राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी – विश्व संवाद केन्द्र अवध, लखनऊ
(6 जून 26- शनिवार)
उन्नाव : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का समापन समारोह शनिवार को उन्नाव में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह श्री अनिल जी ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि, संघ का मूल उद्देश्य व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से संगठित, सक्षम एवं राष्ट्रभक्त समाज का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा पद्धति व्यक्ति निर्माण का एक प्रभावी माध्यम है, जिसके द्वारा समाज जागरण एवं व्यवस्था परिवर्तन का कार्य निरंतर चल रहा है।

अपने उद्बोधन में अनिल जी ने शिक्षा वर्ग के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ शिक्षा वर्ग त्याग, तपस्या, समर्पण और अनुशासन का प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह केवल शारीरिक अथवा बौद्धिक प्रशिक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का माध्यम है। वर्ग में प्राप्त संस्कार स्वयंसेवकों को राष्ट्र एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराते हैं।

सह क्षेत्र कार्यवाह जी ने वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में निरन्तर प्रगति कर रहा है। देश में अनेक विकास कार्य हो रहे हैं तथा विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है। इसके साथ ही उन्होंने चेताया कि समाज के समक्ष अनेक चुनौतियाँ भी उपस्थित हैं। विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रभावना का क्षय, जनसंख्या असंतुलन, अन्धाधुन्ध पाश्चात्य अनुकरण, अत्यधिक भौतिकता तथा जीवन मूल्यों में गिरावट जैसी समस्याएँ समाज के लिए चिन्ता का विषय हैं।

अनिल जी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर अपने कर्तव्यों का पालन करे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देने वाली आचरण की प्रक्रिया है। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करेगा, तभी राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनेगा।

उन्होंने इन चुनौतियों के समाधान के रूप में संघ द्वारा प्रतिपादित “पंच परिवर्तन” की अवधारणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे विषय आज अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। यदि समाज इन क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करेगा तो राष्ट्र जीवन में व्यापक सुधार सम्भव होगा।

मुख्य वक्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार विश्व कल्याण की भावना है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” का सन्देश देने वाली हमारी संस्कृति सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाती है। राष्ट्रभक्त एवं संस्कारित समाज ही विश्व के समक्ष आदर्श प्रस्तुत कर सकता है। भारतीय जीवन मूल्यों, पारिवारिक व्यवस्था तथा समरस सामाजिक दृष्टि को अपनाकर न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व का कल्याण सम्भव है।

उन्होंने स्वयंसेवकों का आह्वान किया कि वर्ग में प्राप्त प्रशिक्षण और संस्कारों को अपने दैनिक जीवन में उतारें तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक राष्ट्रभक्ति, सेवा और संगठन का सन्देश पहुँचाएँ। स्वयंसेवक अपने आचरण, व्यवहार और सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदस्य अन्तरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान एवं अध्यक्ष बुद्धिस्ट सोसायटी फ़ार अंजू एंड सोशल वेलफेयर लखनऊ भन्ते श्रीशील रतन जी ने स्वयंसेवकों का आह्वान करते हुए कहा, शरीर यदि स्वस्थ होता है तो मन भी स्वस्थ प्रसन्न रहता है। उन्होंने कहा-भारत पहले भी विश्व गुरु था आगे भी रहेगा। राष्ट्र और समाज परिवर्तन एक दिन का काम नहीं है। एक एक स्वयंसेवक यदि अपने घर गली को बेहतर बना दे तो भारत बदल जाएगा।
विगत 22 मई से चल रहे प्रशिक्षण वर्ग का आज अन्तिम दिवस था। कल सुबह अवध प्रान्त के विभिन्न जिलों से आए हुए शिक्षार्थी दीक्षान्त समारोह के बाद अपने अपने घर जा सकेंगे।
इस वर्ग में 26 जिलों के 169 खण्ड/नगर के 281 स्थानों से 24 परास्नातक 64 स्नातक 12 शिक्षक 192 इंटरमीडिएट छात्र कुल 334 अलग अलग आयु वर्ग के शिक्षार्थी अपने द्वारा वर्ग का शुल्क, गणवेश एवं अपने निवास से वर्ग में आने जाने का व्यय भार स्वयं वहन करते हुए सहभागी हुए ।

वर्ग में भोजन के लिए ग्राम/नगर से प्रतिदिन दोनों समय के लिए परिवार से 20-20 रोटी कुल 1,20,000 रोटियों का संग्रह किया गया ।
आज समापन समारोह के इस अवसर पर अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख नवल जी , वर्ग के सर्वाधिकारी प्रमोद जी, वर्ग कार्यवाह कृष्ण कुमार जी, सर्व व्यवस्था प्रमुख लालता प्रसाद जी , सह व्यवस्था प्रमुख सुशील जी, प्रान्त प्रचारक कौशल जी , सह प्रांत प्रचारक संजय जी , प्रांत प्रचारक प्रमुख यशोदा नन्द जी , सह प्रांत कार्यवाह संजय जी , डा.अविनाश जीसम्पर्क प्रमुख गंगा सिंह जी , प्रान्त प्रचार प्रमुख डा.अशोक दुबे, सामाजिक समरसता प्रमुख राज किशोर, शिक्षक, शिक्षार्थी एवं बड़ी संख्या में नगर के स्वयंसेवक, गणमान्य नागरिक एवं वर्ग में सहयोग करने वाले नागरिक उपस्थित रहे।

