कोई: नाना जी देशमुख

दयानंद पांडेय नाना जी देशमुख अब नहीं है। पर मेरा मानना है कि अगर देश में दस-बीस नाना जी देशमुख भी हो जाएं तो देश की सूरत और सीरत दोनों बदल जाएगी। नाना जी ने सत्ता और राजनीति का शहद चखने के बाद वनवासी जीवन चुना। एक समय वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे।…

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संघ गीतों के शब्दों में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ गीतों के शब्दों में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 28 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सुर, लय और ताल में समझौता हो सकता है, लेकिन संघगीत में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। संघ के सामान्य स्वयंसेवकों द्वारा गाए जाने वाले गीतों में निहित यही देशभक्ति की…

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मधुभाई का जीवन कार्यकर्ताओं के लिए दीपस्तम्भ के समान – दत्तात्रेय होसबाले जी

मधुभाई का जीवन कार्यकर्ताओं के लिए दीपस्तम्भ के समान – दत्तात्रेय होसबाले जी

संघ के ज्येष्ठ प्रचारक मधुभाई कुलकर्णी जी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा छत्रपति संभाजीनगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक मधुभाई (माधव) विनायक कुलकर्णी जी की स्मृति में एम.आई.टी. कॉलेज के ‘मंथन हॉल’ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने मधुभाई के साथ…

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हमारे मन्दिर अर्न्तचेतना जागृति के केन्द्र हैं : श्री दत्तात्रेय होसबाले जी

हमारे मन्दिर अर्न्तचेतना जागृति के केन्द्र हैं : श्री दत्तात्रेय होसबाले जी

बाराबंकी के बरेठी में नारायण सेवा संस्थान के लक्ष्मी नारायण मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि, मन्दिर मात्र पुण्य कमाने अर्थात माँगने के स्थान नहीं बल्कि अर्न्तचेतना जागृति के केन्द्र हैं। मन्दिर मनुष्य के अंदर की चेतना को जागृत रखने…

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भूतों के लिए चर्चित ‘मोहिते का वाड़ा’ और हाथीखाने तक में लगी संघ की पहली शाखा

भूतों के लिए चर्चित ‘मोहिते का वाड़ा’ और हाथीखाने तक में लगी संघ की पहली शाखा

लेखक: विष्णु शर्मा इस दशहरे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS अपने 100 साल पूरे कर रहा है. सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक संघ के बारे में तमाम बातें, दावे और कहानियां सुनी और सुनाई जा रही हैं. अपनी पहली शाखा से दुनिया का सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक संगठन बनने तक, 100 साल की संघ…

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एक विराट संगठन का छठा महा अभियान

एक विराट संगठन का छठा महा अभियान 

नरेन्द्र भदौरिया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों की यात्रा में कई घुमावदार अवरोधों को बड़े कौशल से पार किया है। इस यात्रा में पाँच बड़े अभियान बडी कुशलता से पूरे किये हैं। इन सभी को आज महा अभियान माना जा रहा है। इसी कड़ी को आगे जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में…

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'अहम् पितरं सुवे' 'अहं सुवे पितरम्'

‘अहम् पितरं सुवे’ ‘अहं सुवे पितरम्’

ऋग्वेद दशम मण्डल ‘देवी-सूक्त’ में यह स्वयं देवी का वचन है। पितृ तत्व नित्य है। यह कोई अनुपस्थित की क्षणिक उपस्थिति नहीं है। यह अस्तित्व के बाद का काव्यात्मक या भावात्मक नैरन्तर्य नहीं यह नित्य उपास्य प्राण का ही स्वरूप है। भारतीय उत्सवजीविता उत्सवधर्मिता, इसको जरा डूब कर देखें। पितृपक्ष हो या सर्वपितृ अमावस्या यह…

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जीवनज्योत संघ ज्योति में एकरूप करने वाले ‘मधु भाई’

जीवनज्योत संघ ज्योति में एकरूप करने वाले ‘मधु भाई’

रमेश पतंगे मधु भाई ने एक दीप की आराधना की, वह दीप यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। युवावस्था में आकर्षित करने वाली असंख्य विचारधाराएं थीं, परंतु मधु भाई ने अपना चित्त संघ रूपी दीपक से ढलने नहीं दिया। गोरखनाथ ने अपने भजन की अंतिम कड़ी में कहा है – “मैं ज्योति में जोत मिलाऊं जी”। संघ…

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दूव घास है खास, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक रूप से पवित्र नहीं है, बल्कि विज्ञान के सिद्धांत के हिसाब से भी यह अन्य सभी वनस्पतियों से श्रेष्ठ है।

दूव घास है खास, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक रूप से पवित्र नहीं है, बल्कि विज्ञान के सिद्धांत के हिसाब से भी यह अन्य सभी वनस्पतियों से श्रेष्ठ है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा (दूब) की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई है, माना जाता है कि यह भगवान विष्णु की जांघ के रोम से निकली है, जो मंदराचल पर्वत की रगड़ से उत्पन्न हुई थी। इसका एक अन्य नाम पवित्री भी है। दूर्वा को हिन्दू धर्म में एक पवित्र वनस्पति माना जाता है, जो…

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