Headlines

संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पर आधारित है – डॉ. मोहन भागवत जी

संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पर आधारित है – डॉ. मोहन भागवत जी

गोरखपुर, 15 फरवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत की ओर से तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पद्धति से ही विकसित हुई है। आज समाज में…

Read Full News
सनातन संस्कृति में संस्कारों का महत्व

सनातन संस्कृति में संस्कारों का महत्व

सनातन संस्कृति में संस्कारों का बड़ा महत्व है। संस्कारों की सम्पन्नता से शारीरिक, मानसिक आदि सभी परिशुद्धियाँ (पूर्ण शुद्धि) होती हैं। मानव जीवन को शुद्ध करने की चरणबद्ध प्रक्रिया का नाम संस्कार है। लौकिक जीवन में मनुष्य आनन्द का संचय करते हुए त्रुटि रहित परम लक्ष्य की प्राप्ति संस्कारों से ही करता है। ऐसे में…

Read Full News
समाज, संस्कृति, संस्कार, नैतिकता और श्रेष्ठ आचरण संघ कार्य का मूल आधार – डॉ. मोहन भागवत जी

समाज, संस्कृति, संस्कार, नैतिकता और श्रेष्ठ आचरण संघ कार्य का मूल आधार – डॉ. मोहन भागवत जी

चरित्र से मजबूत होता है राष्ट्र, संघ मूल्य आधारित संगठन – ले. जनरल (सेवानिवृत्त) बी.एस. जायसवाल जी कुरुक्षेत्र – 28 फरवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि समाज, संस्कृति, संस्कार, नैतिकता और श्रेष्ठ आचरण संघ कार्य का मूल आधार हैं। स्पष्ट किया कि नैतिक मूल्यों, आचरण, संस्कार और…

Read Full News

“युवा भारत के भविष्य, नई सोच के साथ आगे बढ़ें” : सुनील आम्बेकर जी

कानपुर, 24 अगस्त 2026। महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस परिसर स्थित एन-ब्लॉक सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आम्बेकर जी ने युवाओं से सीधा संवाद करते हुए उनके प्रश्नों के…

Read Full News
जन्माष्टमी पर मुस्लिम आक्रमण की योजना 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण

जन्माष्टमी पर विधर्मी आक्रमण की योजना: 1946 का ऐतिहासिक संस्मरण 1946 का वर्ष भारत के इतिहास में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल का काल माना जाता है। विभाजन से पहले अनेक क्षेत्रों में हिंसा और अविश्वास का वातावरण था। प्रस्तुत विवरण एक ऐतिहासिक संस्मरण के रूप में उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का वर्णन…

Read Full News
सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज

सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज

तीन प्रकार के अन्य ध्वज भी कराते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के शील, औदार्य और शौर्य का स्मरण…. सत्यनिष्ठा से युक्त प्रतिभाएं पूर्ण होती है. सदुदेश्य से किए गए उचित प्रयत्न विफल नहीं होते। पुण्यों का फल मनुष्य को प्राप्तव्य की प्राप्ति करा ही देता है। श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर पर ध्वजारोहण सनातन की इसी विश्वास-परंपरा…

Read Full News

‘धर्म, संस्कृति और समाज का संरक्षण कर राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति’ का लक्ष्य

ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, पांचजन्य संपादक हितेश शंकर, मराठी साप्ताहिक विवेक की संपादक अश्विनी मयेकर और मलयालम दैनिक जन्मभूमि के सह संपादक एम. बालाकृष्णन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत से विस्तृत बातचीत की।

Read Full News
“हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है” – दत्तात्रेय होसबाले जी

“हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है” – दत्तात्रेय होसबाले जी

इंदौर, 30 नवम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि पुराणों और दुनिया के विभिन्न विद्वानों ने हिन्दू और हिन्दुस्तान को अलग-अलग कालखंडों में परिभाषित किया। भारत, मानव धर्म का देश है, जो सृष्टि में एकत्व का दर्शन करता है, इसकी सृष्टि के प्रति कृतज्ञता की दृष्टि है। यहाँ पुरुषार्थ के…

Read Full News
सामाजिक न्याय की भारतीय दृष्टि

सामाजिक न्याय की भारतीय दृष्टि

सामाजिक न्याय अर्वाचीन शब्द है। यह अँग्रेजी शब्द ‘सोशल जस्टिस’ का पर्याय है। सोशल जस्टिस शब्द का प्रथम प्रयोग जेसुइट लुईगी टप्पारेल्ली ने 1840 में किया था। उस समय मार्क्स के साम्यवादी तत्वज्ञान का यूरोप में बहुत बोलबाला था। औद्योगिक क्रान्ति के कारण जो नयी सामाजिक आर्थिक रचना हुई उसमें पूँजीपतियों के हाथ में असीम…

Read Full News
डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार

डिजिटल चुनौती के बीच कैसे जिएं अखबार

प्रो. संजय द्विवेदी हां, सामने मीडिया की पढ़ाई करने की चाह रखने वाले विद्यार्थी ही थे, उम्मीद की जानी चाहिए कि वे कोई अखबार, मैगजीन या किताबे पढ़कर आए होंगे। लगभग 110 विद्यार्थियों से बात करते हुए यह अहसास हुआ कि अखबार अब उनकी जिंदगी में कोई जगह नहीं रखता। वे जो कुछ भी ग्रहण…

Read Full News