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विचारों की यात्रा है राष्ट्रधर्म: स्वांतरंजन

लखनऊ। राष्ट्रवादी विचारों की यात्रा है राष्ट्रधर्म। इसमें निरन्तरता बनी रहनी चाहिये और इसे समाज के सभी वर्गों तक बार-बार पहुँचना चाहिये। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कही। वे राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।…

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द्रौपदी के पुत्रों के जन्म एवं उनके गुणों का वर्णन, आइये जानते है पुत्रों के बारे

द्रौपदी के पुत्रों के जन्म एवं उनके गुणों का वर्णन, आइये जानते है पुत्रों के बारे

द्रौपदी के पुत्रों को लेकर : ऐसा नहीं था कि उनका उल्लेख ग्रंथों में नहीं है, या वह वीर नहीं थे. बस वह विमर्श में नहीं थे! उनपर लिखा नहीं गया. जितना प्रयास कर्ण जैसे लोगों को नायक बनाने का किया गया या फिर दुर्योधन के पापों को कम करने का किया गया, उसमें से…

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गीधराज जटायु की भव्य सौवर्ण प्रतिमा

चरित्र केवल कथा नहीं है, यह दैनन्दिन क्रिया है। ऐसी क्रिया जिसमें रक्त के एक-एक बिन्दु, आयु के एक-एक क्षण एवं जीवन के एक-एक श्वास का होम करना पड़ता है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अवस्थित कुबेर टीला अत्यन्त प्राचीन पौराणिक स्थल है। अयोध्या माहात्म्य में श्रीराम कोट के तीर्थों का वर्णन करते हुए नवरत्न के…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य

श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना है। अयोध्या में श्री रामलला मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और…

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समालखा – राष्ट्र सेविका समिति की अर्धवार्षिक बैठक में जनसंख्या असंतुलन पर प्रस्ताव पारित

राष्ट्र सेविका समिति ने ‘जनसंख्या असंतुलन’ पर प्रस्ताव पास किया

समालखा (हरियाणा)। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी और प्रतिनिधि मंडल की छमाही बैठक समालखा, हरियाणा में संपन्न हुई। बैठक में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी, प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री जी और 40 प्रांतों से 488 प्रतिनिधि शामिल हुए। तीन दिन की मीटिंग के आखिरी सेशन में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी ने कहा…

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संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जा सकता है - प्रदीप जोशी जी

संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जा सकता है – प्रदीप जोशी जी

हिन्दू समाज का जागरण एवं संगठन ही संघ का उद्देश्य जौनपुर। तिलकधारी महाविद्यालय के प्रांगण में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी जी ने कहा कि भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम एवं सर्व धर्म समभाव की है। यह व्यक्तिमंगल से विश्वमंगल की संस्कृति…

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Ayodhya Ram Mandir : राममंदिर के 6 दरवाजों पर 18Kg सोना मढ़ा जा रहा, सिंहासन पर विराजमान होंगे राम-सीता

Ayodhya Ram Mandir News : अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दिव्यता और भव्यता हर दिन एक नई ऊंचाई पर पहुंच रही है। अब मंदिर के प्रथम तल पर छह विशाल दरवाजों पर कुल 18 किलो सोना मढ़ा जा रहा है।

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विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण – डॉ. मोहन भागवत जी

विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण – डॉ. मोहन भागवत जी

जोधपुर जैसलमेर की पावन धरा पर ‘समरसता’ का शंखनाद; चादर महोत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, संत जनों और सर्व समाज का महासंगम जैसलमेर, राजस्थान। स्वर्ण नगरी जैसलमेर में दादा गुरुदेव आचार्य श्री जिनदत्त सूरी के 871वें चादर महोत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस पावन अवसर पर…

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अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में 'प्रताप' होने का अर्थ

अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में ‘प्रताप’ होने का अर्थ

जब स्वाधीनता ने स्वयं को मानवीय स्वरूप में प्रकट करना चाहा, जब समता और समन्वय ने ‘योद्धा’ के रूप में खुद को ढालने की आरजू की, जब ‘वीरता और वैराग्य’ ने संयुक्त रूप से प्रस्फुटित होने का संकल्प लिया तब 09 मई 1540 को कुंभलगढ़ के किले में महाराणा प्रताप नामक आलोक का उदय हुआ।…

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‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

मनमोहन वैद्य जी “वैष्णव जन तो तेणे रे कहिये, जे पीड़ पराई जाणे रे”। दूसरों की पीड़ा की अनुभूति कर उन्हें उस पीड़ा से मुक्त करने के सहज कर्म को ‘धर्म’ कहा गया है। राजा रंतिदेव का प्रसिद्ध वचन है – “मुझे न राज्य की कामना है, न स्वर्ग की और न ही मोक्ष की।…

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