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भेदभाव मन का विषय, व्यवहार में परिवर्तन से ही भेदभाव मिटेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

भेदभाव मन का विषय, व्यवहार में परिवर्तन से ही भेदभाव मिटेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

देहरादून, 22 फरवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज, नए आयाम” विषय पर प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद का आयोजन हिमालयन कल्चरल सेंटर के सभागार में हुआ। कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम…

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संघ स्वयंसेवक श्रीरामार्चनम से करेंगे प्रभु रामलला की स्तुति

संघ स्वयंसेवक श्रीरामार्चनम से करेंगे प्रभु रामलला की स्तुति

— सरयू वंदना के उपरान्त बलिदानी कारसेवकों को श्रद्धांजलि — राम पथ पर गणवेश में घोषदल का संचलन — हनुमानगढ़ी पर स्तुति कर पहुंचेंगे नव्य-भव्य श्री राम जन्मभूमि मन्दिर अयोध्या, 18 फरवरी। फाल्गुन शुक्ल पक्ष पंचमी (22 फरवरी) के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में घोषवादन से प्रभु श्री रामलला की…

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सामाजिक समरसता समाज में एकता का आधार है – डॉ. मोहन भागवत जी

सामाजिक समरसता समाज में एकता का आधार है – डॉ. मोहन भागवत जी

लखनऊ, 18 फरवरी। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हिन्दू धर्म ही सच्चा मानव धर्म है। दुनिया में पंथ निरपेक्षता वाला कोई समाज है तो वह हिन्दू समाज है। संघ का काम देश के लिए है। अनेक जाति, पंथ…

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शिक्षा और स्वास्थ्य सबको सुलभ होना चाहिए : डॉ. मोहन भागवत जी

लखनऊ, 18 फरवरी। लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकता है। यह व्यवसाय नहीं हो सकते। शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम के लोगों ने हमारी शिक्षा के साथ…

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सभी हिन्दुओं के लिए खुले हों मन्दिर, कुआं और श्मशान : डॉ. मोहन भागवत जी

सामाजिक समरसता के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

लखनऊ, 17 फरवरी 2026। निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर के माधव सभागार में “कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन” कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा कि मन्दिर, कुआं और श्मशान सभी हिन्दुओं के लिए एक होने चाहिए और उनमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को…

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संगठित हो हिंदू समाज : डॉ. मोहन जी भागवत

संगठित हो हिंदू समाज : डॉ. मोहन जी भागवत

लखनऊ, 17 फरवरी 2026। निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हिन्दू समाज को संगठित औऱ सशक्त होने की आवश्यकता है। हमको किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है। सद्भाव ना…

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कुटुम्ब का साथ नहीं मिलता तो ‘संघ’ खड़ा नहीं होता – डॉ. मोहन भागवत जी

कुटुम्ब का साथ नहीं मिलता तो ‘संघ’ खड़ा नहीं होता – डॉ. मोहन भागवत जी

गोरखपुर, 16 फरवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरखपुर विभाग द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में कुटुम्ब स्नेह मिलन का आयोजन किया गया।। स्नेह मिलन में गोरखपुर महानगर के 20 नगरों, चौरी-चौरा, गोरखपुर ग्रामीण के जिला स्तरीय कार्यकर्ता, नगर- जिला- विभाग- प्रांत कार्यकारिणी, प्रवासी कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्य सम्मिलित हुए।…

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हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है – रामलाल जी

हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है – रामलाल जी

कानपुर। कानपुर दक्षिण जिले के माधव नगर स्थित हरदेव नगर (कर्रही) बस्ती में आयोजित ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी ने कहा कि हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है। जब तक हम अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास…

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संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पर आधारित है – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पर आधारित है – डॉ. मोहन भागवत जी

गोरखपुर, 15 फरवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत की ओर से तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पद्धति से ही विकसित हुई है। आज समाज में…

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सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के लिए सेवा

सामाजिक समरसता के संदर्भ में सेवाकार्य का योगदान अनन्य साधारण है। समाज में कई प्रकार के सेवा के कार्य चलते रहते हैं। उनकी प्रेरणा भी भिन्न-भिन्न प्रकार की रहती है। अनेक सेवाकार्य पुण्य संचय के हेतु से होते हैं। किसी सेवा कार्य की प्रेरणा भूतदया होती है। कई लोग प्रसिद्धि पाने के लिए सेवा कार्य…

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