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धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

डॉ. बिपिन कुमार पाण्डेयशिक्षक, ज्योतिर्विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति विजय में नहीं, क्षमा में होती है; क्योंकि विजय केवल शत्रु को परास्त करती है, जबकि क्षमा शत्रुता का ही अंत कर देती है। जहाँ प्रतिशोध सभ्यता का अवसान करता है, वहीं क्षमा संस्कृति का उदय करती है। मनुष्य की वास्तविक विजय…

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब: आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्रीय एकसूत्रता का महान संदेश

भारत ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की धरती है। यहाँ वेद, गीता, रामचरितमानस जैसे कई धार्मिक ग्रंथों की रचना हुई। विश्व के प्रमुख धर्मग्रंथों में सबसे नवीन है गुरु ग्रंथ साहिब। न केवल आकार की दृष्टि से, बल्कि सामग्री के लिहाज से भी यह एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें ईश्वर और मोक्ष के अलावा जीवन के…

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विनोबा भावे का राष्ट्र चिन्तन

विनोबा भावे का राष्ट्र चिन्तन

आचार्य विनोबा भावे भारतीय नवजागरण उन प्रमुख चिन्तकों में से हैं, जिनके विचारों में आध्यात्मिकता, नैतिकता, सामाजिक न्याय और राष्ट्र-निर्माण का अद्भुत समन्वय दिखायी देता है। उनका राष्ट्र चिन्तन संकीर्ण राजनीतिक राष्ट्रवाद से आगे बढ़कर एक ऐसे मानवतावादी और समग्र राष्ट्र की कल्पना प्रस्तुत करता है, जो मनुष्य की बाह्य स्वतंत्रता के साथ-साथ उसकी आन्तरिक…

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समालखा – राष्ट्र सेविका समिति की अर्धवार्षिक बैठक में जनसंख्या असंतुलन पर प्रस्ताव पारित

राष्ट्र सेविका समिति ने ‘जनसंख्या असंतुलन’ पर प्रस्ताव पास किया

समालखा (हरियाणा)। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी और प्रतिनिधि मंडल की छमाही बैठक समालखा, हरियाणा में संपन्न हुई। बैठक में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी, प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री जी और 40 प्रांतों से 488 प्रतिनिधि शामिल हुए। तीन दिन की मीटिंग के आखिरी सेशन में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी ने कहा…

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रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

✍️ प्रणय विक्रम सिंह कुछ व्यक्तित्वों पर लिखना शब्दों का काम नहीं होता, श्रद्धा का काम होता है। कलम चलती अवश्य है, लेकिन लिखता हृदय है। परम पूज्य चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ का स्मरण भी कुछ ऐसा ही है। उनके बारे में सोचते ही मन में किसी बड़े पद की नहीं, एक…

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‘कबीर यहु घर प्रेम का, खाला का घर नांहि’ – संत संत कबीरदास

‘कबीर यहु घर प्रेम का, खाला का घर नांहि’ – संत संत कबीरदास 

संक्षिप्त परिचय  इससे सिद्ध होता है कि संत कबीरदास  वस्तुतः रामानंद के शिष्य थे और उन्हीं से उन्हें रामनाम का मंत्र मिला था। संत कबीरदास  और सामाजिक समरसता   संत कबीरदास ने समाज में सामाजिक सद्भाव लाने का कार्य किया। उन्होंने लोगों को अनुभवपरक ज्ञान के आधार पर समझाने का कार्य किया। कबीर के विचार उनके…

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करोड़ों देशभक्त नागरिकों के दिलों में है आरएसएस का पंजीयन

करोड़ों देशभक्त नागरिकों के दिलों में है आरएसएस का पंजीयन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पंजीकृत क्यों नहीं है? यह अपने आय-व्यय का हिसाब-किताब क्यों नहीं देता है? आरएसएस पारदर्शिता नहीं रखता है। ये ऐसे सवाल हैं, जो संघ को बदनाम करने या उसके प्रति समाज में संदेह पैदा करने के लिए अकसर उछाले जाते हैं। हालांकि, इन सवालों का कोई औचित्य नहीं है। समाज से…

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राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी

राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी

प्रयागराज, 7 जून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने देशवासियों से आतंकवाद, अर्बन नक्सलवाद, मतांतरण और बाजारवाद जैसी चुनौतियों का सामूहिक रूप से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने के लिए पूरे समाज को संघ के साथ मिलकर इन चार बड़ी…

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युग-ऋषि, महंत अवेद्यनाथ: समरसता के महानाद और सनातन के संबल

युग-ऋषि, महंत अवेद्यनाथ: समरसता के महानाद और सनातन के संबल

​काल के अनंत प्रवाह में कुछ महापुरुषों का जीवन किसी एकांत निर्जन में ठहरा हुआ सरोवर नहीं होता, बल्कि वह पर्वतों की छाती चीरकर बहने वाले उस पावन झरने की तरह होता है, जो जब आगे बढ़ता है, तो सदियों की सूखी माटी में भी प्राण फूंक देता है। भारतीय संस्कृति के इतिहास में गोरक्षपीठ…

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