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गीधराज जटायु की भव्य सौवर्ण प्रतिमा

चरित्र केवल कथा नहीं है, यह दैनन्दिन क्रिया है। ऐसी क्रिया जिसमें रक्त के एक-एक बिन्दु, आयु के एक-एक क्षण एवं जीवन के एक-एक श्वास का होम करना पड़ता है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अवस्थित कुबेर टीला अत्यन्त प्राचीन पौराणिक स्थल है। अयोध्या माहात्म्य में श्रीराम कोट के तीर्थों का वर्णन करते हुए नवरत्न के…

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राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी

राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी

प्रयागराज, 7 जून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने देशवासियों से आतंकवाद, अर्बन नक्सलवाद, मतांतरण और बाजारवाद जैसी चुनौतियों का सामूहिक रूप से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने के लिए पूरे समाज को संघ के साथ मिलकर इन चार बड़ी…

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माता सीता की संकल्पशीलता, दायित्व बोध और मर्यादा का पालन आज भी प्रासंगिक

माता सीता के जीवन और उनके जीवन में घटी घटनाओं को हजारों वर्ष बीत गये हैं। लेकिन स्मृति में वे आज भी जीवन्त हैं। उनका व्यक्तिगत जीवन त्याग, तपस्यामय, संकल्पशीलता, दायित्वबोध, कुटुम्ब समन्वय, पर्यावरण संरक्षण, संस्कारित सन्तान का निर्माण, सतत ज्ञानार्जन, श्रमशीलता के साथ समय एवं परिस्थिति के अनुरूप उचित निर्णय लेने का अद्भुत सन्देश…

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दण्डक्रम करने से समाज को क्या लाभ हुआ ?

दण्डक्रम करने से समाज को क्या लाभ हुआ ?

अथवा पचास दिन वेद पढ़ने से के फ़ायदा हुआ जी , जैसे प्रश्न मुझे भी किया गया । और इसी से मिलती जुलती बकवास वे शक्तियां जो वेदों में अश्रद्धा रखती हैं उनका भी विलाप शुरू हो चुका है । तो उन्हें अथवा हर शंकालु को बता दिया जाये कि दण्डक्रम केवल मेधा ही नहीं…

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राष्ट्रधर्म, राष्ट्रनिष्ठा और राष्ट्रनिर्माण के रथी : मोहन भागवत

प्रणय विक्रम सिंह भारत की राष्ट्रीय चेतना जब-जब विघटनकारी विचारों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से आहत हुई, तब-तब संघ नेतृत्व दीपक बनकर दिशा देता रहा है। सरसंघचालक का दायित्व केवल संगठन संचालन तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज-मन की पुनर्रचना और संस्कृति की स्मृतियों का पुनर्जागरण भी करता है। श्रद्धेय मोहन भागवत जी आज 75…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक सम्पन्न

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक सम्पन्न

राष्ट्र, समाज और भविष्य की चुनौतियों पर तीन दिनों तक व्यापक चिंतन-मंथन विशाखापट्टणम, 21 अगस्त 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक आज विशाखापट्टणम के समीप विज्ञान विहार आवासीय विद्यालय परिसर, गुडिलोवा में सम्पन्न हुई। समाज और राष्ट्र के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संघ प्रेरित संगठनों…

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गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

गुरुजी गोलवलकर : एक असाधारण व्यक्तित्व

आज से ठीक 6 वर्ष पूर्व एक वर्षा-आँधी वाली रात मेरे एक सहयोगी ने मुझे फोन किया और पूछा कि क्या श्री गुरुजी गोलवलकर जी की डॉक्टरी परीक्षा करने का समय दे सकता हूँ। अगले प्रातः मैं उन्हें देखने चल दिया। कार की गति के साथ अनेक विचार भी मेरे मस्तिष्क में दौड़ रहे थे।…

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संघ गीतों के शब्दों में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ गीतों के शब्दों में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 28 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सुर, लय और ताल में समझौता हो सकता है, लेकिन संघगीत में निहित देशभक्ति की भावना अधिक महत्वपूर्ण है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। संघ के सामान्य स्वयंसेवकों द्वारा गाए जाने वाले गीतों में निहित यही देशभक्ति की…

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जब श्रीगुरुजी को माँ भगवती के प्रत्यक्ष साक्षात्कार हुए

जब श्रीगुरुजी को माँ भगवती के प्रत्यक्ष साक्षात्कार हुए

पूजनीय गुरुजी को साक्षात्कार हुआ था या नहीं इस सम्बन्ध में महाराष्ट्र के एक सन्त श्री दत्ता ने अपनी श्रद्धांजलि सभा में कहा- मेरे व्याख्यानों का कार्यक्रम जब नागपुर में आयोजित हुआ, तब मैंने देखा कि एक दाढ़ी-मूँछ व लम्बे केश वाले सज्जन कार्यक्रम में आये हैं। मैंने अपने साथियों से पूछा कि वे कौन…

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गौ सेवा को भावनात्मक नहीं, नीतिगत और जनआंदोलन का विषय बनाया जाए – अजीत महापात्र जी

गौ सेवा को भावनात्मक नहीं, नीतिगत और जनआंदोलन का विषय बनाया जाए – अजीत महापात्र जी

जयपुर, 21 दिसंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख अजीत महापात्र ने कहा कि वर्तमान समय में गौ सेवा को भावनात्मक नहीं, बल्कि नीतिगत, सामाजिक और व्यवहारिक आधार पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। गौ संरक्षण केवल गौशालाओं तक सीमित न रहकर घर, मंदिर, कृषि और सरकारी नीतियों से जुड़ा विषय बनना…

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