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संविधान सभा में संस्कृत : राज-भाषा अथवा राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार करने के पक्ष में

संविधान सभा में संस्कृत : राज-भाषा अथवा राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार करने के पक्ष में

संविधान निर्माण की प्रक्रिया के दौरान संविधान सभा में ‘भाषा’ के विषय पर 12-14 सितम्बर, 1949 को वाद-विवाद हुआ था. इस प्रस्ताव पर सभा में दो पक्ष थे – पहला जो स्पष्ट रूप से संस्कृत को राज-भाषा और राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार करते थे और दूसरा पक्ष एकदम खिलाफ नहीं था, लेकिन उसके…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रान्त प्रचारक बैठक बेलगावी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रान्त प्रचारक बैठक बेलगावी में शुरू

बेलगावी (कर्नाटक)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रान्त प्रचारक बैठक कर्नाटक के बेलगावी में आज सुबह शुरू हुई। बैठक में पू. सरसंघचालक डा. मोहन भागवत जी, मा. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी, सभी सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्य विभाग प्रमुख, सह प्रमुख, कार्यकारिणी सदस्य, क्षेत्र प्रचारक, सह क्षेत्र प्रचारक तथा सभी 46 प्रांतों के प्रांत…

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प्रत्येक समस्या को राजनीतिक दृष्टि से न देखें– श्री सुनील आंबेकर

प्रत्येक समस्या को राजनीतिक दृष्टि से न देखें– श्री सुनील आंबेकर

नई दिल्ली: इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के तत्वावधान में मंगलवार 16 जून 2026 स्पीकर हॉल, कांस्टीटयूशन क्लब में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान समारोह 2026 का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एनडीटीवी के सीईओ एवं एडिटर इन चीफ श्री राहुल कंवल जी मुख्य अतिथि तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री…

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'हाइपर कनेक्टिविटी' के दौर में युवाओं पर गहराता अकेलापन

‘हाइपर कनेक्टिविटी’ के दौर में युवाओं पर गहराता अकेलापन

प्रो. संजय द्विवेदी सही मायनों में मानव सभ्यता के इतिहास में दुनिया इतनी कनेक्टेड कभी नहीं थी। एक क्लिक, एक संदेश और कुछ ही सेकेंड्स में सात समंदर पार बातचीत हो जाना किसी जादुई अहसास जैसा है। मोबाइल की चौबीस घंटे चमकती स्क्रीन ने इस जादुई दुनिया को हमारी हकीकत बना दिया है। लेकिन इस…

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श्री गुरुजी – जिनके एक आह्वान पर युवाओं ने जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया

डॉ. शुचि चौहान वर्ष 1942, दिनांक 17 मार्च, अवसर था वर्ष प्रतिपदा का। एक कृश काय सन्यासी लोगों को सम्बोधित कर रहा था – “हमारा अहोभाग्य है कि हम आज जैसी संकटपूर्ण परिस्थिति में पैदा हुए हैं। संसार में उसी का नाम अमर होता है जो संकटकाल में कुछ कर दिखाता है। एक वर्ष के…

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ध्वजारोहण – त्याग, प्रेरणा, अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

ध्वजारोहण – त्याग, प्रेरणा, अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

ध्वजारोहण (झंडा फहराना) केवल एक औपचारिक या राष्ट्रीय अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व भी जुड़ा है। इसके धार्मिक और साहित्यिक महत्वों को सूक्ष्मता से समझा जा सकता है। आध्यात्मिक महत्व की चर्चा करें तो यह स्वाभिमान और आंतरिक जागृति का प्रतीक माना गया है। झंडा फहराने का अर्थ…

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इन कारणों से स्मार्ट भाषा है संस्कृत...

इन कारणों से स्मार्ट भाषा है संस्कृत…

हम अपने बचपन के दिनों में संस्कृत के श्लोक कंठस्थ किया करते थे। हमारे शिक्षक अक्सर कहा करते थे कि संस्कृत बोलने से जुबान साफ होती है। वे यह भी बताते थे कि कंप्यूटर संस्कृत भाषा के कमांड को बड़ी आसानी से समझ सकता है। कई बार विदेशियों के शरीर पर संस्कृत के श्लोक गुदे…

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बाढ़ पीड़ितों के बीच सेवा भारती का राहत अभियान जारी

बाढ़ पीड़ितों के बीच सेवा भारती का राहत अभियान जारी

गांव-गांव पहुंचकर भोजन, कपड़े और जरूरत का सामान कर रही वितरित चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सेवा भारती ने राहत एवं सेवा अभियान तेज कर दिया है। 29 अगस्त से लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर संस्था द्वारा जरूरतमंद परिवारों को भोजन, कपड़े और दैनिक उपयोग…

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दुनिया में यह पौधा है, ईश्वर का वरदान, इसके औषधीय गुण जानकर डॉक्टर भी हैं हैरान

दुनिया में यह पौधा है, ईश्वर का वरदान, इसके औषधीय गुण जानकर डॉक्टर भी हैं हैरान

#नागफनी को संस्कृत भाषा में वज्रकंटका कहा जाता है . इसका कारण शायद यह है कि इसके कांटे बहुत मजबूत होते हैं . पहले समय में इसी का काँटा तोडकर कर्णछेदन कर दिया जाता था .इसके Antiseptic होने के कारण न तो कान पकता था और न ही उसमें पस पड़ती थी . कर्णछेदन से…

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पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय भारत के एक महान विचारक, दार्शनिक और राजनेता थे, जिन्होंने दुनिया को एकात्म मानववाद का एक बेहद अनूठा और गहरा सिद्धांत दिया। उनके इस दर्शन में व्यक्ति, समाज, प्रकृति और ईश्वर को अलग-अलग टुकड़ों में नहीं, बल्कि एक ही श्रृंखला के अभिन्न हिस्से के रूप में देखा गया है। उनके इसी चिंतन…

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