केशव ने बीज बोया, माधव ने सींचा, मधुकर ने संवारा

केशव ने बीज बोया, माधव ने सींचा, मधुकर ने संवारा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कलामंडपम में ‘संघ गंगा के तीन भगीरथ’ नाटक का मंचन, संघ यात्रा के तीन कृष्ण-स्वरट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संस्कार भारती अवध प्रांत की ओर से सोमवार शाम कैसरबाग स्थित भातखंडे संस्कृति विवि के कलामंडपम प्रेक्षागृह में ‘संघ गंगा के तीन भगीरथ’ नाटक का प्रभावी मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से संघ की सौ वर्षों की वैचारिक और सांस्कृतिक यात्रा को प्रतीकात्मक और भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया। मंचन की खास बात यह रही कि संघ के तीन सरसंघचालकों डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार जी, गुरुजी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर जी और मधुकर दत्तात्रेय जी की भूमिका को ‘केशव ने बीज बोया, माधव ने सींचा और मधुकर ने संवारा’ के भाव के साथ उकेरा गया। तीनों नाम भगवान श्रीकृष्ण के ही स्वरूप माने जाते हैं, जिसे नाटक में वैचारिक निरंतरता और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक में दिखाया गया कि कैसे डॉ. हेडगेवार जी ने संघ विचार का बीज बोया, गुरुजी गोलवलकर ने उसे संगठनात्मक विस्तार व वैचारिक मजबूती दी और मधुकर दत्तात्रेय जी के कालखंड में उस विचारधारा को सामाजिक समरसता व सांस्कृतिक चेतना के साथ और अधिक संवारा गया। पूरी प्रस्तुति में राष्ट्रधर्म, भारतीय संस्कृति और समाज निर्माण के मूल्यों की सशक्त झलक दिखाई दी।

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