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पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने पूरे देश को अचंभित और आनंदित किया है।

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने पूरे देश को अचंभित और आनंदित किया है।

दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 में मुझे बंगाल जाने का अवसर मिला था। वहाँ अधिकांश लोग परिवर्तन की इच्छा तो रखते थे, किंतु यह परिवर्तन वास्तव में संभव हो सकेगा, ऐसा विश्वास बहुत कम लोगों को था। परिस्थितियाँ भी ऐसी थीं कि परिवर्तन किसी चमत्कार से कम नहीं लगता था। निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान के…

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टेक्नोफ्रेंडली संत... सामने लैपटॉप, जिक्र में इकबाल-अज्ञेय और कहानियां हैरी पॉटर की

टेक्नोफ्रेंडली संत… सामने लैपटॉप, जिक्र में इकबाल-अज्ञेय और कहानियां हैरी पॉटर की

आंखन देखी अयोध्या… नौंवी कहानी अयोध्या के टेक्नोफ्रेंडली संत, सामने लैपटॉप, जिक्र में इकबाल-अज्ञेय और कहानियां हैरी पॉटर की आचार्य मिथिलेशनन्दिनी रामलला के 21 युवा पुजारियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं उपमिता वाजपेयी, अयोध्या। जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी।बिद्या बिनय निपुन गुन सीला। खेलहिंखेल सकल नृपलीला। मतलब, चारों वेद…

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देवरहा बाबा कौन थे? जानिए उनकी रहस्यमयी आयु, सिद्धियां और चमत्कारों की पूरी कहानी

देवरहा बाबा कौन थे? जानिए उनकी रहस्यमयी आयु, सिद्धियां और चमत्कारों की पूरी कहानी

भारतीय हिंदू परंपरा में सदियों से ही ऋषि-मुनियों और साधु-संतों की परंपरा रही है. लेकिन साधु-संतों के चमत्कारों और लीलाओं को समझना आसान नहीं है. सिद्ध योग क्रिया से साधु-संतों ने दिव्य शक्तियां पाई और अद्भुत चमत्कार दिखाए. सिद्ध योग क्रिया से कोई ठंड में निर्वस्त्र रहता है, कोई केवल टाट पहनकर रहता है, कोई…

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हिंदू जाति के प्रतिनिधि कवि के प्रति उदासीनता

हिंदू जाति के प्रतिनिधि कवि के प्रति उदासीनता

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के लेखन पर कुछ काम करते हुए कवि भूषण के बारे में उनकी राय सामने आई। आचार्य शुक्ल ने कवि भूषण को ‘हिंदू जाति का प्रतिनिधि कवि’ कहा है। जाति से आचार्य शुक्ल का आशय किसी ‘कास्ट’ से नहीं, बल्कि हिंदू राष्ट्रीयता से है, क्योंकि हिंदू कोई जाति तो है नहीं। आचार्य…

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महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

कुछ वर्ष पूर्व संगोल बहुत चर्चा में रहा । इसके सम्बन्ध में कई भ्रांतियाँ भी फैलीं । अधिकतर लोग सेंगोल का ऐतिहासिक महत्त्व बताया किन्तु आपको जानकर अच्छा लगेगा कि सेंगोल का पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। सहस्त्रों वर्षों से सेंगोल का वर्णन हमारे पौराणिक ग्रंथों में है, विशेषकर इसका वर्णन महाभारत में किया…

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जनसहयोग से पुनर्जीवित हुई नून नदी, जालौन बना जल संरक्षण का मॉडल

जनसहयोग से पुनर्जीवित हुई नून नदी, जालौन बना जल संरक्षण का मॉडल

बुन्देलखण्ड के सूखाग्रस्त जालौन जिले में विलुप्त होती नून नदी को जनसहयोग से नया जीवन देने की मिसाल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिना सरकारी बजट और आर्थिक सहायता के जिले के प्रशासन, सामाजिक संगठनों, किसानों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से नून नदी फिर से बहने लगी है। इस…

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युग-ऋषि, महंत अवेद्यनाथ: समरसता के महानाद और सनातन के संबल

युग-ऋषि, महंत अवेद्यनाथ: समरसता के महानाद और सनातन के संबल

​काल के अनंत प्रवाह में कुछ महापुरुषों का जीवन किसी एकांत निर्जन में ठहरा हुआ सरोवर नहीं होता, बल्कि वह पर्वतों की छाती चीरकर बहने वाले उस पावन झरने की तरह होता है, जो जब आगे बढ़ता है, तो सदियों की सूखी माटी में भी प्राण फूंक देता है। भारतीय संस्कृति के इतिहास में गोरक्षपीठ…

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वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर

वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर

पानी पर लिखी हुई बातें लिखते- लिखते बह जाती हैं। नहीं शेष उनकी किंचित स्मृतियाँ भी रह जाती हैं। पर एक सदी से सागर के वक्षस्थल पर अंकित अब भी तुम सुनो लगाकर ध्यान कथा वह लहर- लहर दुहराती है।। हांँ पराधीन भारत का था तब, थी आग लगी जन के मन में। ‘कैसे माता…

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वीर सावरकर कृत ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक का इतिहास

कहते हैं 1857 की क्रांति विफल हुई। क्या यह कहना सही है? नहीं! 1857 का महासंग्राम उसके बाद की पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए सतत प्रेरित करता रहा। सोचने का प्रश्न यह भी है कि आगे की पीढ़ियों को 1857 के महासंग्राम से जो प्रेरणा मिली, वह किस माध्यम से मिली? उत्तर एक ही…

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स्वातंत्र्यवीर सावरकर: एक समग्र मूल्यांकन

स्वातंत्र्यवीर सावरकर: एक समग्र मूल्यांकन

विनायक दामोदर सावरकर प्रखर चिंतक, गहन अध्येता, सत्यान्वेषी इतिहासकार, भावप्रवण कवि, सेवाभावी समाज सुधारक और महान स्वतंत्रता-सेनानी थे। उनका कोई भी रूप अन्य किसी रूप से कमतर नहीं था। संपूर्ण स्वतंत्रता-आंदोलन में सावरकर जैसी प्रखरता, तार्किकता एवं तेजस्विता अन्यत्र कम ही दिखाई पड़ती है। महापुरुष कभी मरते नहीं। वे हमारी स्मृतियों, प्रेरणाओं, आचरणों और आदर्शों…

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