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रक्षाबंधन पर विशेष – उन दो पतले धागों की महिमा

रक्षाबंधन पर विशेष – उन दो पतले धागों की महिमा

अपने देश के उत्तरी भागों में ‘राखी’ का संकेत बहुत ही सुंदर है। किसी भी अनजाने पुरुष को कोई भी स्त्री जाकर उसके हाथ में राखी बांध देती है तो उसी क्षण से वह पुरुष उसका भाई, उसका रक्षक बन जाता है। और यदि किसी स्त्री के स्त्रीत्व पर संकट आ जाए और वह जाकर…

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सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के संदर्भ में सेवाकार्य का योगदान अनन्य साधारण है। समाज में कई प्रकार के सेवा के कार्य चलते रहते हैं। उनकी प्रेरणा भी भिन्न-भिन्न प्रकार की रहती है। अनेक सेवाकार्य पुण्य संचय के हेतु से होते हैं। किसी सेवा कार्य की प्रेरणा भूतदया होती है। कई लोग प्रसिद्धि पाने के लिए सेवा कार्य…

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श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

अस्पृश्यता रोग की जड़ जन सामान्य के इस विश्वास में निहित है कि यह धर्म का अंग है और इसका उल्लंघन महापाप होगा। यह विकृत धारणा ही वह मूल कारण है, जिससे शताब्दियों से अनेक समाज- सुधारकों, धर्माचार्यों के समर्पित प्रयासों के बाद भी यह घातक परम्परा जनसामान्य के मन में आज भी घर किए…

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श्री गुरुजी का आर्थिक चिंतन : पश्चिमी राष्ट्रों का लक्ष्य केवल भौतिक सुख

श्री गुरुजी का आर्थिक चिंतन : पश्चिमी राष्ट्रों का लक्ष्य केवल भौतिक सुख

मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है? अथवा मनुष्य अपने सामने जीवन का लक्ष्य कौन सा रखे? इस बारे में लगभग सभी लोगों का मत है कि सुख ही मनुष्य जीवन का लक्ष्य है। परंतु, प्रश्न यह है कि सुख से आशय क्या है और मनुष्य को यह सुख कैसे मिल सकता है? इस सम्बन्ध में…

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प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है – डॉ. मोहन भागवत जी

प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है – डॉ. मोहन भागवत जी

लोनावला स्थित स्वामी कुवल्यानंद द्वारा स्थापित कैवल्यधाम योग अनुसंधान संस्था के 101वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भौतिक प्रगति के नाम पर मानव ने प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचाया है। सतत विकास के लिए मानव के साथ-साथ प्रकृति के उत्थान…

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सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही भारत की एकता, एकात्मता, विकास व सुरक्षा की गारंटी है – डॉ. मोहन भागवत जी

सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही भारत की एकता, एकात्मता, विकास व सुरक्षा की गारंटी है – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 2 अक्तूबर 2025। रेशीमबाग मैदान में आयोजित शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज का बल सम्पन्न, शील सम्पन्न संगठित स्वरूप ही इस देश की एकता, एकात्मता, विकास व सुरक्षा की गारंटी है। क्योंकि हिन्दू समाज अलगाव की मानसिकता से मुक्त…

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श्री गुरुजी – जिनके एक आह्वान पर युवाओं ने जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया

डॉ. शुचि चौहान वर्ष 1942, दिनांक 17 मार्च, अवसर था वर्ष प्रतिपदा का। एक कृश काय सन्यासी लोगों को सम्बोधित कर रहा था – “हमारा अहोभाग्य है कि हम आज जैसी संकटपूर्ण परिस्थिति में पैदा हुए हैं। संसार में उसी का नाम अमर होता है जो संकटकाल में कुछ कर दिखाता है। एक वर्ष के…

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संघ गीतों के शब्दों में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ गीतों के शब्दों में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 28 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सुर, लय और ताल में समझौता हो सकता है, लेकिन संघगीत में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। संघ के सामान्य स्वयंसेवकों द्वारा गाए जाने वाले गीतों में निहित यही देशभक्ति की…

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हमारे मन्दिर अर्न्तचेतना जागृति के केन्द्र हैं : श्री दत्तात्रेय होसबाले जी

हमारे मन्दिर अर्न्तचेतना जागृति के केन्द्र हैं : श्री दत्तात्रेय होसबाले जी

बाराबंकी के बरेठी में नारायण सेवा संस्थान के लक्ष्मी नारायण मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि, मन्दिर मात्र पुण्य कमाने अर्थात माँगने के स्थान नहीं बल्कि अर्न्तचेतना जागृति के केन्द्र हैं। मन्दिर मनुष्य के अंदर की चेतना को जागृत रखने…

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देशभक्ति और देवभक्ति अलग-अलग नहीं – डॉ. मोहन भागवत जी

देशभक्ति और देवभक्ति अलग-अलग नहीं – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, १० सितम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि देवभक्ति और देशभक्ति, यह दो शब्द भले ही अलग दिखते हों, लेकिन हमारे देश में यह शब्द अलग नहीं है। जो वास्तविक देवभक्ति करेगा, वह देश की भी भक्ति करेगा। और जो प्रामाणिकता से देशभक्ति करेगा, उससे भगवान देवभक्ति भी…

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