साहित्य

वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर 0

वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर

पानी पर लिखी हुई बातें लिखते- लिखते बह जाती हैं। नहीं शेष उनकी किंचित स्मृतियाँ भी रह जाती हैं। पर एक सदी से सागर के वक्षस्थल...

वीर सावरकर कृत ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक का इतिहास 0

वीर सावरकर कृत ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक का इतिहास

कहते हैं 1857 की क्रांति विफल हुई। क्या यह कहना सही है? नहीं! 1857 का महासंग्राम उसके बाद की पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए सतत...

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वतंत्र स्तंभकार है।) 0

राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक गौरव एवं हिन्दुत्व चिंतन की प्रधानता है सावरकर जी के लेखन में

स्वातंत्र्यवीर विनायक सावरकर का पूरा जीवन राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा के लिये समर्पित रहा। बालवय से जीवन की अंतिम श्वाँस तक वे कभी...

निष्ठावान कार्यकर्ता हो. वे. शेषाद्रि 0

निष्ठावान कार्यकर्ता हो. वे. शेषाद्रि

आज तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साहित्य हर भाषा में प्रचुर मात्रा में निर्माण हो रहा है; पर इस कार्य के प्रारम्भ में जिन कार्यकर्ताओं की...

आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा 0

आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा

भारत की सांस्कृतिक चेतना में गंगा दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रकृति-सम्मान और नैतिक जीवन का संदेश देने वाला महापर्व है। भारतीय संस्कृति...

'स्वभाव में जीना अध्यात्म और प्रभाव में जीना भौतिकता है' 0

‘स्वभाव में जीना अध्यात्म और प्रभाव में जीना भौतिकता है’

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपालः पत्रकारिता का पेशा कोई आसान काम नहीं है। घर में, संबंधियों में और रिश्तों में आपेक्षाएं पूरी करते हुए कई बार लोग शिकायतों...

पोखरण परमाणु परीक्षण: भारत की वैज्ञानिक शक्ति और आत्मसम्मान का ऐतिहासिक क्षण 0

पोखरण परमाणु परीक्षण: भारत की वैज्ञानिक शक्ति और आत्मसम्मान का ऐतिहासिक क्षण

भारत के इतिहास में 11 मई और 13 मई 1998 की तिथियाँ स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं। इन्हीं दिनों राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित पोखरण परीक्षण...

अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में 'प्रताप' होने का अर्थ 0

अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में ‘प्रताप’ होने का अर्थ

जब स्वाधीनता ने स्वयं को मानवीय स्वरूप में प्रकट करना चाहा, जब समता और समन्वय ने ‘योद्धा’ के रूप में खुद को ढालने की आरजू की,...

विदेशियों के लिए धर्म-विज्ञान की प्रयोगशाला रही काशी 0

विदेशियों के लिए धर्म-विज्ञान की प्रयोगशाला रही काशी

25 साल पहले तक काशी विदेशियों के लिए में धर्म-विज्ञान की एक प्रयोगशाला रही। यहां के शास्त्र, मंदिर, कथाएं, किस्से और किवदंतियां सब कुछ वैज्ञानिक जांच...

कार्पोरेट जिहाद: कई कम्पनियों में चल रहा धर्मान्तरण का खेल 0

कार्पोरेट जिहाद: कई कम्पनियों में चल रहा धर्मान्तरण का खेल

गर आपको लगता है कि आपके बगल में बैठा अब्दुल सेक्युलर है। सभी धर्म को समान रूप से देखा है। उसके सोशल मीडिया पोस्ट भी यही...