विभाजन से पूर्व पंजाब में संघ की निर्णायक तैयारी
कांग्रेस नेता विभाजन को स्वीकार कर लेने वाले हैं अर्थात पाकिस्तान अब बनने ही वाला है, यह जानकारी मिलते ही वसन्तराव जी तुरन्त हवाई जहाज से दिल्ली से नागपुर पहुँचे। वहाँ उन्होंने सरसंघचालक श्री गुरुजी को यह बताया। श्री गुरुजी ने कहा कि “गान्धीजी के होते हुए ऐसा नहीं हो सकता, वे विभाजन कभी स्वीकार नहीं करेंगे।” वसन्तरावजी ने कहा- “लेकिन यह होने जा रहा है। मेरे पास यह पक्की सूचना है।” वसन्तराव जी ने बालासाहब देवरसजी से भी अलग से बात की। बालासाहब ने इस सूचना को काफी गम्भीरता से लिया। उन्होंने सोचा कि अगर पाकिस्तान बनने ही जा रहा है तो जो क्षेत्र पाकिस्तान में जाना सम्भावित है, उस क्षेत्र के हिन्दू समाज की वास्तविक स्थिति क्या है, इस का अध्ययन करना आवश्यक है और यह वहाँ जा कर ही हो सकता है।
तुरन्त ही श्रीगुरुजी व बालासाहब देवरस ने मार्च के प्रथम सप्ताह से पंजाब का दौरा करने का कार्यक्रम बना लिया। तदनुसार दोनों लाहौर पहुँचे। लाहौर से आगे दोनों के कार्यक्रम अलग अलग थे। बालासाहब ३ मार्च को मुलतान में थे। पंजाब प्रान्त प्रचारक माधवराव मुले भी उनके साथ ही थे। वहाँ से ४ मार्च को वे रावलपिण्डी पहुँचे। ५ मार्च को पंजाब के कई स्थानों पर एक साथ मुस्लिम दंगे शुरु हो गए। रावलपिण्डी में जब दंगा शुरु हुआ, उस समय बालासाहब रावलपिण्डी में ही थे। उनके आगे के कार्यक्रम कहाँ कहाँ थे, यह तो पता नहीं चल पाया। लेकिन वे सारे रद्द कर दिए गए और वे लाहौर लौट आए। रावलपिण्डी से लाहौर बालासाहब व माधवराव मुस्लिम वेश पहन कर पहुँचे थे।
श्रीगुरुजी के भी कार्यक्रम कहाँ-कहाँ निश्चित थे, यह विदित नहीं। लेकिन वे 5 मार्च को जम्मू में थे और 6 मार्च को उन्हें रावलपिण्डी पहुँचना था। किन्तु रावलपिण्डी में दंगे शुरु हो जाने के कारण वे वहाँ नहीं गए और लाहौर चले गए। पंजाब की स्थिति उस समय इतनी विकट थी कि जम्मू से दस बन्दूकधारी स्वयंसेवक कार से उन्हें वजीराबाद स्टेशन तक छोड़ने गए थे और वजीराबाद से उन्हें लाहौर ले जाने के लिए लाहौर से कुछ बन्दूकधारी स्वयंसेवक आए थे।
तब तक यह तो कुछ भी पता नहीं था कि पाकिस्तान का स्वरूप क्या होगा और वह कब बनेगा। लेकिन सारे देश में चल रही मुसलमानों की कार्रवाइयों को देखते हुए यह तो कल्पना की ही जा सकती थी कि मुसलमान हिन्दुओं को पाकिस्तान में रहने नहीं देंगे। इसलिए हिन्दुओं का बहुत बड़े स्तर पर पलायन होगा। हिन्दू अगर वहाँ से निकल आए तो वह क्षेत्र पूरी तरह से भारत से अलग हो जाएगा और भविष्य में उसे पुनः भारत में मिलाना कठिन हो जाएगा।
अतः लाहौर में श्री गुरुजी व बालासाहब देवरस के साथ संघ के प्रान्तीय स्तर के अधिकारियों की जो बैठक हुई (यह बैठक सम्भवतः 6 या 7 मार्च को हुई होगी), उसमें तय किया गया कि-
- हमें यथा सम्भव हिन्दुओं का पलायन नहीं होने देना है।
- हिन्दू समाज को मुस्लिम आक्रमणों से आत्म-रक्षा के लिए सिद्ध रहने को प्रेरित करना है।
- मुसलमानों के घरों में तो आमतौर पर शस्त्र रहते हैं और हिन्दू प्रायः शस्त्र विहीन होते हैं। इसलिए हिन्दू भी अपने घरों में शस्त्रों की व्यवस्था करें।
- संघ के स्वयंसेवक अपने प्राणों पर खेल कर भी हिन्दू समाज की रक्षा करने में तत्पर रहें।
- कुछ योग्य स्वयंसेवकों को मुसलमान बना कर मुस्लिम क्षेत्रों में तैनात किया जाए, ताकि वे मुस्लिम गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर संघ अधिकारियों को देते रहें।
कृष्णानन्द सागर
विभाजनकालीं भारत के साक्षी
विभाजन से पूर्व और पश्चात का प्रामाणिक दस्तावेज

