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डॉ. हेडगेवार जी के जीवन में संघ कार्य और राष्ट्र कार्य के अतिरिक्त कोई दूसरा विषय नहीं था – डॉ. मोहन भागवत जी

डॉ. हेडगेवार जी के जीवन में संघ कार्य और राष्ट्र कार्य के अतिरिक्त कोई दूसरा विषय नहीं था – डॉ. मोहन भागवत जी

डॉ. हेडगेवार निवास पर आधारित विशेष आवरण, सूचना पुस्तिका का लोकार्पण नागपुर, 31 जुलाई 2026। भारतीय डाक विभाग, नागपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के ऐतिहासिक निवास “डॉ. हेडगेवार निवास, नागपुर” पर आधारित विशेष आवरण (Special Cover), सूचना पुस्तिका (Brochure) तथा स्थायी सचित्र डाक मुहर (Permanent Pictorial Cancellation) का लोकार्पण…

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गलती के लिए प्रायश्चित जरूरी

गलती के लिए प्रायश्चित जरूरी

अपूर्ण संसार की उपज होने के नाते हम सभी अपूर्ण हैं। हम सबने कोई-न-कोई गलती की है। कुछ बातों का हमें पश्चाताप होता है- वे काम जो हमने किए हैं या वे काम जो हमने नहीं किए। प्रायश्चित की सच्ची भावना के साथ अपनी गलतियों को स्वीकार करना हमें जीवन में सन्मार्ग पर चलने और…

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ABVP कार्यकर्ताओं की बड़ी जीत, SRMU पर दर्ज हुआ गंभीर धाराओं में मुकदमा

ABVP कार्यकर्ताओं को बड़ी जीत मिली है। SRMU पर बिना मान्यता पाठ्यक्रम संचालित करने को लेकर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। IG और कमिश्नर की संयुक्त रिपोर्ट को लेकर SRMU पर ये मुकदमा अपर सचिव, राज्य उच्च शिक्षा ने नगर कोतवाली बाराबंकी में दर्ज कराया है। कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग किए जाने…

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हिंदुस्तानियों के हित के हेत

आज की भाषा में जिसे नैरेटिव सेट करना कहते हैं, भारत में छपे हिंदी के पहले अखबार के श्रद्धेय पितृपुरुष ने पहले ही अंक के मुख्य पृष्ठ पर पहली ही पंक्ति में यही काम किया था। वे युगलकिशोर शुक्ल थे और 30 मई 1826 को “उदंत मार्त्तण्ड’ नाम के अखबार में छपी वह अमर पंक्ति…

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परिवर्तनशील समाज में 'कुटुम्ब व्यवस्था'

परिवर्तनशील समाज में ‘कुटुम्ब व्यवस्था’

भारत एक ऐसा देश है जहाँ परिवार केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि जीवन का मूलाधार है। भारतीय समाज की आत्मा कुटुम्ब व्यवस्था है, जो व्यक्ति को पहचान, सुरक्षा, संस्कार और आत्मीयता प्रदान करती है। वैश्वीकरण और तकनीकी क्रान्ति के दौर में जहाँ पश्चिमी समाजों में परिवार विखण्डित होता गया, वहीं भारत में कुटुम्ब व्यवस्था ने…

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Sanskrit Language : संस्कृत समर्थक संविधानवेत्ता और समाज सुधारक डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर

Sanskrit Language : संविधानवेत्ता और समाज सुधारक होने के साथ-साथ डॉ. अंबेडकर को संस्कृत के प्रबल समर्थक के रूप में व्‍याख्‍या कर रहे हैं डॉ. मुरली मनोहर जोशी…

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राष्ट्रीय विचारों के प्रखर लेखक एच.वी. शेषाद्रि जी

राष्ट्रीय विचारों के प्रखर लेखक एच.वी. शेषाद्रि जी

इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल संगठन का नेतृत्व नहीं करते बल्कि अपने विचार, लेखनी और जीवन-साधना से पीढ़ियों को दिशा देते हैं। एच.वी. शेषाद्रि जी ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व थे, जिनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य, संगठन और वैचारिक चेतना को समर्पित रहा। सरलता, विद्वता और राष्ट्रनिष्ठा के अद्भुत संगम रहे शेषाद्रि जी…

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राजा लक्ष्मण सिंह हिन्दी भाषा के प्रखर समर्थक

विशुद्ध हिन्दी के समर्थक राजा लक्ष्मण सिंह: हिन्दी गद्य के महान निर्माता

उन्नीसवीं शताब्दी का उत्तरार्ध हिन्दी भाषा के विकास और उसकी पहचान का महत्वपूर्ण काल था। इसी समय राजा लक्ष्मण सिंह जैसे विद्वान साहित्यकार, अनुवादक और भाषा-चिन्तक सामने आए, जिन्होंने हिन्दी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा माना। जब हिन्दी और उर्दू के स्वरूप को लेकर व्यापक बहस चल रही थी,…

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संघ का एक ही लक्ष्य है, तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ का एक ही लक्ष्य है, तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें – डॉ. मोहन भागवत जी 

कोलकाता व्याख्यानमाला  – 100 वर्ष की संघ यात्रा ‘नए क्षितिज‘ दिनांक – 21 दिसंबर 2025, तृतीय सत्र संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कोलकाता में आयोजित एक दिवसीय व्याख्यानमाला के तृतीय सत्र (प्रश्नोत्तर सत्र) में विभिन्न विषयों पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी द्वारा प्रदत्त उत्तरों से प्रमुख बिंदु –

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अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी...

अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी…

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में एक साधारण लेकिन संस्कारवान ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी संस्कृत के विद्वान थे और माता कृष्णा देवी गृहिणी थीं। बचपन से ही अटल जी में गहरी संवेदनशीलता, स्पष्टवादिता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार पनप रहे थे। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने ग्वालियर…

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