Headlines

admin

भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है – दत्तात्रेय होसबाले जी

भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की लंबी परंपरा रही है – दत्तात्रेय होसबाले जी

गुरु तेगबहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया। भुवनेश्वर, 28 जुलाई 2026। भुवनेश्वर स्थित रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि धर्म विरोधी शक्तियों को यह लगता है कि…

Read Full News
चतुरी: इतिहास का अनसुना नाम

चतुरी: इतिहास का अनसुना नाम

“एक रोटी की शिकायत… और देखते ही देखते पूरी नैनी सेंट्रल जेल रणभूमि बन गई। आखिर 20 जनवरी 1928 को ऐसा क्या हुआ था कि गोलियाँ चलानी पड़ीं, कई लोग मारे गए और एक कैदी को उम्रकैद की सज़ा मिली? यह कहानी है उन्नाव के चतुरी की।” ब्रिटिश राज में 1898 में उत्तर प्रदेश के…

Read Full News
भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। यह पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में…

Read Full News
भगवान बुद्ध ने रामनगरी में किया था चातुर्मास

भगवान बुद्ध ने रामनगरी में किया था चातुर्मास

चातुर्मास का धार्मिक महत्व केवल सनातन परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि बौद्ध परंपरा में भी इसका विशेष स्थान रहा है। इतिहासकारों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, भगवान गौतम बुद्ध ने भी वर्षा ऋतु के दौरान अयोध्या (प्राचीन साकेत) में चातुर्मास किया था। वर्तमान में राम जन्मभूमि से करीब डेढ़ किमी की दूरी पर स्थित…

Read Full News
मातृत्व सभ्यता की नींव है – डॉ. मोहन भागवत जी

मातृत्व सभ्यता की नींव है – डॉ. मोहन भागवत जी

भाग्यनगर, तेलंगाना। विश्वमंगल्या सभा ने 25-26 जुलाई को NI-MSME, यूसुफगुडा, हैदराबाद में दो दिन की प्रबोधन मीटिंग ऑर्गनाइज़ की। इस प्रोग्राम के तहत, रविवार को हैदराबाद के कोमाराम भीम आदिवासी भवन में विश्वमांगल्य सभा की देखरेख में “युगानुकुल मातृत्व” पर एक खास सेमिनार हुआ। हैदराबाद के सेवालाल बंजारा भवन में दो दिन की “दक्षिण भारत…

Read Full News
डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि : विज़न से यथार्थ तक भारत की यात्रा

डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि : विज़न से यथार्थ तक भारत की यात्रा

27 जुलाई भारत के लिए एक ऐसी तारीख है, जब पूरा देश मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को स्मरण करता है। एक तमिलभाषी, गीतापाठी, रामभक्त, वीणावादक अब्दुल कलाम साहब भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति (2002) थे। शिलांग के भारतीय प्रबंधन संस्थान में छात्रों को व्याख्यान देते हुए उनका निधन हुआ था। ग्यारह वर्ष…

Read Full News
डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार

डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार

प्रो. संजय द्विवेदी हां, सामने मीडिया की पढ़ाई करने की चाह रखने वाले विद्यार्थी ही थे, उम्मीद की जानी चाहिए कि वे कोई अखबार, मैगजीन या किताबे पढ़कर आए होंगे। लगभग 110 विद्यार्थियों से बात करते हुए यह अहसास हुआ कि अखबार अब उनकी जिंदगी में कोई जगह नहीं रखता। वे जो कुछ भी ग्रहण…

Read Full News
सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी दिल्ली बैनर स्लाइडर शीर्ष क्षैतिज स्क्रॉल समाचा

सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी

“युगानुकूल मातृत्व” पर विश्वमांगल्य सभा की प्रबोधन बैठक संपन्न नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026। विश्वमांगल्य सभा की “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि मातृत्व विषय पर मुझे बोलने के लिए कहना यह अपने आप में एक विरोधाभास है।…

Read Full News

श्रीराम मंदिर प्रकरण पर दुष्प्रचार के खिलाफ संत समाज एकजुट, अयोध्या में संत मंडल संगोष्ठी आयोजित

अयोध्या, 23 जुलाई। अयोध्या धाम स्थित श्री राम सत्संग भवन, धर्म मंडपम (मणिरामदास छावनी) में गुरुवार को आयोजित संत मंडल संगोष्ठी में श्रीराम मंदिर से जुड़े हालिया प्रकरण को लेकर देशभर में फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार पर संतों ने चिंता व्यक्त करते हुए इसका विरोध किया। संगोष्ठी में संतों ने कहा कि अयोध्या की…

Read Full News
भाऊराव देवरस: सजीव अस्तित्वरूप

भाऊराव देवरस: सजीव अस्तित्वरूप

भाऊराव देवरस लखनऊ आए थे। पुराने कुछ सहयोगी उनसे बात कर रहे थे। अचानक वे बोल पड़े, ‘सुनो! डॉ. हेडगेवार की पीढ़ी के लोग एक-एक कर चले गए। दो-चार बचे हैं। मेरा नंबर तो पहले है।’ यह बात है, 9 मार्च, 1992 की। कुछ दिनों बाद ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली नगला चंद्रभान में…

Read Full News