Headlines

admin

श्री राम मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की परंपरागत प्रामाणिकता एवं शुचिता बनाए रखने के लिए धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्रप्रेस विज्ञप्तिदिनांक: 22 जुलाई, 2026 श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के न्यासियों की बैठक आज आषाढ़ शुक्ल नवमी, बुधवार, 22 जुलाई 2026 को अयोध्या में सम्पन्न हुई। बैठक में श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ी हुई संख्या को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं पर निर्णय लिए गए। साथ ही न्यासी मंडल में…

Read Full News
IIT-BHU के वैज्ञानिक चांद जैसी मिट्टी के सिमुलेंट पर शोध करते हुए

IIT-BHU ने बनाई चांद जैसी मिट्टी, लूनर निर्माण तकनीक पर बड़ा शोध

IIT-BHU के वैज्ञानिकों ने चांद की सतह जैसी मिट्टी का सिमुलेंट तैयार कर उससे धातु निष्कर्षण और 3D प्रिंटिंग आधारित निर्माण तकनीक पर शोध शुरू किया है। ISRO के सहयोग से चल रहा यह प्रोजेक्ट भविष्य में चांद पर मानव आवास और अन्य संरचनाओं के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Read Full News
स्वयंसेवक कौन – सेवा जब स्वभाव बन जाए

स्वयंसेवक कौन – सेवा जब स्वभाव बन जाए

एक बार एक वृद्ध व्यक्ति और एक युवक सड़क के किनारे बस की प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी वहाँ एक अंधा व्यक्ति आया। उसे सड़क पार करनी थी, लेकिन तेज यातायात के कारण वह सड़क पार नहीं कर पा रहा था। पहली स्थिति में वृद्ध व्यक्ति ने युवक से कहा, “बेटा, इन्हें सड़क पार करा…

Read Full News
मोबाइल और एसी के कारण बच्चों की आंखों की रोशनी पर बढ़ता खतरा

घर का एसी और मोबाइल बच्चों की आंखों के लिए खतरा? 2050 तक हर दूसरे बच्चे की कमजोर होगी नजर

घर का एसी और मोबाइल बच्चों की आंखों के लिए खतरा? 2050 तक हर दूसरे बच्चे की कमजोर होगी नजर बच्चों की आंखों की रोशनी आज के समय में तेजी से चिंता का विषय बनती जा रही है। मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और एयर कंडीशनर (एसी) का बढ़ता उपयोग आंखों पर गहरा असर डाल रहा है।…

Read Full News
सच्ची भक्ति का फल – कुएं में भगवान के दर्शन करते हुए भक्त की प्रेरणादायक धार्मिक कथा

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी मनुष्य के जीवन में सच्ची भक्ति का फल केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि आत्मिक शांति, ईश्वर का सान्निध्य और जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त करना होता है। इतिहास, पुराण और संत साहित्य ऐसे अनेक प्रसंगों से भरे पड़े हैं, जो बताते हैं…

Read Full News
प्रकृति प्रेमी कालिदास

महाकवि कालिदास: जीवन, रचनाएँ, साहित्य और प्रेरणादायक व्यक्तित्व

भारतीय साहित्य के इतिहास में यदि किसी एक कवि ने अपनी प्रतिभा से भाषा, संस्कृति, प्रकृति, दर्शन और मानवीय भावनाओं को एक साथ अमर बना दिया, तो वे महाकवि कालिदास हैं। संस्कृत साहित्य के इस महान् कवि और नाटककार ने अपनी अनुपम रचनाओं के माध्यम से न केवल भारतीय काव्य परम्परा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान…

Read Full News
सहज सकोची

सहज सकोची

जहाँ तक स्मरण आता है, मैंने पहले-पहल श्री गुरुजी को सन  1936 में पटना स्टेशन पर देखा था। गया में संघ शाखा प्रारम्भ हो चुकी थी। उन दिनों संघ में कार्यकर्ताओं को डॉक्टर हेडगेवार जी के बाद में जिन तीन व्यक्तियों का नाम बताया जाता था, उनमें श्री गुरुजी बाबासाहव आप्टे तथा दादाराव परमार्थ थे।…

Read Full News
रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

रज्जू भैया : विज्ञान-साधना से राष्ट्र-आराधना तक

✍️ प्रणय विक्रम सिंह कुछ व्यक्तित्वों पर लिखना शब्दों का काम नहीं होता, श्रद्धा का काम होता है। कलम चलती अवश्य है, लेकिन लिखता हृदय है। परम पूज्य चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ का स्मरण भी कुछ ऐसा ही है। उनके बारे में सोचते ही मन में किसी बड़े पद की नहीं, एक…

Read Full News
जन्माष्टमी पर मुस्लिम आक्रमण की योजना 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण 1946 का वर्ष भारत के इतिहास में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल का काल माना जाता है। विभाजन से पहले अनेक क्षेत्रों में हिंसा और अविश्वास का वातावरण था। प्रस्तुत विवरण एक ऐतिहासिक संस्मरण के रूप में उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का वर्णन…

Read Full News
राजा लक्ष्मण सिंह हिन्दी भाषा के प्रखर समर्थक

विशुद्ध हिन्दी के समर्थक राजा लक्ष्मण सिंह: हिन्दी गद्य के महान निर्माता

उन्नीसवीं शताब्दी का उत्तरार्ध हिन्दी भाषा के विकास और उसकी पहचान का महत्वपूर्ण काल था। इसी समय राजा लक्ष्मण सिंह जैसे विद्वान साहित्यकार, अनुवादक और भाषा-चिन्तक सामने आए, जिन्होंने हिन्दी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा माना। जब हिन्दी और उर्दू के स्वरूप को लेकर व्यापक बहस चल रही थी,…

Read Full News