“बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं”
डॉक्टर जी अपनी बैठक में यह बार-बार बताते थे कि “बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं” तथा “यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि यदि अकेले हमने काम से जी चुराया तो कौन-सा बड़ा बिगड़नेवाला है। यह काम की सही पद्धति नहीं है।” अपनी बात को पुष्ट करने के लिए…