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संघ-पथ का अविश्रांत पथिक

संघ-पथ का अविश्रांत पथिक

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्रीगुरुजी जिस महापुरुष की प्रेरणा और ज्ञान से हम कार्य करते हैं, उसने अपने हृदय पर सत्संस्कार करके अपने अन्दर के सारे अवगुणों का उन्मूलन कर सद्गुणों को प्रकट किया। संघ के जन्मदाता का यदि हम स्मरण करें तो हम भी अपने स्वभाव पर नियंत्रण ला उसमें परिवर्तन अवश्य कर सकते…

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गोस्वामी तुलसीदास के राम

गोस्वामी तुलसीदास के राम

मध्य काल में जब विदेशी आक्रमणकारियों और सल्तनतों ने हिंदू समाज की रोटी, बेटी और चोटी पर निशाना बनाया, जब समाज निराश था, तब भक्त कवियों ने ईश्वर के सहारे देश को जगाया। संत कवि गोस्वामी तुलसीदास उन्हीं भक्त कवियों में से ही एक थे। वे सुगण भक्ति धारा के कवि और संत थे। तुलसी…

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करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज भारतीय सन्त परम्परा के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन धर्म, वेद-वेदान्त, भारतीय संस्कृति और धर्मशास्त्रों के अध्ययन तथा संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनका संन्यास-नाम स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती था। कठोर तपस्या, अद्भुत शास्त्रज्ञान, वैराग्य और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा के कारण वे देशभर…

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गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

यह एक महान गुरु की कथा है। उनका नाम महर्षि आश्वलायन था। उन्हें इस बात का गौरव था कि उनके द्वारा शिक्षित प्रत्येक विद्यार्थी राष्ट्र का प्रतिभाशाली, मेधावी और चरित्रवान नागरिक बना। उनके शिष्यों में मची प्रधानमंत्री, सेनापति, कुरुपद का कृषि-पंडित तथा अनेक प्रसिद्ध व्यक्ति सम्मिलित थे। एक दिन महर्षि को ज्ञात हुआ कि उनके…

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‘गणपति संगठन के देवता हैं’ : डॉ. मोहन राव भागवत

‘गणपति संगठन के देवता हैं’ : डॉ. मोहन राव भागवत

नागपुर। प्रसिद्ध टेकड़ी गणपति मंदिर के गर्भगृह के लोकार्पण अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने गणपति के आध्यात्मिक एवं सामाजिक स्वरूप की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि गणपति गणनायक हैं और संगठन के देवता हैं। उनके भीतर संगठन की प्रचंड शक्ति एकत्रित है। वे सुखकर्ता, दुःखहर्ता और सभी विघ्न-बाधाओं का नाश…

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गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

आज से ठीक 6 वर्ष पूर्व एक वर्षा-आँधी वाली रात मेरे एक सहयोगी ने मुझे फोन किया और पूछा कि क्या श्री गुरुजी गोलवलकर जी की डॉक्टरी परीक्षा करने का समय दे सकता हूँ। अगले प्रातः मैं उन्हें देखने चल दिया। कार की गति के साथ अनेक विचार भी मेरे मस्तिष्क में दौड़ रहे थे।…

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राष्ट्रधर्म और अदम्य साहस के प्रतीक

राष्ट्रधर्म और अदम्य साहस के प्रतीक

बंदा सिंह बहादुर (बंदा वैरागी) समय की पुकार की उपेक्षा कर एकान्त साधना में लीन थे। उसी समय उनकी भेंट दशम गुरु, श्री गुरु गोविन्द सिंह जी से हुई। गुरुजी ने समाज पर हो रहे अत्याचारों, धार्मिक उत्पीड़न तथा पराधीनता की पीड़ा का वर्णन करते हुए कहा “जब देश, धर्म और संस्कृति संकट में हों…

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लोकेषणा की कामना नहीं

लोकेषणा की कामना नहीं

पुणे से जब नागपुर लीटकर आए, तब मैं संघ स्वयंसेवकों की ओर से उनका स्वागत करने के लिए स्टेशन पर गया। थोडी देर में गाड़ी आई डॉक्टर जी डिब्बे के दरवाजे पर ही खडे थे। गाडी रुकते ही साथ लाई श्रद्धासिक्त पुष्पमाला उन्हें अर्पण करने के लिए मैंने ज्यों ही हाँथ बढ़ाए त्यों ही उन्होंने…

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डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

डॉक्टर जी का जीवन सन्देश

परमपूजनीय डॉक्टरजी के कष्टपूर्ण, परिश्रमी एवं कर्मठ जीवन से सर्वसाधारण व्यक्ति को एक आशादायी सन्देश मिलता है। दरिद्रता, प्रसिद्धिविहीनता, बड़ों की उदासीनता, परिस्थिति की प्रतिकूलता, पग-पग पर बाधाएँ, विरोध, उपेक्षा, उपहास आदि के कटु अनुभव के साथ-साथ स्वीकृत कार्य की पूर्ति के लिए आवश्यक साधनों का अत्यन्त अभाव आदि कितनी ही कठिनाइयाँ मार्ग में आयें…

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