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राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर दत्तात्रेय होसबाले जी का वक्तव्य

राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर दत्तात्रेय होसबाले जी का वक्तव्य

राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के 150 वर्ष मातृभूमि की आराधना और संपूर्ण राष्ट्र जीवन में चेतना का संचार करने वाले अद्भुत मन्त्र “वंदेमातरम्” की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के शुभ अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्रगीत के रचयिता श्रद्धेय बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता है। 1875 में रचित…

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आरएसएस और कम्युनिस्ट विचार : भारत की आत्मा और आयातित सोच का संघर्ष

आरएसएस और कम्युनिस्ट विचार : भारत की आत्मा और आयातित सोच का संघर्ष

के के उपाध्याय भारत के वैचारिक परिदृश्य में एक संघर्ष लंबे समय से जारी है — एक ओर वह संगठन है जिसने राष्ट्रवाद को भारतीय जीवन का आधार माना, और दूसरी ओर वह विचारधारा है जो भारत की धरती पर विदेशी प्रयोगशाला से लाई गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और कम्युनिस्टों के बीच यह तकरार…

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मैं रक्षामंत्री बाद में पहले मैं संघ का स्वयंसेवक हूँ : राजनाथ सिंह

मैं रक्षामंत्री बाद में पहले मैं संघ का स्वयंसेवक हूँ : राजनाथ सिंह

• हमने ईद मिलन के कार्यक्रम तो देखे थे लेकिन दीपावली मिलन पहली बार देख रहा हूँ : योगी आदित्यनाथ • भारतीय संस्कृति की जड़े पर्वों से और मजबूत होती हैं : स्वांतरंजन • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लखनऊ महानगर का दीपावली परिवार मिलन सम्पन्न। • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं संघ…

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मराठी से संस्कृत भाषा में संघ-प्रार्थना के बदलने की कहानी

मराठी से संस्कृत भाषा में संघ-प्रार्थना के बदलने की कहानी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने साथियों के साथ मिलकर संघ की नियमित शाखाओं में जन्मभूमि को नमन करती हुई एक प्रार्थना तैयार की क्योंकि, उन दिनों नागपुर में मराठी और हिन्दी भाषा मिश्रित रुप से बोली जाती थी। इसलिए संघ की प्रार्थना भी हिन्दी के कुछ शब्दों के साथ…

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संघ शताब्दी वर्ष – संघ की स्थापना एक दैवीय संयोग

संघ एक ऐसा संगठन है जो विशुद्ध भारत, भारतीयता, और भारतीयों के लिए कार्य करता है और राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र प्रथम के अतिरिक्त इसके केंद्र बिंदु में और कोई भी विचार नहीं है। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं से सम्पर्क के बाद मेरे जीवन को एक नई सकारात्मक दिशा मिली है। यह एक दैवीय प्रवृत्ति है कि…

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एक विराट संगठन का छठा महा अभियान

एक विराट संगठन का छठा महा अभियान 

नरेन्द्र भदौरिया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों की यात्रा में कई घुमावदार अवरोधों को बड़े कौशल से पार किया है। इस यात्रा में पाँच बड़े अभियान बडी कुशलता से पूरे किये हैं। इन सभी को आज महा अभियान माना जा रहा है। इसी कड़ी को आगे जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में…

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देशभक्ति और देवभक्ति अलग-अलग नहीं – डॉ. मोहन भागवत जी

देशभक्ति और देवभक्ति अलग-अलग नहीं – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, १० सितम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि देवभक्ति और देशभक्ति, यह दो शब्द भले ही अलग दिखते हों, लेकिन हमारे देश में यह शब्द अलग नहीं है। जो वास्तविक देवभक्ति करेगा, वह देश की भी भक्ति करेगा। और जो प्रामाणिकता से देशभक्ति करेगा, उससे भगवान देवभक्ति भी…

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समन्वय बैठक में जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर होगी चर्चा

समन्वय बैठक में जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर होगी चर्चा

जोधपुर, 04 सितम्बर। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर जी ने आज प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चलने वाले विभिन्न संगठनों की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 5 से 7 सितम्बर 2025 को जोधपुर के लालसागर में आयोजित होगी। बैठक में संघ प्रेरित 32 संगठनों के पदाधिकारी तथा महिला कार्यों का…

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संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है - डॉ. मोहन भागवत जी

संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है। संघ कार्य की प्रेरणा संघ प्रार्थना के अंत में कहे जाने वाले…

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संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है - डॉ. मोहन भागवत जी

संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली, 26 अगस्त। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है। संघ कार्य की प्रेरणा संघ प्रार्थना के अंत में…

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