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'बस जीवित रहना, मरना नहीं': एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

‘बस जीवित रहना, मरना नहीं’: एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी

मेरे पिताजी श्री सुगन्धचन्द कावड़िया बदनावर में बस अड्डे के पास होटल चलाते थे। वे पहलवान थे। वे तथा उनके एक मित्र साण्डू पहलवान दोनों मिलकर बदनावर में तीन-चार अखाड़े चलाते थे। अखाड़ों में कुश्ती के साथ-साथ मलखम्ब, तलवार, गतका आदि का भी अभ्यास किया जाता था। पिताजी अपने होटल से ही पहलवानों को खूब…

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समालखा – राष्ट्र सेविका समिति की अर्धवार्षिक बैठक में जनसंख्या असंतुलन पर प्रस्ताव पारित

राष्ट्र सेविका समिति ने ‘जनसंख्या असंतुलन’ पर प्रस्ताव पास किया

समालखा (हरियाणा)। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी और प्रतिनिधि मंडल की छमाही बैठक समालखा, हरियाणा में संपन्न हुई। बैठक में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी, प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री जी और 40 प्रांतों से 488 प्रतिनिधि शामिल हुए। तीन दिन की मीटिंग के आखिरी सेशन में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी ने कहा…

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भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। यह पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में…

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भगवान बुद्ध ने रामनगरी में किया था चातुर्मास

भगवान बुद्ध ने रामनगरी में किया था चातुर्मास

चातुर्मास का धार्मिक महत्व केवल सनातन परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि बौद्ध परंपरा में भी इसका विशेष स्थान रहा है। इतिहासकारों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, भगवान गौतम बुद्ध ने भी वर्षा ऋतु के दौरान अयोध्या (प्राचीन साकेत) में चातुर्मास किया था। वर्तमान में राम जन्मभूमि से करीब डेढ़ किमी की दूरी पर स्थित…

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सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी दिल्ली बैनर स्लाइडर शीर्ष क्षैतिज स्क्रॉल समाचा

सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी

“युगानुकूल मातृत्व” पर विश्वमांगल्य सभा की प्रबोधन बैठक संपन्न नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026। विश्वमांगल्य सभा की “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि मातृत्व विषय पर मुझे बोलने के लिए कहना यह अपने आप में एक विरोधाभास है।…

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श्रीराम मंदिर प्रकरण पर दुष्प्रचार के खिलाफ संत समाज एकजुट, अयोध्या में संत मंडल संगोष्ठी आयोजित

अयोध्या, 23 जुलाई। अयोध्या धाम स्थित श्री राम सत्संग भवन, धर्म मंडपम (मणिरामदास छावनी) में गुरुवार को आयोजित संत मंडल संगोष्ठी में श्रीराम मंदिर से जुड़े हालिया प्रकरण को लेकर देशभर में फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार पर संतों ने चिंता व्यक्त करते हुए इसका विरोध किया। संगोष्ठी में संतों ने कहा कि अयोध्या की…

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प्रकृति प्रेमी कालिदास

महाकवि कालिदास: जीवन, रचनाएँ, साहित्य और प्रेरणादायक व्यक्तित्व

भारतीय साहित्य के इतिहास में यदि किसी एक कवि ने अपनी प्रतिभा से भाषा, संस्कृति, प्रकृति, दर्शन और मानवीय भावनाओं को एक साथ अमर बना दिया, तो वे महाकवि कालिदास हैं। संस्कृत साहित्य के इस महान् कवि और नाटककार ने अपनी अनुपम रचनाओं के माध्यम से न केवल भारतीय काव्य परम्परा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान…

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रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

✍️ प्रणय विक्रम सिंह कुछ व्यक्तित्वों पर लिखना शब्दों का काम नहीं होता, श्रद्धा का काम होता है। कलम चलती अवश्य है, लेकिन लिखता हृदय है। परम पूज्य चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ का स्मरण भी कुछ ऐसा ही है। उनके बारे में सोचते ही मन में किसी बड़े पद की नहीं, एक…

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आस्था को लांछित करने का कुचक्र

आस्था को लांछित करने का कुचक्र

आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण पीठाधीश्वर, सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास, अयोध्याrasikopasna@gmail.com                   संस्कृतियाँ स्मृतियों से अपना परिष्कार करती हैं। ये स्मृतियाँ अनुभवों के साथ चलती हैं। संकल्प के-सिद्धि के, संघर्ष के-सफलता के अगणित कथानक मनुष्यता के स्मृति-कोष में अनादि काल से संरक्षित हैं। हमारी आस्था इन्हीं स्मृतियों से जीवनी शक्ति प्राप्त करती है। मनुष्यता के विरुद्ध चला आता अमानवीय संघर्ष…

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इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा

इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति की अमिट छाप: लालकृष्ण आडवाणी और विद्यानिवास मिश्र के संस्मरण

इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति आज भी अनेक सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक स्थलों और सामाजिक जीवन में दिखाई देती है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी तथा प्रख्यात साहित्यकार विद्यानिवास मिश्र ने अपनी यात्राओं के दौरान ऐसे कई अनुभव साझा किए, जिनमें रामायण, महाभारत और संस्कृत परंपरा के प्रभाव का उल्लेख मिलता है। इन संस्मरणों के माध्यम से इंडोनेशिया…

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