Category: आपके लेख

जो हिन्दुओं की वर्णव्यवस्था को शोषणमूलक बता रहे थे, एपस्टीन से पता करें कि असल शोषण क्या होता है और कैसे किया जाता है

वे लोग जो हिन्दुओं की वर्णव्यवस्था को शोषणमूलक बता रहे थे, एपस्टीन से पता करें कि असल शोषण क्या होता है और कैसे किया जाता है। हावर्ड यूनिवर्सिटी इकतरफ़ा हिन्दू…

द मिथ ऑफ़ द होली काउ के लेखक की बौद्धिक बेईमानी

“द मिथ ऑफ़ द होली काउ” के लेखक प्रोफेसर द्विजेंद्र नारायण झा नहीं है। बीबीसी द्वारा उनका एक साक्षात्कार छापा गया , जिसमें वे एक अद्भुत दावा करते हैं कि…

गौ शवों से पट गया था स्वर्ण मंदिर का सरोवरः अब्दाली ने किया 30000 सिखों का नरसंहार, जाने वड्डा घल्लुघारा का इतिहास

वड्डा घल्लुघारा भारतीय इतिहास के सबसे काले और दुःखद अध्यायों में से एक है। 5 फरवरी, 1762 को सिखों को अहमद शाह दुर्रानी उर्फ अहमद शाह अब्दाली के हाथों एक…

काशी की बेटी का अद्भुत प्रदर्शन : अमेरिका की माउंट अकोंकागुआ की पहाड़ी पर 35 किलो वजन के साथ पाई विजय….

वाराणसी के सिगरा क्षेत्र निवासी गुंजन अग्रवाल ने दक्षिण अमेरिका की माउंट अकोंकागुआ की 6,962 मीटर पहाड़ी पर भारतीय ध्वज लहराया। पैर में हेयरलाइन फ्रैक्चर होने के बावजूद गुंजन ने…

कौसानी है भारत का शांत स्विट्‌जरलैंड

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में समुद्र तल से लगभग 1890 मीटर की ऊँचाई पर बसा में #कौसानी भारत के सबसे खूबसूरत और शांत हिल स्टेशनों में से एक है। इसे…

स्वावलम्बन व संवेदना का संगम महामानव रज्जू भैया

प्रो फेसर राजेन्द्र सिंह, जिन्हें दुनिया आदर से ‘रज्जू भैया’ कहती है, का जीवन इस बात का ज्वलन्त प्रमाण है कि सच्बा बड़प्पन पद या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि स्वभाव…

“न कोई घर रहेगा, न घरवाला, न घरवाली,आखेट युग आ गया है”- विद्यानिवास मिश्र जी

डॉ. विद्यानिवास मिश्र “न कोई घर रहेगा, न घरवाला, न घरवाली/ सब होंगे आखेटक/ सब होंगे आखेट / आखेट युग आ गया है, जहाँ घर नहीं होते।” ये कहना था…

“योगीराज देवराह बाबा : तप, त्याग और राष्ट्रचेतना के महान संत”

भारत की संत-परंपरा में योगीराज देवराह बाबा का स्थान अत्यंत विशिष्ट और अद्वितीय है। वे केवल एक योगी या तपस्वी नहीं थे, बल्कि जीवंत आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। उनका…

वचनेश त्रिपाठी की लेखनी केवल शब्द नहीं, क्रान्ति की जलती मशाल थी

वचनेश त्रिपाठी की लेखनी केवल शब्द नहीं, क्रान्ति की जलती मशाल थी, जिसने हिन्दूत्व और भारतीय इतिहास को भाव, सत्य और तेज से जीवन्त किया। उनका सम्पादन राष्ट्रबोध की साधना…

विचारधारा के नाम पर भारत विरोध, अराजकता व हिंसा का अभियान

समाज और राष्ट्र को तोड़ने के लिए विश्‍वविद्यालयों (शिक्षा के मंदिरों) का उपयोग न हो 1983 में तो हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि पूरे एक वर्ष के लिए…