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विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना

डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे भारतीय परंपरा में विजयादशमी का पर्व केवल राम की रावण पर विजय का स्मरण नहीं है, बल्कि यह सत्य पर असत्य की, धर्म पर अधर्म की और संगठन पर बिखरी हुई शक्ति की विजय का प्रतीक है। श्रीगुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) इस पर्व को संघ के लिए विशेष महत्त्व का मानते…

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क्या है ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ?

क्या है ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ?

डॉ प्रवीण गुनानी आ सिंधु-सिंधु पर्यन्ता, यस्य भारत भूमिका.पितृभू-पुण्यभू भुश्चेव सा वै हिंदू रीति स्मृता. इस श्लोक के अनुसार “भारत के वह सभी लोग हिंदू हैं जो इस देश को पितृभूमि-पुण्यभूमि मानते हैं”वीर दामोदर सावरकर के इस दर्शन को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का मूलाधार बनाकर संघ का संगठन, संस्थापना करने वाले डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी…

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संघ को समझना है तो शाखा आइए

संघ को समझना है तो शाखा आइए

राजीव तुली विभिन्न कारणों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चर्चा में रखना मित्रों तथा अमित्रों दोनों के लिए लाभप्रद रहता है। अमित्र लिखा है, शत्रु नहीं, क्योंकि संघ किसी को भी अपना शत्रु नहीं मानता है। समाज दो भागों में है—एक जो आज स्वयंसेवक हैं और दूसरे जो भविष्य में संघ से जुड़ेंगे, ऐसी संघ…

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पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन में चिति का विचार

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय भारत के एक महान विचारक, दार्शनिक और राजनेता थे, जिन्होंने दुनिया को एकात्म मानववाद का एक बेहद अनूठा और गहरा सिद्धांत दिया। उनके इस दर्शन में व्यक्ति, समाज, प्रकृति और ईश्वर को अलग-अलग टुकड़ों में नहीं, बल्कि एक ही श्रृंखला के अभिन्न हिस्से के रूप में देखा गया है। उनके इसी चिंतन…

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भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। यह पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में…

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राष्ट्रीय एकता के अनथक साधक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

राष्ट्रीय एकता के अनथक साधक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम उन नेताओं में लिया जाता है जिन्होंने सत्ता से अधिक सिद्धान्तों को महत्व दिया। वे स्वतंत्र भारत के उन विरले व्यक्तित्वों में थे जिन्होंने राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने सार्वजनिक जीवन का आधार बनाया। शिक्षाविद्, सांसद, केंद्रीय मंत्री और…

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पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन

पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन

नई दिल्ली, 3 जुलाई 2026। राष्ट्र भक्ति और वैचारिक पत्रकारिता के संवाहक साप्ताहिक पत्र ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित एक विशेष वृत्तचित्र (Documentary) ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन झंडेवालान स्थित ‘विचार विनिमय न्यास सभागार’ में किया गया। कार्यक्रम…

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पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने पूरे देश को अचंभित और आनंदित किया है।

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने पूरे देश को अचंभित और आनंदित किया है।

दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 में मुझे बंगाल जाने का अवसर मिला था। वहाँ अधिकांश लोग परिवर्तन की इच्छा तो रखते थे, किंतु यह परिवर्तन वास्तव में संभव हो सकेगा, ऐसा विश्वास बहुत कम लोगों को था। परिस्थितियाँ भी ऐसी थीं कि परिवर्तन किसी चमत्कार से कम नहीं लगता था। निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान के…

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हिंदू जाति के प्रतिनिधि कवि के प्रति उदासीनता

हिंदू जाति के प्रतिनिधि कवि के प्रति उदासीनता

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के लेखन पर कुछ काम करते हुए कवि भूषण के बारे में उनकी राय सामने आई। आचार्य शुक्ल ने कवि भूषण को ‘हिंदू जाति का प्रतिनिधि कवि’ कहा है। जाति से आचार्य शुक्ल का आशय किसी ‘कास्ट’ से नहीं, बल्कि हिंदू राष्ट्रीयता से है, क्योंकि हिंदू कोई जाति तो है नहीं। आचार्य…

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