Headlines
करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज की जीवनी: जीवन, तपस्या, विचार और सनातन धर्म में योगदान

करपात्री जी महाराज भारतीय सन्त परम्परा के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन धर्म, वेद-वेदान्त, भारतीय संस्कृति और धर्मशास्त्रों के अध्ययन तथा संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनका संन्यास-नाम स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती था। कठोर तपस्या, अद्भुत शास्त्रज्ञान, वैराग्य और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा के कारण वे देशभर…

Read Full News
विदुरजी और ऋषि मैत्रेय की भेंट

विदुरजी और ऋषि मैत्रेय की भेंट

सृष्टि की उत्पत्ति कैसे होती है? ब्रह्मांड को आकार देने में दिव्य बुद्धि की क्या भूमिका है? और सबसे महत्वपूर्ण बात, इस ज्ञान को हम अपनी जीवन की अव्यवस्थित परिस्थितियों को संतुलित करने के लिए कैसे उपयोग कर सकते हैं? तकनीकी और बौद्धिक प्रगति के बावजूद, तनाव और असंतोष लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अनंत…

Read Full News

गीधराज जटायु की भव्य सौवर्ण प्रतिमा

चरित्र केवल कथा नहीं है, यह दैनन्दिन क्रिया है। ऐसी क्रिया जिसमें रक्त के एक-एक बिन्दु, आयु के एक-एक क्षण एवं जीवन के एक-एक श्वास का होम करना पड़ता है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अवस्थित कुबेर टीला अत्यन्त प्राचीन पौराणिक स्थल है। अयोध्या माहात्म्य में श्रीराम कोट के तीर्थों का वर्णन करते हुए नवरत्न के…

Read Full News
गुरु के रूप में मार्गदर्शन करता है 'भगवा ध्वज'

गुरु के रूप में मार्गदर्शन करता है ‘भगवा ध्वज’

डॉ. लोकेन्द्र सिंहलेखक, वरिष्ठ स्तम्भकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भगवा ध्वज को जो स्थान दिया गया है, वह इस संगठन की विशिष्टता को दर्शाता है। संघ के लिए भगवा केवल ध्वज मात्र नहीं है, अपितु यह उसके प्रेरणा और मार्गदर्शन का केंद्र बिन्दु है। संघ में भगवा ध्वज को ‘गुरु’ के स्थान पर प्रतिष्ठित किया…

Read Full News
श्रीरामजन्मभूमि : तपस्वी पीढ़ियों की पुण्यकथा

श्रीरामजन्मभूमि : तपस्वी पीढ़ियों की पुण्यकथा

अयोध्या चर्चा में है, सदा रहती आयी है। मानवेन्द्र महाराज मनु-निर्मिता यह नगरी कभी अप्रासंगिक नहीं होती। सन्दर्भ-प्रसंग कोई हो, पर अयोध्या उल्लेखनीय बनी रहती है। वास्तव में यह उल्लेखनीयता इसके महत्त्व का सहज प्रमाण ही है। किस प्रकार धर्म के बल से, खोये हुए को पुनः पाया जाता है, अयोध्या इसका उदाहरण है। लोकोत्तर…

Read Full News
भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है

भारत में गुरुपूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है – जो प्राचीन काल से हमारे जीवन और चिंतन का अभिन्न अंग रही है। यह पर्व न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का मूल स्रोत भी है। हमारे धर्मग्रंथों, महाकाव्यों, दर्शनों और लोक परंपराओं में…

Read Full News
आस्था को लांछित करने का कुचक्र

आस्था को लांछित करने का कुचक्र

आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण पीठाधीश्वर, सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास, अयोध्याrasikopasna@gmail.com                   संस्कृतियाँ स्मृतियों से अपना परिष्कार करती हैं। ये स्मृतियाँ अनुभवों के साथ चलती हैं। संकल्प के-सिद्धि के, संघर्ष के-सफलता के अगणित कथानक मनुष्यता के स्मृति-कोष में अनादि काल से संरक्षित हैं। हमारी आस्था इन्हीं स्मृतियों से जीवनी शक्ति प्राप्त करती है। मनुष्यता के विरुद्ध चला आता अमानवीय संघर्ष…

Read Full News
अग्नि अविष्कारक महर्षि भृगु का अवतरण दिवस,

संसार के पहले समाज शास्त्र की रचना की : आग्नेय अस्त्रों का अविष्कार भी किया

जिनमें नारायण ने अपना स्वरूप को देखा उन महर्षि भृगु का अवतरण दिवस वैशाख पूर्णिमा है। वे ब्रह्मा द्वारा प्रथम मन्वंतर में उत्पन्न किये गये आठ प्रचेताओं में प्रथम हैं। ऋग्वेद में उनसे संबंधित अनेक ऋचायें हैं। वे अग्नि और आग्नेय अस्त्रों के अविष्कारक भी हैं। इसीलिए अग्नि का एक नाम “भृगि” भी है। भृगि…

Read Full News

कृष्ण की लीला और भीष्म का आशीर्वाद: द्रौपदी की रक्षा का अद्भुत प्रसंग

महाभारतका युद्ध प्रारम्भ हो गया था। सहसा एक रात्रिको धर्मराजके चरोंने समाचार दिया कि दुर्योधनके द्वारा उत्तेजित किये जानेपर भीष्मपितामहने प्रतिज्ञा की है कि कल वे समस्त सैन्यके साथ पाँचों पाण्डवोंको मार देंगे। पाण्डवोंमें अत्यन्त व्याकुलता फैल गयी। धर्मराजने श्रीकृष्णके पास अर्जुनको भेजा, किंतु रूखा उत्तर मिला। अन्तमें द्रौपदीने माधवके शिविरमें जाकर उनसे प्रार्थना की…

Read Full News

महर्षि पराशर

आप प्राचीन भारत के एक अत्यन्त प्रतिष्ठित ऋषि, महान दार्शनिक और ज्योतिष शास्त्र के स्तम्भ माने जाते हैं। वे सप्तऋषियों की परम्परा से जुड़े हैं और वेदव्यास के पिता थे। उनकी विद्वत्ता और आध्यात्मिक शक्ति के कारण उन्हें ‘महर्षि’ की उपाधि प्राप्त है। ​महर्षि पराशर का योगदान केवल आध्यात्म तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने…

Read Full News