भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से होगा मानवता का कल्याण : सुनील आम्बेकर जी
वाराणसी । काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतन्त्रता भवन में आयोजित विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर जी, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शेखर माँडे, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी, आईआईटी बीएचयू के निदेशक डॉ. अमित पात्रा एवं आयूसीटीई के निदेशक प्रो. पीएन सिंह ने किया।

उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर जी ने कहा, भारत एक सनातन-पुरातन राष्ट्र है। भारत में जीवन के हर क्षेत्र में समग्रता से विचार करते हुए मात्र मनुष्य ही नहीं अपितु जगत और सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण हेतु एक सतत चिन्तन का अभ्यास चला है इसलिए जीवन का कोई क्षेत्र-विषय उससे अछूता नहीं रहा।
उन सभी विषयों में एक तर्क, सत्य, साधना और समीक्षा के साथ ही हमारे देश में सभी परम्पराओं और कार्यों में विज्ञान की स्वाभाविक दृष्टि रही है। बीच के कालखण्ड में जब भारत की परिस्थिति बदली तो अनुसन्धान के साथ ज्ञान की परम्परा कुछ बाधित हुई। अत: बीच के 300-400 वर्षों के अन्तराल में विश्व के अन्य हिस्सों में विज्ञान की दृष्टि से जो खोज चलती रही उससे वर्तमान के जीवन में कई नयी तकनीकों का अनुसन्धान हुआ किन्तु मनुष्य तथा सृष्टि के कल्याण की कम चिन्ता वाली आधुनिक विज्ञान की अधूरी दृष्टि के कारण उसका प्रवाह एक ही दिशा में गया। फलस्वरूप आज के आधुनिक समय में बहुत सारी समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं।
भोजन और खेती के क्षेत्र में कई तकनीकी आयीं फिर भी हमारे स्वास्थ्य के लिए उत्तम भोजन सम्बन्धित कई गम्भीर प्रश्न खड़े हुए हैं। शहरों के निर्माण की तकनीकों के साथ ही दैनिक पर्यावरण के प्रश्न भी बड़ी मात्रा में उपस्थित हुए हैं और सामाजिक जीवन पर भी उसका असर आया है। बाजारों को भी एक नया आकार या स्वरूप दिया गया जिससे जीवन के आर्थिक क्षेत्रों में भी उसके दुष्परिणाम आये। इन सभी कारणों से हुए अनुसन्धानों को जीवन में लागू करते-करते नए संघर्षों का भी जन्म हुआ और आज के समय में हम लगातार उनसे जूझ रहे हैं। यही वह समय है जब आधुनिक अनुसन्धानों में भारत की समग्र वैज्ञानिक दृष्टि के अनुरूप समीक्षा होनी आवश्यक है। आज आवश्यकता है कि विगत के कुछ सौ वर्षों में भारत के बाहर हुए अनुसन्धानों को मानव तथा प्रकृति के अनुरूप सभी के कल्याण तथा सभी सामाजिक प्रश्नों का समाधान करने वाली भारतीय मूल्यदृष्टि के साथ जोड़ा जाए।

आधुनिक विज्ञान व अनुसन्धान को भारतीय दृष्टि से जोड़ने के लिए ही विज्ञान भारती का कार्य प्रारम्भ हुआ और विगत कई वर्षों से यह संगठन देश के वैज्ञानिकों, नीति निर्धारकों और सामान्यजन तक यह बात पहुँचाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रहा है।
आज जब पूरी दुनिया में पर्यावरण की चर्चा जोरों पर है तब ऐसे समय हमारा भारतीय विचार इस अधिवेशन के माध्यम से और आगे बढ़ेगा। आज नये युग में हम तकनीकी और कम्यूनिकेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक आ गये हैं तो निश्चित रूप से तकनिकी के प्रभाव भी हमारे जीवन में आयेंगे परन्तु हम ऐसे देश, विचार और ज्ञान परम्परा से आते हैं जो मानव हित में सारे अनुसन्धानों को मोड़कर उसे अच्छी दिशा में ले जा सकती है। यह दायित्व विज्ञान भारती के सभी कार्यकर्ताओं पर है।
इस अधिवेशन के माध्यम से यह संकल्प लेकर जाना चाहिए कि एक तरफ हम सामान्य जन को जहाँ जीवन में विज्ञान का अभाव या विज्ञान के समझ की कमी है– उसके प्रति जागरूक करें तो वहीं दूसरी ओर नयी पीढ़ी के अपने नवजवानों को जागरुक करें कि वे एक समग्रतापूर्ण दृष्टि से उन नये अनुसन्धानों पर अपनी दृष्टि लगाएँ– जो समाज और देश के हित में हों। अपनी दृष्टि से देखें तो एक सामाजिक दायित्व जिसे आजकल हम सीएसआर अर्थात कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी कहते हैं उसी प्रकार हमारे सर्वोच्च शैक्षणिक संस्थानों की भी एक सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी है– कोई एक निश्चित कार्यक्रम या सामाजिक दायित्व के नाते इन संस्थानों में भी बने और हमारे लैब में भी। विज्ञान भारती के कार्यकर्ता इसके लिए पहल करें क्योंकि यह आज के समय की आवश्यकता है।
अपनी भाषाओं में भी बहुत सारा ज्ञान-विज्ञान भरा पड़ा है। संस्कृत के साथ ही अन्य भाषाओं तथा लोक भाषाओं में समाहित ज्ञान-विज्ञान में हम आधुनिक बातों को जोड़कर समाज के सामने उपयोगी रूप में प्रस्तुत करें। यह एक अच्छा समय है जिसमें केन्द्र और राज्यों की सरकारें इस दिशा में बहुत अच्छी पहल कर रही हैं और विज्ञान जगत में भी सम्पूर्ण विश्व में इसकी चर्चा प्रारम्भ हो गयी है।
हमारे योग जैसे प्राचीन शास्त्र को आधुनिक समय में स्वीकारोक्ति मिल रही है और यह ऐसा समय है जहाँ पूरी दुनिया में इन बातों की समीक्षा भी हो रही है। ऐसे समय भारत के नाते सम्पूर्ण विज्ञान जगत का आप सभी लोग नेतृत्व करें। समय के साथ भारत को हम जिस स्थान पर देखना चाहते हैं उसे एक विश्वगुरु के रूप में वहाँ पहुँचाने के लिए आज की आधुनिक समस्याओं का समाधान अपने पुरातन ज्ञान को साथ लेकर करना होगा। केवल पुरानी बातों से काम नहीं चलेगा और न ही केवल पश्चिम से ही काम चलेगा बल्कि दोनों को मिलाकर आज के समय हेतु हमें एक नया मेल बनाना होगा। आप सब मिलकर पूरे देश में जितने भी विज्ञान क्षेत्र में काम कर रहे विज्ञान के विद्यार्थी, शिक्षक और वैज्ञानिकों को जाकर मिलें और उन्हें इस दृष्टि से कार्य करने हेतु प्रेरित करें।

ज्ञान और विज्ञान के बल पर जल्द ही दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल होगा भारत : योगी आदित्यनाथ
अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, पंडित मदन मोहन मालवीय जी के प्रयासों से यह विश्वविद्यालय ज्ञान की धरा बना है। उन्होंने विज्ञान भारती के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सभी को बधाई दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करने से खेत की उत्पादन क्षमता कम हो जाती है और ऐसे में फसल का नुकसान हो जाता है, इस पर अगर ध्यान ना दिया जाए तो धीरे-धीरे भूमि बंजर हो जाती है। यही कारण है कि पुराने समय के किसान प्राकृतिक रूप से खेती किया करते थे और इस कारण जमीन उपजाऊ बनी रहती थी और खेत फसलों से लहलहाते थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, विज्ञान में शोध और उसके परिणामों की प्रभाव की जानकारी सभी को होनी चाहिए। यदि कोई शोध किया जाता है तो वह विकास के लिए किया जाता है ना कि विनाश के लिए। शोध कार्य में लोक कल्याण की भावना निहित होती है। यदि उसका उद्देश्य राष्ट्र को हर तरीके से मजबूत बनाने का हो तो यह सोच देश के विकास में अहम भूमिका निभाती है। जल्द ही भारत भी अपने विज्ञान और ज्ञान के बल पर दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो जाएगा।
