Headlines

'गीता' केवल अध्ययन का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की साधना है — डॉ. मोहन भागवत जी

‘गीता’ केवल अध्ययन का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की साधना है — डॉ. मोहन भागवत जी

लखनऊ : दिव्य गीता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि, गीता को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारकर जीना है। आज यह कार्यक्रम सम्पन्न अवश्य हुआ है, परन्तु हमारा कर्तव्य केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं हो जाता। हम सब…

Read Full News
Youth should play an active role in nation-building – Dattatreya Hosbale Ji

राष्ट्र निर्माण में युवा सक्रिय भूमिका निभाएं – दत्तात्रेय होसबाले जी

ऊधमपुर, 07 दिसम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को रिवायत हॉल में ”100 वर्ष की यात्रा और भविष्य की दिशा” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा, राष्ट्र निर्माण में युवा सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने भारत के गौरवशाली…

Read Full News
“हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है” – दत्तात्रेय होसबाले जी

“हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है” – दत्तात्रेय होसबाले जी

इंदौर, 30 नवम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि पुराणों और दुनिया के विभिन्न विद्वानों ने हिन्दू और हिन्दुस्तान को अलग-अलग कालखंडों में परिभाषित किया। भारत, मानव धर्म का देश है, जो सृष्टि में एकत्व का दर्शन करता है, इसकी सृष्टि के प्रति कृतज्ञता की दृष्टि है। यहाँ पुरुषार्थ के…

Read Full News

गीधराज जटायु की भव्य सौवर्ण प्रतिमा

चरित्र केवल कथा नहीं है, यह दैनन्दिन क्रिया है। ऐसी क्रिया जिसमें रक्त के एक-एक बिन्दु, आयु के एक-एक क्षण एवं जीवन के एक-एक श्वास का होम करना पड़ता है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अवस्थित कुबेर टीला अत्यन्त प्राचीन पौराणिक स्थल है। अयोध्या माहात्म्य में श्रीराम कोट के तीर्थों का वर्णन करते हुए नवरत्न के…

Read Full News
स्वातंत्र्यवीर सावरकर: एक समग्र मूल्यांकन

स्वातंत्र्यवीर सावरकर: एक समग्र मूल्यांकन

विनायक दामोदर सावरकर प्रखर चिंतक, गहन अध्येता, सत्यान्वेषी इतिहासकार, भावप्रवण कवि, सेवाभावी समाज सुधारक और महान स्वतंत्रता-सेनानी थे। उनका कोई भी रूप अन्य किसी रूप से कमतर नहीं था। संपूर्ण स्वतंत्रता-आंदोलन में सावरकर जैसी प्रखरता, तार्किकता एवं तेजस्विता अन्यत्र कम ही दिखाई पड़ती है। महापुरुष कभी मरते नहीं। वे हमारी स्मृतियों, प्रेरणाओं, आचरणों और आदर्शों…

Read Full News

श्रीगुरुजी को संन्यासी जीवन से वापस खींच लाया संघ कार्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ के जीवन का एक दौर ऐसा भी है, जब वे दुनियादारी छोड़कर अध्यात्म के मार्ग पर संन्यासी हो गए। लेकिन उनकी नियति और संघ कार्य की आवश्यकता उन्हें पुन: राष्ट्रीय आंदोलन में खींच लाई। संघ कार्य को विस्तार देते हुए भी उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन…

Read Full News
विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण – डॉ. मोहन भागवत जी

विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण – डॉ. मोहन भागवत जी

जोधपुर जैसलमेर की पावन धरा पर ‘समरसता’ का शंखनाद; चादर महोत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, संत जनों और सर्व समाज का महासंगम जैसलमेर, राजस्थान। स्वर्ण नगरी जैसलमेर में दादा गुरुदेव आचार्य श्री जिनदत्त सूरी के 871वें चादर महोत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस पावन अवसर पर…

Read Full News

स्वदेशी ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत: रूफटॉप सोलर में लखनऊ बना देश का नंबर 1 शहर

लखनऊ, उत्तर प्रदेश स्वदेशी ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लखनऊ देश का नंबर 1 शहर बन गया है, जहां रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की संख्या 87,000 के पार पहुंच चुकी है। यह उपलब्धि न केवल शहर के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा की…

Read Full News

सुविधा मुक्त साधना युक्त सामूहिक जीवन का अभ्यास है संघ शिक्षा वर्ग : प्रान्त प्रचारक कौशल जी

उन्नाव : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अवध प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) उन्नाव के सरस्वती विद्या मन्दिर पूरननगर के परिसर में प्रारम्भ हो गया। दिनांक २२ मई से प्रारंभ होकर ७ जून तक १५ दिन चलने वाला है। अवध प्रांत के २६ ज़िलों से ३१७ शिक्षार्थी वर्ग में प्रशिक्षण लेने आए हैं। अवध प्रांत के…

Read Full News
इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा

इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति की अमिट छाप: लालकृष्ण आडवाणी और विद्यानिवास मिश्र के संस्मरण

इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति आज भी अनेक सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक स्थलों और सामाजिक जीवन में दिखाई देती है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी तथा प्रख्यात साहित्यकार विद्यानिवास मिश्र ने अपनी यात्राओं के दौरान ऐसे कई अनुभव साझा किए, जिनमें रामायण, महाभारत और संस्कृत परंपरा के प्रभाव का उल्लेख मिलता है। इन संस्मरणों के माध्यम से इंडोनेशिया…

Read Full News