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राष्ट्रीय एकता के अनथक साधक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

राष्ट्रीय एकता के अनथक साधक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम उन नेताओं में लिया जाता है जिन्होंने सत्ता से अधिक सिद्धान्तों को महत्व दिया। वे स्वतंत्र भारत के उन विरले व्यक्तित्वों में थे जिन्होंने राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने सार्वजनिक जीवन का आधार बनाया। शिक्षाविद्, सांसद, केंद्रीय मंत्री और…

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पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन

पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन

नई दिल्ली, 3 जुलाई 2026। राष्ट्र भक्ति और वैचारिक पत्रकारिता के संवाहक साप्ताहिक पत्र ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित एक विशेष वृत्तचित्र (Documentary) ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन झंडेवालान स्थित ‘विचार विनिमय न्यास सभागार’ में किया गया। कार्यक्रम…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य

श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना है। अयोध्या में श्री रामलला मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और…

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जलियाँवाला नर-संहार का सच

जलियाँवाला नर-संहार का सच

अभी तक हमें सभी पुस्तकों में यही बताया जाता है कि 1919 में अमृतसर के जलियाँवाले बाग में रौलट एक्ट के विरुद्ध कांग्रेस की सभा हो रही थी। इससे जनरल डायर ने गुस्से में आकर उस सभा पर गोली चला दी। यह वह अधूरा सच है, जिसे उस समय ब्रिटिश सरकार ने प्रचारित किया था।…

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शिक्षा वह है जो मनुष्य में उचित-अनुचित का विवेक जाग्रत करे - डॉ. मोहन भागवत जी

शिक्षा वह है जो मनुष्य में उचित-अनुचित का विवेक जाग्रत करे – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 1 जुलाई 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने जरीपटका स्थित सिन्धु एजुकेशन सोसायटी के अमृत महोत्सव वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा उपस्थित नागरिकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पूर्ण होने का यह उत्सव केवल आनंद मनाने के लिए नहीं, बल्कि इस आनंद के…

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10, 11, 12 जुलाई को बेलगावी में होगी प्रांत प्रचारक बैठक

10, 11, 12 जुलाई को बेलगावी में होगी प्रांत प्रचारक बैठक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय़ प्रांत प्रचारक बैठक इस वर्ष युगाब्द 5128, विक्रम संवत् 2083, ज्येष्ठ (उत्तर भारत में आषाढ़) कृष्ण दशमी/एकादशी, द्वादशी एवं त्रयोदशी अर्थात दिनांक 10, 11 एवं 12 जुलाई, 2026 को कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित हो रही है। इस बैठक में देशभर के सभी प्रांतों के प्रांत प्रचारक, सह…

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मैंने देखा इच्छामरण

मैंने देखा इच्छामरण

सबेरे का समय, चाय-पान का वक्‍त, पूजनीय श्री गुरुजी के कमरे में (उसे कोठरी कहना ही अधिक उपयुक्त होगा) जब हम लोग प्रविष्ट हुए तब वे कुर्सी पर बैठे थे। चरण स्पर्श के लिए हाथ बढाए। सदैव की भाँति पॉव पीछे खींच लिए। मेरे साथ आए स्वयंसेवकों का परिचय हुआ। उनमें आदिलाबाद के एक डॉक्टर…

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‘कबीर यहु घर प्रेम का, खाला का घर नांहि’ – संत संत कबीरदास

‘कबीर यहु घर प्रेम का, खाला का घर नांहि’ – संत संत कबीरदास 

संक्षिप्त परिचय  इससे सिद्ध होता है कि संत कबीरदास  वस्तुतः रामानंद के शिष्य थे और उन्हीं से उन्हें रामनाम का मंत्र मिला था। संत कबीरदास  और सामाजिक समरसता   संत कबीरदास ने समाज में सामाजिक सद्भाव लाने का कार्य किया। उन्होंने लोगों को अनुभवपरक ज्ञान के आधार पर समझाने का कार्य किया। कबीर के विचार उनके…

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आपातकाल पर माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का विशेष साक्षात्कार.....

आपातकाल पर माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का विशेष साक्षात्कार…..

आपातकाल के दौरान (1975-1977) की परिस्थितियों, सरकार की दमनकारी नीति, संघ की भूमिका पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी से विश्व संवाद केंद्र भारत की विशेष बातचीत के प्रमुख अंश…..– नई दिल्ली. देश के इतिहास में कई लोगों ने उस समय आपातकालीन संघर्ष को एक दृष्टि से द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम कहा है।…

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जब केशवराव पहुँचे क्रांति की भूमि कलकत्ता

प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से मुक्त करना चाहते थे। उन्होंने बंगभूमि की धूलि अपने माथे पर लगाई। क्योंकि इस भूमि पर चैतन्य महाप्रभु घूमे, झूमे, नाचे थे। वहाँ का हर बालक और युवक महिषासुरमर्दिनी…

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