Category: आपके लेख

अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी…

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में एक साधारण लेकिन संस्कारवान ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी संस्कृत के विद्वान थे और माता…

16 अक्टूबर 1905: बंगाल का विभाजन और उसका असर

‌ आज भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना की वर्षगांठ है – ‘बंगाल का विभाजन।‘ 16 अक्टूबर 1905 को भारत के सबसे बड़े और घने आबादी वाले प्रान्त बंगाल को…

स्पेन जब इस्लाम से आजाद हुआ तो उसने एक-एक कर गुलामी के चिन्ह मिटा दिए

पवन विजय स्पेन जब इस्लाम से आजाद हुआ तो उसने एक एक कर गुलामी के चिन्ह मिटा दिए। इसी क्रम में विधर्मियो द्वारा तोड़े गए हिंदू धर्मस्थलों को वापस लेने…

ध्वस्त होता संघ के विरुद्ध झूठा नैरेटिव

देश में एक सुनियोजित नैरेटिव के जरिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तो निशाने पर रहा, लेकिन कम्युनिस्टों की कारगुजारियों को व्यापक रूप से अनदेखा किया गया। यह भी एक संयोग है…

लखनऊ विवि के महान सपूत व पुरातत्ववेत्ता डा. वासुदेवशरण अग्रवाल

ऐतिहासिक मान्यताओं को पुष्ट एवं प्रमाणित करने में पुरातत्व का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। सात अगस्त, 1904 को ग्राम खेड़ा (जिला हापुड़, उ.प्र) में जन्मे डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ऐसे…

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर विशेष पंच परिवर्तन से बदल जाएगा समाज का चेहरा-मोहरा

प्रो. संजय द्विवेदी नागरिक कर्तव्यबोध से नवचेतन का संचार किसी भी राष्ट्र और लोकतंत्र की सफलता उसके नागरिकों की सहभागिता और कर्तव्यबोध से ही सार्थक होती है। एक जीवंत लोकतंत्र…

Swatantrya Veer Savarkar : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चमकते सितारे विनायक दामोदर सावरकर

Swatantrya Veer Savarkar : एक कल्पना कीजिए...तीस वर्ष का पति जेल की सलाखों के भीतर खड़ा है और बाहर उसकी वह युवा पत्नी खड़ी है, जिसका बच्चा हाल ही में…

ऑपरेशन सिंंदूर और उसका वैश्विक परिप्रेक्ष्य

कौस्तुभ नारायण मिश्र पाकिस्तान पर्दा रहित है और बेपर्दा तो पहले ही वैश्विक क्षितिज पर हो चुका है। असली चलचित्र वैश्विक शक्ति असंतुलन का है; पटकथा लेखक तथा निर्देशक हैं,…

एक साधारण स्वयंसेवक की भावानुभूति : सरसंघचालक से हुई भेंट पर निःसृत भाव-धारा

स्वयंसेवक साधारण नहीं होता। वह विशिष्ट है। उसकी विशिष्टता "कुल" अथवा "विराट" के अंश होने में है। उसकी विशिष्टता "बूँद" बनकर "समाज-सिंधु" में स्वयं को विसर्जित कर देने में है।

दुग्धशाला की शक्ति का परिचायक है आत्मनिर्भरता

दूध के पोषक तत्व बच्चों के निरोगी भविष्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। दूध की संरचना में पानी, वसा, प्रोटीन, लैक्टोज (दूध की चीनी) और खनिज (लवण)…