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शंख क्यों बजाया जाता है ?

अर्थववेद में लिखा है “शंखेन हत्वा राक्षसि”। अर्थात् “शंख से सब राक्षसों का नाश होता है।” यजुर्वेद में लिखा है- “अवरस्पराय शंखध्वम्” । अर्थात् “युद्ध में शत्रुओं का हृदय दहलाने हेतु शंख बजाने वाला व्यक्ति अपेक्षित है।” शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि पूजा के समय जो व्यक्ति शंख ध्वनि करता है, उसके…

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गुरु मत्स्येंद्रनाथ: नाथ संप्रदाय के प्रणेता

गुरु मत्स्येंद्रनाथ: नाथ संप्रदाय के प्रणेता

“अलख निरंजन” का उद्घोष करने वाले और योग विद्या को जन-जन तक पहुँचाने वाले महान सिद्ध योगी, गुरु मत्स्येंद्रनाथ की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। प्रमुख जीवन दर्शन और योगदान- योग विद्या के पुनरुद्धारकर्ता: मत्स्येंद्रनाथ जी को हठयोग और तंत्र विद्या का महान ज्ञाता माना जाता है। उन्होंने जटिल यौगिक क्रियाओं को सरल बनाया ताकि…

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प्रेरणापुंज मातृशक्ति सती अनुसुइया

प्रेरणापुंज मातृशक्ति सती अनुसुइया

भारतीय परम्परा में कुछ नाम ऐसे हैं, जो मात्र इतिहास या कथा का हिस्सा नहीं होते, बल्कि एक जीवित चेतना की तरह समाज के भीतर प्रवाहित होते रहते हैं। इन्हीं में सती अनुसुइया का नाम अत्यन्त श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है। अनुसुइया का जीवन एक दीपस्तम्भ की भाँति है, जो आज भी…

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ताड़मेटला नरसंहार – माओवादी आतंक की क्रूरता; इतिहास नहीं भूलेगा वीरों का बलिदान

ताड़मेटला नरसंहार – माओवादी आतंक की क्रूरता; इतिहास नहीं भूलेगा वीरों का बलिदान

06 अप्रैल, 2010 का दिन एक गहरे जख्म की तरह अंकित है। सुकमा जिले के घने जंगलों में ताड़मेटला के पास नक्सलियों ने ऐसा खूनी खेल खेला, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में सुरक्षाबलों के 76 जवानों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। सबसे पहले, ताड़मेटला हमले की घटना को समझना…

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संकटों से मुक्ति का महापर्व

संकटों से मुक्ति का महापर्व

हनुमान जयंती का दिन भगवान हनुमान की कृपा पाने और जीवन के संकटों से मुक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए उपाय व्यक्ति के जीवन से भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करते हैं. हिंदू धर्म में हनुमान जयंती को अत्यंत…

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'सद्गुण श्री राम' पुस्तक

‘सद्गुण श्री राम’ पुस्तक

अयोध्या, 30 मार्च। परंपरागत धार्मिक पुस्तकों से हटकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के 130 विभिन्न सद्गुणों को सहज भाषा में रेखांकित करने वाली “सद्गुण श्री राम” पुस्तक तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय को भेंट की। कारसेवकपुरम शिविर कार्यालय में भेंट के दौरान आंध्र प्रदेश के नेल्लोर निवासी सेवानिवृत एनआईसी (नेशनल इनफॉरमेशन सेंटर) निदेशक सुब्रमण्यम…

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संघ शताब्दी वर्ष – सज्जन शक्ति जागरण का अभियान

संघ शताब्दी वर्ष – सज्जन शक्ति जागरण का अभियान

डॉ. मनमोहन वैद्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर समाज से व्यापक संपर्क के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। इन कार्यक्रमों में समाज-परिवर्तन के उद्देश्य से पांच विषयों को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाकर उनकी सक्रिय सहभागिता बढ़ाना एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस…

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रामनवमी के मौके पर हुआ रामलला का सूर्य तिलक, जानिए क्या होता है सूर्य तिलक, कैसे सूरज की किरणें करती हैं प्रभु राम का अभिषेक

रामनवमी पर हुआ रामलला का सूर्य तिलक, जानिए क्या होता है सूर्य तिलक, कैसे सूरज की किरणें करती हैं प्रभु राम का अभिषेक

Surya Tilak on Ram Navami: रामनवमी के सबसे खास अवसर पर दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. यह दिव्य दृश्य करीब 4 मिनट तक रहा, जिसे देखकर सभी भक्त मंत्र मुग्ध हो गए. कैसे होता है सूर्य तिलक? What is Surya Tilak: आज रामनवमी के पावन…

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अष्टमी की सुबह तक 40 लाख से ज्यादा भक्तों ने किए मां विंध्यवासिनी के दर्शन, बन सकता है रिकॉर्ड

Vindhyachal: अष्टमी की सुबह तक 40 लाख से ज्यादा भक्तों ने किए मां विंध्यवासिनी के दर्शन, बन सकता है रिकॉर्ड

 विंध्याचल धाम में चैत्र नवरात्रि के दौरान हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन- पूजन किए। अष्टमी की सुबह तक 40 लाख से अधिक दर्शनार्थियों ने विंध्याचल मंदिर में शीश नवाया।  विंध्य कॉरिडोर के निर्माण ने इस बार नवरात्र को खास बना दिया है। 40 लाख लोगों ने अष्टमी की सुबह तक मां विंध्यवासिनी के…

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दुनिया में यह पौधा है, ईश्वर का वरदान, इसके औषधीय गुण जानकर डॉक्टर भी हैं हैरान

दुनिया में यह पौधा है, ईश्वर का वरदान, इसके औषधीय गुण जानकर डॉक्टर भी हैं हैरान

#नागफनी को संस्कृत भाषा में वज्रकंटका कहा जाता है . इसका कारण शायद यह है कि इसके कांटे बहुत मजबूत होते हैं . पहले समय में इसी का काँटा तोडकर कर्णछेदन कर दिया जाता था .इसके Antiseptic होने के कारण न तो कान पकता था और न ही उसमें पस पड़ती थी . कर्णछेदन से…

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