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साढ़े तीन की चाय पर चर्चा...

साढ़े तीन की चाय पर चर्चा…

चाय के बारे में बात करें तो परमपूजनीय डॉ. हेडगेवार तो चाय को ‘संघ का अधिकृत पेय’ कहते थे। महाल स्थित डॉ. हेडगेवार भवन के रसोईघर में दोपहर साढ़े तीन बजे चाय की घंटी बजती है। उस समय कार्यालय परिसर में उपस्थित सभी जन, अतिथि, आगंतुक, निवासी प्रचारक चाय पीने के लिए एकत्रित हो जाते…

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राष्ट्रीय विचारों के प्रखर लेखक एच.वी. शेषाद्रि जी

राष्ट्रीय विचारों के प्रखर लेखक एच.वी. शेषाद्रि जी

इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल संगठन का नेतृत्व नहीं करते बल्कि अपने विचार, लेखनी और जीवन-साधना से पीढ़ियों को दिशा देते हैं। एच.वी. शेषाद्रि जी ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व थे, जिनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य, संगठन और वैचारिक चेतना को समर्पित रहा। सरलता, विद्वता और राष्ट्रनिष्ठा के अद्भुत संगम रहे शेषाद्रि जी…

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रक्षाबंधन पर विशेष – उन दो पतले धागों की महिमा

रक्षाबंधन पर विशेष – उन दो पतले धागों की महिमा

अपने देश के उत्तरी भागों में ‘राखी’ का संकेत बहुत ही सुंदर है। किसी भी अनजाने पुरुष को कोई भी स्त्री जाकर उसके हाथ में राखी बांध देती है तो उसी क्षण से वह पुरुष उसका भाई, उसका रक्षक बन जाता है। और यदि किसी स्त्री के स्त्रीत्व पर संकट आ जाए और वह जाकर…

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सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के संदर्भ में सेवाकार्य का योगदान अनन्य साधारण है। समाज में कई प्रकार के सेवा के कार्य चलते रहते हैं। उनकी प्रेरणा भी भिन्न-भिन्न प्रकार की रहती है। अनेक सेवाकार्य पुण्य संचय के हेतु से होते हैं। किसी सेवा कार्य की प्रेरणा भूतदया होती है। कई लोग प्रसिद्धि पाने के लिए सेवा कार्य…

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श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

अस्पृश्यता रोग की जड़ जन सामान्य के इस विश्वास में निहित है कि यह धर्म का अंग है और इसका उल्लंघन महापाप होगा। यह विकृत धारणा ही वह मूल कारण है, जिससे शताब्दियों से अनेक समाज- सुधारकों, धर्माचार्यों के समर्पित प्रयासों के बाद भी यह घातक परम्परा जनसामान्य के मन में आज भी घर किए…

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श्री गुरुजी का आर्थिक चिंतन : पश्चिमी राष्ट्रों का लक्ष्य केवल भौतिक सुख

श्री गुरुजी का आर्थिक चिंतन : पश्चिमी राष्ट्रों का लक्ष्य केवल भौतिक सुख

मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है? अथवा मनुष्य अपने सामने जीवन का लक्ष्य कौन सा रखे? इस बारे में लगभग सभी लोगों का मत है कि सुख ही मनुष्य जीवन का लक्ष्य है। परंतु, प्रश्न यह है कि सुख से आशय क्या है और मनुष्य को यह सुख कैसे मिल सकता है? इस सम्बन्ध में…

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In the 1965 war, when Shastri Ji had sought help from Guru Golwalkar Ji

1965 के युद्ध में जब शास्त्रीजी ने मांगी थी गुरु गोलवलकर जी से सहायता

एक दोपहर गुरु गोलवलकर जी भोजन के बाद आराम कर रहे थे. तभी एक संदेशवाहक आया और उनसे कहा कि वे जल्द से जल्द प्रधानमंत्री कार्यालय संपर्क करे. मामले की गंभीरता समझ गोलवलकर ने पीएमओ फोन लगाया. यहां उनकी बात प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी से हुई. पाकिस्तान के साथ युद्ध में उलझे पीएम शास्त्री…

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प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है – डॉ. मोहन भागवत जी

प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है – डॉ. मोहन भागवत जी

लोनावला स्थित स्वामी कुवल्यानंद द्वारा स्थापित कैवल्यधाम योग अनुसंधान संस्था के 101वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भौतिक प्रगति के नाम पर मानव ने प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचाया है। सतत विकास के लिए मानव के साथ-साथ प्रकृति के उत्थान…

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सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही भारत की एकता, एकात्मता, विकास व सुरक्षा की गारंटी है – डॉ. मोहन भागवत जी

सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही भारत की एकता, एकात्मता, विकास व सुरक्षा की गारंटी है – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 2 अक्तूबर 2025। रेशीमबाग मैदान में आयोजित शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज का बल सम्पन्न, शील सम्पन्न संगठित स्वरूप ही इस देश की एकता, एकात्मता, विकास व सुरक्षा की गारंटी है। क्योंकि हिन्दू समाज अलगाव की मानसिकता से मुक्त…

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श्री गुरुजी – जिनके एक आह्वान पर युवाओं ने जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया

डॉ. शुचि चौहान वर्ष 1942, दिनांक 17 मार्च, अवसर था वर्ष प्रतिपदा का। एक कृश काय सन्यासी लोगों को सम्बोधित कर रहा था – “हमारा अहोभाग्य है कि हम आज जैसी संकटपूर्ण परिस्थिति में पैदा हुए हैं। संसार में उसी का नाम अमर होता है जो संकटकाल में कुछ कर दिखाता है। एक वर्ष के…

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