धर्म की रक्षा धर्म पालन (आचरण) से हमें ही करनी है – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म की रक्षा धर्म पालन (आचरण) से हमें ही करनी है – डॉ. मोहन भागवत जी

आज की परिस्थिति में संपूर्ण विश्व को दिशा दिखाने का काम भारत के पास ही आने वाला है। जेतलपुर धाम, खेड़ा (गुजरात), 05 मार्च 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने श्री स्वामीनारायण मंदिर, जेतलपुर धाम में ‘श्री रेवती बलदेव जी हरिकृष्ण महाराज द्विशताब्दी पाटोत्सव’ में सहभागी होकर दर्शन और पूजा-अर्चना…

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संघ का मूल उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र को परम वैभव पर पहुँचाना है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

संघ का मूल उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र को परम वैभव पर पहुँचाना है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

सिद्धार्थनगर (गोरक्ष), 08 फरवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि भारत वह देश रहा है, जिसने विश्व को अंक ज्ञान, संगीत, शिक्षा और परिवार व्यवस्था का श्रेष्ठ मार्ग दिखाया। दुनिया को इतना सब कुछ देने वाला भारत…

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भारत का अर्थ केवल भूगोल नहीं, अपितु एक स्वभाव है – डॉ. मोहन भागवत जी

भारत का अर्थ केवल भूगोल नहीं, अपितु एक स्वभाव है – डॉ. मोहन भागवत जी

इंदौर, 04 फरवरी 2026। कसरावद के लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित विचार प्रेरक-कार्यक्रम में ‘मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सभी परमेश्वर के स्वरूप हैं, अत: उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहाँ चैरिटी नहीं, अपितु…

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धर्म हमें करणीय व अकरणीय का ज्ञान देता है – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म हमें करणीय व अकरणीय का ज्ञान देता है – डॉ. मोहन भागवत जी

ग्रंथ, शास्त्र और संतों की वाणी हमारी समझ और सामर्थ्य को बढ़ाते हैं – आचार्य महाश्रमण जी नागौर, 22 जनवरी 2026। जिले के छोटी खाटू कस्बे में 162वें मर्यादा महोत्सव के अवसर पर विशाल व भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। आचार्य महाश्रमण के पावन सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन…

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भारत के अच्छे भविष्य के लिए हिन्दू समाज जिम्मेदार है – डॉ. मोहन भागवत जी

भारत के अच्छे भविष्य के लिए हिन्दू समाज जिम्मेदार है – डॉ. मोहन भागवत जी

गंगापुर, छत्रपति संभाजीनगर (16 जनवरी 2026)। हिन्दू धर्म, परंपरा, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा हेतु  हिन्दू सम्मेलन समिति, गंगापुर ने भव्य “हिन्दू सम्मेलन” का आयोजन किया। हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमें एक ऐसा बलशाली और चरित्रवान समाज बनाना है, जिससे दुनिया भी प्रभावित हो।…

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विचारधारा के नाम पर भारत विरोध, अराजकता व हिंसा का अभियान

विचारधारा के नाम पर भारत विरोध, अराजकता व हिंसा का अभियान

समाज और राष्ट्र को तोड़ने के लिए विश्‍वविद्यालयों (शिक्षा के मंदिरों) का उपयोग न हो 1983 में तो हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि पूरे एक वर्ष के लिए विश्वविद्यालय को बंद करना पड़ा था। उस समय न तो किसी गैर वामपंथी सरकार का दबाव था और न ही किसी वैकल्पिक विचारधारा का प्रभाव। जवाहरलाल…

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भारत की विकास की अवधारणा आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि समाज केंद्रित रही है - डॉ. कृष्णगोपाल जी

भारत की विकास की अवधारणा आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि समाज केंद्रित रही है – डॉ. कृष्णगोपाल जी

जयपुर, 02 जनवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं है। वास्तविक विकास वही है, जिसमें मनुष्य, समाज, परिवार और प्रकृति का संतुलित उत्थान हो। भारत की विकास की अवधारणा आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि समाज केंद्रित रही है और आज के वैश्विक परिदृश्य…

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संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जा सकता है - प्रदीप जोशी जी

संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जा सकता है – प्रदीप जोशी जी

हिन्दू समाज का जागरण एवं संगठन ही संघ का उद्देश्य जौनपुर। तिलकधारी महाविद्यालय के प्रांगण में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी जी ने कहा कि भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम एवं सर्व धर्म समभाव की है। यह व्यक्तिमंगल से विश्वमंगल की संस्कृति…

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अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

कोलकाता व्याख्यानमाला  – 100 वर्ष की संघ यात्रा ‘नए क्षितिज‘ दिनांक – 21 दिसंबर, 2025, प्रथम सत्र संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कोलकाता में आयोजित एक दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के वक्तव्य के प्रमुख बिंदु –

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The sacrament of marriage is not a pursuit of pleasure but a path of discipline and spiritual practice…

विवाह संस्कार भोग नहीं संयम और साधना का पथ है…

किस रज से बनते कर्मवीर…! विवाह संस्कार भोग नहीं संयम और साधना का पथ है… दुनियां के कई देशों बांग्लादेश,नेपाल आदि में जेन जी के चर्चे ,उपद्रव स्वतंत्रता की लड़ाई ,अधिकारों के लिए संघर्ष आदि की चर्चायें सुनते सुनते मन को ऐसा लगता था कि भारत का युवा ऐसा करने लगा तो क्या होगा..? समाज…

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