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जन्माष्टमी पर मुस्लिम आक्रमण की योजना 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण 1946 का वर्ष भारत के इतिहास में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल का काल माना जाता है। विभाजन से पहले अनेक क्षेत्रों में हिंसा और अविश्वास का वातावरण था। प्रस्तुत विवरण एक ऐतिहासिक संस्मरण के रूप में उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का वर्णन…

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संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों शुरू हुआ, डॉ. हेडगेवार और डॉ. मुंजे

संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों शुरू हुआ? जानिए इसका इतिहास

संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों और कब से शुरू हुआ? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संघ में दण्ड का प्रयोग केवल शारीरिक प्रशिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मरक्षा और संगठनात्मक चेतना का भी प्रतीक माना जाता है। इसके पीछे एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, जो वर्ष 1924 की घटनाओं और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रान्त प्रचारक बैठक बेलगावी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रान्त प्रचारक बैठक बेलगावी में शुरू

बेलगावी (कर्नाटक)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रान्त प्रचारक बैठक कर्नाटक के बेलगावी में आज सुबह शुरू हुई। बैठक में पू. सरसंघचालक डा. मोहन भागवत जी, मा. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी, सभी सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्य विभाग प्रमुख, सह प्रमुख, कार्यकारिणी सदस्य, क्षेत्र प्रचारक, सह क्षेत्र प्रचारक तथा सभी 46 प्रांतों के प्रांत…

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लाहौर में हिन्दू नेताओं की बैठक : चौ. छोटूराम की आशंका

जनवरी 1947 में संघ की ओर से लाहौर में हिन्दू ने. ताओं की एक बैठक बुलायी गई थी, जिसमें पंजाब मन्त्रीमण्डल के कई हिन्दू मन्त्री भी उपस्थित थे। उनमें कुछ कांग्रेसी भी थे। इस बैठक में चौधरी छोटूराम ने कहा था- “जब तक यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार है, विभाजन नहीं हो सकता। लेकिन मुझे खतरा…

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विभाजन से पूर्व पंजाब में संघ की निर्णायक तैयारी

विभाजन से पूर्व पंजाब में संघ की निर्णायक तैयारी

कांग्रेस नेता विभाजन को स्वीकार कर लेने वाले हैं अर्थात पाकिस्तान अब बनने ही वाला है, यह जानकारी मिलते ही वसन्तराव जी तुरन्त हवाई जहाज से दिल्ली से नागपुर पहुँचे। वहाँ उन्होंने सरसंघचालक श्री गुरुजी को यह बताया। श्री गुरुजी ने कहा कि “गान्धीजी के होते हुए ऐसा नहीं हो सकता, वे विभाजन कभी स्वीकार…

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पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन

पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन

नई दिल्ली, 3 जुलाई 2026। राष्ट्र भक्ति और वैचारिक पत्रकारिता के संवाहक साप्ताहिक पत्र ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित एक विशेष वृत्तचित्र (Documentary) ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन झंडेवालान स्थित ‘विचार विनिमय न्यास सभागार’ में किया गया। कार्यक्रम…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य

श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना है। अयोध्या में श्री रामलला मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और…

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मैंने देखा इच्छामरण

मैंने देखा इच्छामरण

सबेरे का समय, चाय-पान का वक्‍त, पूजनीय श्री गुरुजी के कमरे में (उसे कोठरी कहना ही अधिक उपयुक्त होगा) जब हम लोग प्रविष्ट हुए तब वे कुर्सी पर बैठे थे। चरण स्पर्श के लिए हाथ बढाए। सदैव की भाँति पॉव पीछे खींच लिए। मेरे साथ आए स्वयंसेवकों का परिचय हुआ। उनमें आदिलाबाद के एक डॉक्टर…

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आपातकाल पर माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का विशेष साक्षात्कार.....

आपातकाल पर माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का विशेष साक्षात्कार…..

आपातकाल के दौरान (1975-1977) की परिस्थितियों, सरकार की दमनकारी नीति, संघ की भूमिका पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी से विश्व संवाद केंद्र भारत की विशेष बातचीत के प्रमुख अंश…..– नई दिल्ली. देश के इतिहास में कई लोगों ने उस समय आपातकालीन संघर्ष को एक दृष्टि से द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम कहा है।…

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जब केशवराव पहुँचे क्रांति की भूमि कलकत्ता

प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से मुक्त करना चाहते थे। उन्होंने बंगभूमि की धूलि अपने माथे पर लगाई। क्योंकि इस भूमि पर चैतन्य महाप्रभु घूमे, झूमे, नाचे थे। वहाँ का हर बालक और युवक महिषासुरमर्दिनी…

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