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एक विराट संगठन का छठा महा अभियान

एक विराट संगठन का छठा महा अभियान 

नरेन्द्र भदौरिया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों की यात्रा में कई घुमावदार अवरोधों को बड़े कौशल से पार किया है। इस यात्रा में पाँच बड़े अभियान बडी कुशलता से पूरे किये हैं। इन सभी को आज महा अभियान माना जा रहा है। इसी कड़ी को आगे जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में…

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जीवनज्योत संघ ज्योति में एकरूप करने वाले ‘मधु भाई’

जीवनज्योत संघ ज्योति में एकरूप करने वाले ‘मधु भाई’

रमेश पतंगे मधु भाई ने एक दीप की आराधना की, वह दीप यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। युवावस्था में आकर्षित करने वाली असंख्य विचारधाराएं थीं, परंतु मधु भाई ने अपना चित्त संघ रूपी दीपक से ढलने नहीं दिया। गोरखनाथ ने अपने भजन की अंतिम कड़ी में कहा है – “मैं ज्योति में जोत मिलाऊं जी”। संघ…

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डॉ. हेडगेवार : 'राष्ट्र की ‘आत्मा-चेतना’ के पुरोहित

डॉ. हेडगेवार : ‘राष्ट्र की ‘आत्मा-चेतना’ के पुरोहित

बीसवीं शताब्दी का भारत केवल अंग्रेजी पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा न था, वह सांस्कृतिक विस्मृति और सामाजिक विखंडन की वेदना से भी व्याकुल था। अंग्रेजी शासन की शक्ति केवल तोप और तलवार पर नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्महीनता पर टिकी थी। मानो भारत की आत्मा गहरी नींद में सोई हो, स्मृतियों का सरोवर…

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राष्ट्रधर्म, राष्ट्रनिष्ठा और राष्ट्रनिर्माण के रथी : मोहन भागवत

प्रणय विक्रम सिंह भारत की राष्ट्रीय चेतना जब-जब विघटनकारी विचारों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से आहत हुई, तब-तब संघ नेतृत्व दीपक बनकर दिशा देता रहा है। सरसंघचालक का दायित्व केवल संगठन संचालन तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज-मन की पुनर्रचना और संस्कृति की स्मृतियों का पुनर्जागरण भी करता है। श्रद्धेय मोहन भागवत जी आज 75…

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Mohan Bhagwat Ji has always been a strong supporter of 'One India - Great India': PM Modi

मोहन भागवत जी हमेशा से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के प्रबल समर्थक रहे हैं : पीएम मोदी

आज 11 सितंबर है। यह दिन अलग-अलग स्मृतियों से जुड़ा है। एक  स्मृति 1893 की है, जब स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में विश्वबंधुत्व का संदेश दिया और दूसरी स्मृति है 9/11 का आतंकी हमला, जब विश्व बंधुत्व को सबसे बड़ी चोट पहुंचाई गई। आज के दिन की एक और विशेष बात है। आज एक ऐसे…

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देशभक्ति और देवभक्ति अलग-अलग नहीं – डॉ. मोहन भागवत जी

देशभक्ति और देवभक्ति अलग-अलग नहीं – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, १० सितम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि देवभक्ति और देशभक्ति, यह दो शब्द भले ही अलग दिखते हों, लेकिन हमारे देश में यह शब्द अलग नहीं है। जो वास्तविक देवभक्ति करेगा, वह देश की भी भक्ति करेगा। और जो प्रामाणिकता से देशभक्ति करेगा, उससे भगवान देवभक्ति भी…

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समन्वय बैठक में जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर होगी चर्चा

समन्वय बैठक में जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर होगी चर्चा

जोधपुर, 04 सितम्बर। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर जी ने आज प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चलने वाले विभिन्न संगठनों की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 5 से 7 सितम्बर 2025 को जोधपुर के लालसागर में आयोजित होगी। बैठक में संघ प्रेरित 32 संगठनों के पदाधिकारी तथा महिला कार्यों का…

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संघ शताब्दी वर्ष – सौ साल और संघ की छवि

संघ शताब्दी वर्ष – सौ साल और संघ की छवि

बलबीर पुंज गत दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ। देश-विदेश से आए सैकड़ों गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने पहले दो दिनों में संघ की भूमिका, इतिहास और उद्देश्य पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। तीसरे दिन लगभग ढाई घंटे तक…

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ध्वस्त होता संघ के विरुद्ध झूठा नैरेटिव

ध्वस्त होता संघ के विरुद्ध झूठा नैरेटिव

देश में एक सुनियोजित नैरेटिव के जरिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तो निशाने पर रहा, लेकिन कम्युनिस्टों की कारगुजारियों को व्यापक रूप से अनदेखा किया गया। यह भी एक संयोग है कि, संघ की स्थापना और कम्युनिस्ट पार्टी का गठन 1925 में ही हुआ था। जहां संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बनकर निरंतर मजबूत…

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“भारत अखंड (अविभाजित) और एक हिंदू राष्ट्र है” – डॉ. मोहन भागवत

तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के अंतिम दिन, गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कहा, “भारत अखंड (अविभाजित) है; यह जीवन का एक सत्य है। हमारे पूर्वज, संस्कृति और मातृभूमि हमें एक सूत्र में पिरोती हैं। अखंड भारत केवल राजनीति…

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