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पद्म श्री अंके गौड़ा: जिस व्यक्ति ने अपना घर नहीं, पूरा जीवन पुस्तकों को समर्पित कर दिया… उन्हें मिला पद्म श्री।

पद्म श्री अंके गौड़ा: पुस्तकों के लिए समर्पित जीवन, समाज के लिए प्रेरणा का प्रकाश

आज जब दुनिया मोबाइल स्क्रीन पर सिमटती जा रही है, तब कर्नाटक के एक साधारण किसान परिवार से निकले पद्म श्री अंके गौड़ा ने यह साबित कर दिया कि किताबें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि समाज को बदलने की सबसे बड़ी शक्ति हैं। अंके गौड़ा ने न तो कोई बड़ी राजनीतिक शक्ति पाई, न…

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पंच परिवर्तन को अपने जीवन में अपनाएं- मिथिलेश नारायण जी

पंच परिवर्तन को अपने जीवन में अपनाएं- मिथिलेश नारायण जी

लखनऊ : दीनदयाल बस्ती सरस्वती शिशु मंदिर अर्जुन गंज में आयोजित हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ मिथिलेश नारायण जी क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं स्वामी अपरिमेय श्याम दास जी अध्यक्ष इस्कॉन मंदिर लखनऊ, स्वामी सुधीरानंद जी महाराज प्रसिद्ध श्रीराम कथा वाचक काशी धाम द्वारा हुआ। जिसमें कार्यक्रम अध्यक्ष रिटायर्ड उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति राघवेंद्र…

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हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है – रामलाल जी

हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है – रामलाल जी

कानपुर। कानपुर दक्षिण जिले के माधव नगर स्थित हरदेव नगर (कर्रही) बस्ती में आयोजित ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी ने कहा कि हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है। जब तक हम अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास…

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निष्ठावान सच्चरित्र बनें और राष्ट्रभक्ति करें

निष्ठावान सच्चरित्र बनें और राष्ट्रभक्ति करें

मद्रास में विद्यार्थियों का कार्यक्रम था। श्री गुरुजी शिक्षा के विषय में बोल रहे थे। ‘शिक्षा का अर्थ केवल पढ़ना और लिखना इतना ही नहीं होता। शिक्षा प्राप्ति का स्वाभाविक परिणाम होना चाहिये, अपने राष्ट्र के बारे में श्रद्धा की जागृति और अपने कर्तव्य का बोध। शिक्षा प्राप्ति से यदि मनुष्य राष्ट्रभक्त नहीं होता तो…

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सेवा कार्य में समाज को भी सक्रिय सहभागी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

पुणे, १६ अप्रैल २०२६।नांदोशी में ‘लता-आशा मंगेशकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस’ के भूमि पूजन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि निःस्वार्थ बुद्धि और प्रामाणिकता हो, तभी सेवाकार्य सफल होते हैं। सच्ची सेवा अपनेपन के भाव से ही पैदा होती है और इसी अपनेपन के कारण समाज में…

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