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Sahitya Gaurav Award : वरिष्‍ठ पत्रकार बृजनन्दन राजू को मिला साहित्य गौरव सम्मान

लखनऊ। सक्रिय रूप से सामाजिक समरसता (Sahitya Gaurav Award) के क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता व हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के वरिष्ठ पत्रकार बृजनन्दन राजू को साहित्य गौरव सम्मान 2025 प्रदान किया गया।

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संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज से मिल रहा प्रतिसाद प्रेरणादायी – सी. आर. मुकुंद जी, सह सरकार्यवाह

संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज से मिल रहा प्रतिसाद प्रेरणादायी – सी. आर. मुकुंद जी, सह सरकार्यवाह

समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक प्रारंभ केरल राज्य में हजारों मुस्लिम एवं ईसाई परिवारों में किया गृहसंपर्क- परिवारों ने किया स्वागत-अभिनंदन पट्टीकल्याणा (समालखा), 13 मार्च 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक आज विधिवत रूप से प्रारंभ हो गई। सुबह नौ बजे राष्ट्रीय स्वयंसेवक…

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स्वाधीनता के अमृत काल में ‘स्व’ को जगाने की आवश्यकता है – जे. नंदकुमार जी

स्वाधीनता के अमृत काल में ‘स्व’ को जगाने की आवश्यकता है – जे. नंदकुमार जी

जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन चारबाग में पुस्तक परिचर्चा सत्र में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी की पुस्तक ‘नेशनल सेल्फहुड इन साइंस’ पर चर्चा हुई। पुस्तक की विषयवस्तु को विस्तार देते हुए जे. नंदकुमार जी ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में समाज जीवन के विविध क्षेत्रों ने अपनी-अपनी भूमिका…

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अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में 'प्रताप' होने का अर्थ

अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में ‘प्रताप’ होने का अर्थ

जब स्वाधीनता ने स्वयं को मानवीय स्वरूप में प्रकट करना चाहा, जब समता और समन्वय ने ‘योद्धा’ के रूप में खुद को ढालने की आरजू की, जब ‘वीरता और वैराग्य’ ने संयुक्त रूप से प्रस्फुटित होने का संकल्प लिया तब 09 मई 1540 को कुंभलगढ़ के किले में महाराणा प्रताप नामक आलोक का उदय हुआ।…

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धर्म हमें करणीय व अकरणीय का ज्ञान देता है – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म हमें करणीय व अकरणीय का ज्ञान देता है – डॉ. मोहन भागवत जी

ग्रंथ, शास्त्र और संतों की वाणी हमारी समझ और सामर्थ्य को बढ़ाते हैं – आचार्य महाश्रमण जी नागौर, 22 जनवरी 2026। जिले के छोटी खाटू कस्बे में 162वें मर्यादा महोत्सव के अवसर पर विशाल व भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। आचार्य महाश्रमण के पावन सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन…

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संगीतकार विष्णु नारायण भातखण्डे

संगीतकार विष्णु नारायण भातखण्डे

देश, काल और पात्र भेद से संगीत में समयानुकूल परिवर्तन हुए हैं। प्रायः एक शताब्दी पूर्व ही संगीत की गति अवरुद्ध हो गयी थी और युग धर्मानुसार उसका पुनरुत्थान होना परमाश्यक माना गया। ऐसे समय मुम्बई प्रान्त के बालकेश्वर ग्राम में 10 अगस्त 1860 को एक ब्राह्मण परिवार में विष्णु नारायण का जन्म हुआ। इनके…

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प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है – डॉ. मोहन भागवत जी

प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है – डॉ. मोहन भागवत जी

लोनावला स्थित स्वामी कुवल्यानंद द्वारा स्थापित कैवल्यधाम योग अनुसंधान संस्था के 101वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भौतिक प्रगति के नाम पर मानव ने प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचाया है। सतत विकास के लिए मानव के साथ-साथ प्रकृति के उत्थान…

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विदुरजी और ऋषि मैत्रेय की भेंट

विदुरजी और ऋषि मैत्रेय की भेंट

सृष्टि की उत्पत्ति कैसे होती है? ब्रह्मांड को आकार देने में दिव्य बुद्धि की क्या भूमिका है? और सबसे महत्वपूर्ण बात, इस ज्ञान को हम अपनी जीवन की अव्यवस्थित परिस्थितियों को संतुलित करने के लिए कैसे उपयोग कर सकते हैं? तकनीकी और बौद्धिक प्रगति के बावजूद, तनाव और असंतोष लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अनंत…

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उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हमारे पूर्वज और मूल एक ही हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी

उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हमारे पूर्वज और मूल एक ही हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी

संतकबीरनगर। हिन्दू समाज की एकता, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मंगलवार को जनपद में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी रहे। उन्होंने सामाजिक एकता, राष्ट्रहित और संगठनात्मक चेतना पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता संत कबीर मठ…

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दूव घास है खास, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक रूप से पवित्र नहीं है, बल्कि विज्ञान के सिद्धांत के हिसाब से भी यह अन्य सभी वनस्पतियों से श्रेष्ठ है।

दूव घास है खास, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक रूप से पवित्र नहीं है, बल्कि विज्ञान के सिद्धांत के हिसाब से भी यह अन्य सभी वनस्पतियों से श्रेष्ठ है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा (दूब) की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई है, माना जाता है कि यह भगवान विष्णु की जांघ के रोम से निकली है, जो मंदराचल पर्वत की रगड़ से उत्पन्न हुई थी। इसका एक अन्य नाम पवित्री भी है। दूर्वा को हिन्दू धर्म में एक पवित्र वनस्पति माना जाता है, जो…

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