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महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

कुछ वर्ष पूर्व संगोल बहुत चर्चा में रहा । इसके सम्बन्ध में कई भ्रांतियाँ भी फैलीं । अधिकतर लोग सेंगोल का ऐतिहासिक महत्त्व बताया किन्तु आपको जानकर अच्छा लगेगा कि सेंगोल का पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। सहस्त्रों वर्षों से सेंगोल का वर्णन हमारे पौराणिक ग्रंथों में है, विशेषकर इसका वर्णन महाभारत में किया…

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हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

यह स्थापना हिन्दी के प्रख्यात ललित निबन्धकार आचार्य कुबेरनाथ राय की भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था और उनकी मौलिक चिन्तन-दृष्टि को प्रकट करती है। भारतीयता, सनातन धर्म, लोकजीवन और विश्वबन्धुत्व जैसे विषयों पर उन्होंने अपने निबन्धों के माध्यम से गम्भीर तथा ललित भाष्य प्रस्तुत किए। हिन्दी साहित्य की आधुनिक विधा ललित निबन्ध को समृद्ध…

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आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा

आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा

भारत की सांस्कृतिक चेतना में गंगा दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रकृति-सम्मान और नैतिक जीवन का संदेश देने वाला महापर्व है। भारतीय संस्कृति में समय केवल गणना का माध्यम नहीं, बल्कि चेतना का आयाम है। हिंदू धर्म में तिथियाँ मानव जीवन को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ने वाली आध्यात्मिक कड़ियाँ मानी गई हैं।…

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अग्नि अविष्कारक महर्षि भृगु का अवतरण दिवस,

संसार के पहले समाज शास्त्र की रचना की : आग्नेय अस्त्रों का अविष्कार भी किया

जिनमें नारायण ने अपना स्वरूप को देखा उन महर्षि भृगु का अवतरण दिवस वैशाख पूर्णिमा है। वे ब्रह्मा द्वारा प्रथम मन्वंतर में उत्पन्न किये गये आठ प्रचेताओं में प्रथम हैं। ऋग्वेद में उनसे संबंधित अनेक ऋचायें हैं। वे अग्नि और आग्नेय अस्त्रों के अविष्कारक भी हैं। इसीलिए अग्नि का एक नाम “भृगि” भी है। भृगि…

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