डॉ. हेडगेवार : ‘राष्ट्र की ‘आत्मा-चेतना’ के पुरोहित
बीसवीं शताब्दी का भारत केवल अंग्रेजी पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा न था, वह सांस्कृतिक विस्मृति और सामाजिक विखंडन की वेदना से भी व्याकुल था। अंग्रेजी शासन की शक्ति केवल तोप और तलवार पर नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्महीनता पर टिकी थी। मानो भारत की आत्मा गहरी नींद में सोई हो, स्मृतियों का सरोवर…