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अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी...

अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी…

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में एक साधारण लेकिन संस्कारवान ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी संस्कृत के विद्वान थे और माता कृष्णा देवी गृहिणी थीं। बचपन से ही अटल जी में गहरी संवेदनशीलता, स्पष्टवादिता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार पनप रहे थे। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने ग्वालियर…

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विभाजन विभीषिका दिवस

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस/अखंड भारत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में हुई। 1930 में मुस्लिम लीग का अधिवेशन हुआ जहां पाकिस्तान की मांग की गई। पंजाब और सिंध के इलाकों में मुस्लिम लीग की गतिविधियां बढ़ती जा रही थी तो डॉक्टर हेडगेवार ने वहां संघ के कार्यों को प्रारंभ किया। इस नाते 1940 तक उन्होंने कई प्रवास किये और…

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करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज भारतीय सन्त परम्परा के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन धर्म, वेद-वेदान्त, भारतीय संस्कृति और धर्मशास्त्रों के अध्ययन तथा संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनका संन्यास-नाम स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती था। कठोर तपस्या, अद्भुत शास्त्रज्ञान, वैराग्य और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा के कारण वे देशभर…

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गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

यह एक महान गुरु की कथा है। उनका नाम महर्षि आश्वलायन था। उन्हें इस बात का गौरव था कि उनके द्वारा शिक्षित प्रत्येक विद्यार्थी राष्ट्र का प्रतिभाशाली, मेधावी और चरित्रवान नागरिक बना। उनके शिष्यों में मची प्रधानमंत्री, सेनापति, कुरुपद का कृषि-पंडित तथा अनेक प्रसिद्ध व्यक्ति सम्मिलित थे। एक दिन महर्षि को ज्ञात हुआ कि उनके…

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विदुरजी और ऋषि मैत्रेय की भेंट

विदुरजी और ऋषि मैत्रेय की भेंट

सृष्टि की उत्पत्ति कैसे होती है? ब्रह्मांड को आकार देने में दिव्य बुद्धि की क्या भूमिका है? और सबसे महत्वपूर्ण बात, इस ज्ञान को हम अपनी जीवन की अव्यवस्थित परिस्थितियों को संतुलित करने के लिए कैसे उपयोग कर सकते हैं? तकनीकी और बौद्धिक प्रगति के बावजूद, तनाव और असंतोष लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अनंत…

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गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

आज से ठीक 6 वर्ष पूर्व एक वर्षा-आँधी वाली रात मेरे एक सहयोगी ने मुझे फोन किया और पूछा कि क्या श्री गुरुजी गोलवलकर जी की डॉक्टरी परीक्षा करने का समय दे सकता हूँ। अगले प्रातः मैं उन्हें देखने चल दिया। कार की गति के साथ अनेक विचार भी मेरे मस्तिष्क में दौड़ रहे थे।…

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विभाजन की विभीषिका – जब चार घंटे में लाहौर छोड़कर भागना पड़ा

विभाजन की विभीषिका – जब चार घंटे में लाहौर छोड़कर भागना पड़ा

लखनऊ. 14 अगस्त, 1947 का काला दिन भला कैसे कोई भूल सकता है. आज भी जैसे ही यह दिन आता है, अपने पुरखों की धरती, अपनी माटी, अपना गाँव, घर और अपनों को खोने का दर्द ताजा हो जाता है. 14 अगस्त, 1947 की आधी रात जब भारत आजाद हो रहा था, तब देश के…

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राष्ट्रधर्म और अदम्य साहस के प्रतीक

राष्ट्रधर्म और अदम्य साहस के प्रतीक

बंदा सिंह बहादुर (बंदा वैरागी) समय की पुकार की उपेक्षा कर एकान्त साधना में लीन थे। उसी समय उनकी भेंट दशम गुरु, श्री गुरु गोविन्द सिंह जी से हुई। गुरुजी ने समाज पर हो रहे अत्याचारों, धार्मिक उत्पीड़न तथा पराधीनता की पीड़ा का वर्णन करते हुए कहा “जब देश, धर्म और संस्कृति संकट में हों…

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संगीतकार विष्णु नारायण भातखण्डे

संगीतकार विष्णु नारायण भातखण्डे

देश, काल और पात्र भेद से संगीत में समयानुकूल परिवर्तन हुए हैं। प्रायः एक शताब्दी पूर्व ही संगीत की गति अवरुद्ध हो गयी थी और युग धर्मानुसार उसका पुनरुत्थान होना परमाश्यक माना गया। ऐसे समय मुम्बई प्रान्त के बालकेश्वर ग्राम में 10 अगस्त 1860 को एक ब्राह्मण परिवार में विष्णु नारायण का जन्म हुआ। इनके…

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श्रीरामजन्मभूमि : तपस्वी पीढ़ियों की पुण्यकथा

श्रीरामजन्मभूमि : तपस्वी पीढ़ियों की पुण्यकथा

अयोध्या चर्चा में है, सदा रहती आयी है। मानवेन्द्र महाराज मनु-निर्मिता यह नगरी कभी अप्रासंगिक नहीं होती। सन्दर्भ-प्रसंग कोई हो, पर अयोध्या उल्लेखनीय बनी रहती है। वास्तव में यह उल्लेखनीयता इसके महत्त्व का सहज प्रमाण ही है। किस प्रकार धर्म के बल से, खोये हुए को पुनः पाया जाता है, अयोध्या इसका उदाहरण है। लोकोत्तर…

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