साहित्य

महाभारत के संवाद लेखन का अर्धसत्य 0

महाभारत के संवाद लेखन का अर्धसत्य

कोरोना के कारण लॉकडाउन में लोगों के सामने बेहतरीन धारावाहिक प्रस्तुत करने के दूरदर्शन के प्रयासों के चलते ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के अलावा कई पुराने और...

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… और आदि शंकर ने उस अनूठे व्यक्ति को अपना गुरु बना लिया

शंकराचार्य नित्य-प्रति गंगा में स्नान करके तर्पण किया करते थे। सूर्योदय से पूर्व उनकी संध्या-पूजा पूर्ण हो जाती। एक दिन सूर्योदय होते-होते वे पूजा समाप्त करके...

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श्रीगुरुजी को संन्यासी जीवन से वापस खींच लाया संघ कार्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ के जीवन का एक दौर ऐसा भी है, जब वे दुनियादारी छोड़कर अध्यात्म के मार्ग पर...

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माता सीता की संकल्पशीलता, दायित्व बोध और मर्यादा का पालन आज भी प्रासंगिक

माता सीता के जीवन और उनके जीवन में घटी घटनाओं को हजारों वर्ष बीत गये हैं। लेकिन स्मृति में वे आज भी जीवन्त हैं। उनका व्यक्तिगत...

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आदि शंकराचार्य: सनातन धर्म के पुनर्जागरण के दिव्य प्रकाश स्तंभ

‘शंकरो शंकर: साक्षात्’। एक संन्यासी बालक, जिसकी आयु मात्र 7 वर्ष थी, गुरुगृह के नियमानुसार एक ब्राह्मण के घर भिक्षा माँगने पहुँचा। उस ब्राह्मण के घर...

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कृष्ण की लीला और भीष्म का आशीर्वाद: द्रौपदी की रक्षा का अद्भुत प्रसंग

महाभारतका युद्ध प्रारम्भ हो गया था। सहसा एक रात्रिको धर्मराजके चरोंने समाचार दिया कि दुर्योधनके द्वारा उत्तेजित किये जानेपर भीष्मपितामहने प्रतिज्ञा की है कि कल वे...

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संत रामानुजाचार्य: जीवन, दर्शन और सामाजिक समरसता के महान प्रवर्तक

संत रामानुजाचार्य का जन्म श्रीपेरुंबुडूर, तमिलनाडु में 1074 ईस्वी (वैशाख शुक्ल षष्ठी,1017) में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवाचार्य व माता जी का नाम कान्तिमती था। बचपन से ही संत रामानुजाचार्य की...

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आदि शंकराचार्य: अद्वैत दर्शन और वैदिक धर्म के पुनर्जागरण के महान प्रवर्तक

शंकराचार्य के जीवन का प्रधान लक्ष्य वैदिक धर्म की प्रतिष्ठा तथा प्रचार था। उन्होंने अपने प्रखर व्यक्तित्व के बल पर इन समस्त अवैदिक अथवा अर्धवैदिक तथा...