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संगीतकार विष्णु नारायण भातखण्डे

संगीतकार विष्णु नारायण भातखण्डे

देश, काल और पात्र भेद से संगीत में समयानुकूल परिवर्तन हुए हैं। प्रायः एक शताब्दी पूर्व ही संगीत की गति अवरुद्ध हो गयी थी और युग धर्मानुसार उसका पुनरुत्थान होना परमाश्यक माना गया। ऐसे समय मुम्बई प्रान्त के बालकेश्वर ग्राम में 10 अगस्त 1860 को एक ब्राह्मण परिवार में विष्णु नारायण का जन्म हुआ। इनके…

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श्रीरामजन्मभूमि : तपस्वी पीढ़ियों की पुण्यकथा

श्रीरामजन्मभूमि : तपस्वी पीढ़ियों की पुण्यकथा

अयोध्या चर्चा में है, सदा रहती आयी है। मानवेन्द्र महाराज मनु-निर्मिता यह नगरी कभी अप्रासंगिक नहीं होती। सन्दर्भ-प्रसंग कोई हो, पर अयोध्या उल्लेखनीय बनी रहती है। वास्तव में यह उल्लेखनीयता इसके महत्त्व का सहज प्रमाण ही है। किस प्रकार धर्म के बल से, खोये हुए को पुनः पाया जाता है, अयोध्या इसका उदाहरण है। लोकोत्तर…

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'बस जीवित रहना, मरना नहीं': एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

‘बस जीवित रहना, मरना नहीं’: एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

मेरे पिताजी श्री सुगन्धचन्द कावड़िया बदनावर में बस अड्डे के पास होटल चलाते थे। वे पहलवान थे। वे तथा उनके एक मित्र साण्डू पहलवान दोनों मिलकर बदनावर में तीन-चार अखाड़े चलाते थे। अखाड़ों में कुश्ती के साथ-साथ मलखम्ब, तलवार, गतका आदि का भी अभ्यास किया जाता था। पिताजी अपने होटल से ही पहलवानों को खूब…

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'हाइपर कनेक्टिविटी' के दौर में युवाओं पर गहराता अकेलापन

‘हाइपर कनेक्टिविटी’ के दौर में युवाओं पर गहराता अकेलापन

प्रो. संजय द्विवेदी सही मायनों में मानव सभ्यता के इतिहास में दुनिया इतनी कनेक्टेड कभी नहीं थी। एक क्लिक, एक संदेश और कुछ ही सेकेंड्स में सात समंदर पार बातचीत हो जाना किसी जादुई अहसास जैसा है। मोबाइल की चौबीस घंटे चमकती स्क्रीन ने इस जादुई दुनिया को हमारी हकीकत बना दिया है। लेकिन इस…

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चतुरी: इतिहास का अनसुना नाम

चतुरी: इतिहास का अनसुना नाम

“एक रोटी की शिकायत… और देखते ही देखते पूरी नैनी सेंट्रल जेल रणभूमि बन गई। आखिर 20 जनवरी 1928 को ऐसा क्या हुआ था कि गोलियाँ चलानी पड़ीं, कई लोग मारे गए और एक कैदी को उम्रकैद की सज़ा मिली? यह कहानी है उन्नाव के चतुरी की।” ब्रिटिश राज में 1898 में उत्तर प्रदेश के…

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भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। यह पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में…

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भगवान बुद्ध ने रामनगरी में किया था चातुर्मास

भगवान बुद्ध ने रामनगरी में किया था चातुर्मास

चातुर्मास का धार्मिक महत्व केवल सनातन परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि बौद्ध परंपरा में भी इसका विशेष स्थान रहा है। इतिहासकारों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, भगवान गौतम बुद्ध ने भी वर्षा ऋतु के दौरान अयोध्या (प्राचीन साकेत) में चातुर्मास किया था। वर्तमान में राम जन्मभूमि से करीब डेढ़ किमी की दूरी पर स्थित…

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डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि : विज़न से यथार्थ तक भारत की यात्रा

डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि : विज़न से यथार्थ तक भारत की यात्रा

27 जुलाई भारत के लिए एक ऐसी तारीख है, जब पूरा देश मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को स्मरण करता है। एक तमिलभाषी, गीतापाठी, रामभक्त, वीणावादक अब्दुल कलाम साहब भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति (2002) थे। शिलांग के भारतीय प्रबंधन संस्थान में छात्रों को व्याख्यान देते हुए उनका निधन हुआ था। ग्यारह वर्ष…

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डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार

डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार

प्रो. संजय द्विवेदी हां, सामने मीडिया की पढ़ाई करने की चाह रखने वाले विद्यार्थी ही थे, उम्मीद की जानी चाहिए कि वे कोई अखबार, मैगजीन या किताबे पढ़कर आए होंगे। लगभग 110 विद्यार्थियों से बात करते हुए यह अहसास हुआ कि अखबार अब उनकी जिंदगी में कोई जगह नहीं रखता। वे जो कुछ भी ग्रहण…

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सच्ची भक्ति का फल – कुएं में भगवान के दर्शन करते हुए भक्त की प्रेरणादायक धार्मिक कथा

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी मनुष्य के जीवन में सच्ची भक्ति का फल केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि आत्मिक शांति, ईश्वर का सान्निध्य और जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त करना होता है। इतिहास, पुराण और संत साहित्य ऐसे अनेक प्रसंगों से भरे पड़े हैं, जो बताते हैं…

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