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जब केशवराव पहुँचे क्रांति की भूमि कलकत्ता

प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से मुक्त करना चाहते थे। उन्होंने बंगभूमि की धूलि अपने माथे पर लगाई। क्योंकि इस भूमि पर चैतन्य महाप्रभु घूमे, झूमे, नाचे थे। वहाँ का हर बालक और युवक महिषासुरमर्दिनी…

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पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने पूरे देश को अचंभित और आनंदित किया है।

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने पूरे देश को अचंभित और आनंदित किया है।

दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 में मुझे बंगाल जाने का अवसर मिला था। वहाँ अधिकांश लोग परिवर्तन की इच्छा तो रखते थे, किंतु यह परिवर्तन वास्तव में संभव हो सकेगा, ऐसा विश्वास बहुत कम लोगों को था। परिस्थितियाँ भी ऐसी थीं कि परिवर्तन किसी चमत्कार से कम नहीं लगता था। निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान के…

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“बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं"

“बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं”

डॉक्टर जी अपनी बैठक में यह बार-बार बताते थे कि “बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं” तथा “यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि यदि अकेले हमने काम से जी चुराया तो कौन-सा बड़ा बिगड़नेवाला है। यह काम की सही पद्धति नहीं है।” अपनी बात को पुष्ट करने के लिए…

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राष्ट्रीय विचारों के प्रखर लेखक एच.वी. शेषाद्रि जी

राष्ट्रीय विचारों के प्रखर लेखक एच.वी. शेषाद्रि जी

इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल संगठन का नेतृत्व नहीं करते बल्कि अपने विचार, लेखनी और जीवन-साधना से पीढ़ियों को दिशा देते हैं। एच.वी. शेषाद्रि जी ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व थे, जिनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य, संगठन और वैचारिक चेतना को समर्पित रहा। सरलता, विद्वता और राष्ट्रनिष्ठा के अद्भुत संगम रहे शेषाद्रि जी…

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