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वर्ष प्रतिपदा : एक खगोलीय-सांस्कृतिक पर्व

वर्ष प्रतिपदा : एक खगोलीय-सांस्कृतिक पर्व

पयोदकान्त मिश्र भारतीय नववर्ष और पंचांग का प्रथम दिवस अर्थात चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही ‘वर्ष प्रतिपदा’ है। ब्रह्मपुराण के अनुसार इसी दिन सूर्योदय काल में भगवान ब्रह्मा ने ‘सृष्टि की रचना आरम्भ’ की थी। मत्स्य पुराण के अनुसार जलप्रलय के पश्चात सृष्टि की सुरक्षा के लिए भगवान विष्णु के दशावतारों में प्रथम- ‘मत्स्यावतार’ भी आज…

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Mohan Bhagwat Ji has always been a strong supporter of 'One India - Great India': PM Modi

मोहन भागवत जी हमेशा से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के प्रबल समर्थक रहे हैं : पीएम मोदी

आज 11 सितंबर है। यह दिन अलग-अलग स्मृतियों से जुड़ा है। एक  स्मृति 1893 की है, जब स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में विश्वबंधुत्व का संदेश दिया और दूसरी स्मृति है 9/11 का आतंकी हमला, जब विश्व बंधुत्व को सबसे बड़ी चोट पहुंचाई गई। आज के दिन की एक और विशेष बात है। आज एक ऐसे…

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लेखन और रामायण सेवा हेतु समर्पित व्यक्तित्व लल्लनप्रसादव्यास

लेखन और रामायण सेवा हेतु समर्पित व्यक्तित्व लल्लनप्रसादव्यास

बचपन में पाँच वर्ष की उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ गया। जब उनके शव को श्मशान ले जाने की तैयारी की जा रही थी, उसी समय व्यास जी ने अपनी माँ से पूछा था-“अम्मा अब मुझे पढ़ाएगा कौन?” कुछ दिनों पहले ही मैंने क ख ग……. पढ़ना शुरू किया था। अम्मा…

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राणा_सांगा के समाधि स्थल की दुर्दशा

राणा_सांगा के समाधि स्थल की दुर्दशा

राणा सांगा (राणा संग्राम सिंह) (शासन 1509-1528) उदयपुर के राजा थे तथा राणा रायमल के सबसे छोटे पुत्र थे। राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्रामसिंह था। राणा सांगा ने मेवाड़ में 1509 से 1528 तक शासन किया, जो आज भारत के राजस्थान प्रदेश के रेगिस्थान में स्थित है। राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के…

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तिहत्तर की आयु में प्रभु श्रीराम के लिए चालीस दिन में 1300 किमी पैदल चलकर अयोध्या पहुंचे बुजुर्ग

तिहत्तर की आयु में प्रभु श्रीराम के लिए चालीस दिन में 1300 किमी पैदल चलकर अयोध्या पहुंचे बुजुर्ग

आडवाणी की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा में लिया था संकल्प… प्रभु श्रीराम लला के प्रति समर्पण व संकल्प पूर्ति के लिए 73 वर्षीय युवा-वृद्ध 1338 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए अयोध्या धाम पहुंचे| श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पतराय से भेंट की अभिलाषा में वे कारसेवकपुरम आए। गुजरात के मेहसाणा जनपद के ग्राम मोदीपुर निवासी…

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महापुरुषों ने की भारतीय संस्‍कृति की रक्षा : डॉ मोहन जी भागवत

लखीमपुर खीरी जनपद के गोला तहसील स्थित कबीरधाम मुस्तफाबाद आश्रम में आयोजित सत्संग में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा…

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भारत के अच्छे भविष्य के लिए हिन्दू समाज जिम्मेदार है – डॉ. मोहन भागवत जी

भारत के अच्छे भविष्य के लिए हिन्दू समाज जिम्मेदार है – डॉ. मोहन भागवत जी

गंगापुर, छत्रपति संभाजीनगर (16 जनवरी 2026)। हिन्दू धर्म, परंपरा, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा हेतु  हिन्दू सम्मेलन समिति, गंगापुर ने भव्य “हिन्दू सम्मेलन” का आयोजन किया। हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमें एक ऐसा बलशाली और चरित्रवान समाज बनाना है, जिससे दुनिया भी प्रभावित हो।…

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‘कबीर यहु घर प्रेम का, खाला का घर नांहि’ – संत संत कबीरदास

‘कबीर यहु घर प्रेम का, खाला का घर नांहि’ – संत संत कबीरदास 

संक्षिप्त परिचय  इससे सिद्ध होता है कि संत कबीरदास  वस्तुतः रामानंद के शिष्य थे और उन्हीं से उन्हें रामनाम का मंत्र मिला था। संत कबीरदास  और सामाजिक समरसता   संत कबीरदास ने समाज में सामाजिक सद्भाव लाने का कार्य किया। उन्होंने लोगों को अनुभवपरक ज्ञान के आधार पर समझाने का कार्य किया। कबीर के विचार उनके…

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बच्चों को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना आवश्यक – दत्तात्रेय होसबाले जी

बच्चों को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना आवश्यक – दत्तात्रेय होसबाले जी

धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा – सरकार्यवाह जी रांची, 12 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का रांची आगमन हुआ। इस अवसर पर सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न संगठनों, जाति-बिरादरी एवं समुदायों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।…

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संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है - डॉ. मोहन भागवत जी

संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है। संघ कार्य की प्रेरणा संघ प्रार्थना के अंत में कहे जाने वाले…

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