‘बस जीवित रहना, मरना नहीं’: एक सत्याग्रही पिता की अमर वाणी
मेरे पिताजी श्री सुगन्धचन्द कावड़िया बदनावर में बस अड्डे के पास होटल चलाते थे। वे पहलवान थे। वे तथा उनके एक मित्र साण्डू पहलवान दोनों मिलकर बदनावर में तीन-चार अखाड़े…
विश्व संवाद केन्द्र अवध, लखनऊ
संवादादात् सौहार्दम्
मेरे पिताजी श्री सुगन्धचन्द कावड़िया बदनावर में बस अड्डे के पास होटल चलाते थे। वे पहलवान थे। वे तथा उनके एक मित्र साण्डू पहलवान दोनों मिलकर बदनावर में तीन-चार अखाड़े…
✍️ प्रणय विक्रम सिंह कुछ व्यक्तित्वों पर लिखना शब्दों का काम नहीं होता, श्रद्धा का काम होता है। कलम चलती अवश्य है, लेकिन लिखता हृदय है। परम पूज्य चतुर्थ सरसंघचालक…
प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से मुक्त करना चाहते थे।…
डॉक्टर जी अपनी बैठक में यह बार-बार बताते थे कि “बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं” तथा “यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि यदि…
नागपुर, 11 मई 2026 ‘हम सब एक हैं’, यह एकत्व की अनुभूति वर्ग में प्राप्त होती है – अतुल लिमये जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय आज रेशीमबाग…