Headlines

admin

संघ का लक्ष्य भारतमाता को विश्व गुरु बनाना है : सह क्षेत्र कार्यवाह

राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी – विश्‍व संवाद केन्‍द्र अवध, लखनऊ

(6 जून 26- शनिवार) उन्नाव : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का समापन समारोह शनिवार को उन्नाव में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह श्री अनिल जी ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि, संघ का मूल…

Read Full News
राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी

राष्ट्र जागरण में पूरे समाज की भागीदारी जरूरी : स्वान्त रंजन जी

प्रयागराज, 7 जून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने देशवासियों से आतंकवाद, अर्बन नक्सलवाद, मतांतरण और बाजारवाद जैसी चुनौतियों का सामूहिक रूप से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने के लिए पूरे समाज को संघ के साथ मिलकर इन चार बड़ी…

Read Full News
महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

महाभारत का राजदंड ही है सेंगोल: धर्म, न्याय और सुशासन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा

कुछ वर्ष पूर्व संगोल बहुत चर्चा में रहा । इसके सम्बन्ध में कई भ्रांतियाँ भी फैलीं । अधिकतर लोग सेंगोल का ऐतिहासिक महत्त्व बताया किन्तु आपको जानकर अच्छा लगेगा कि सेंगोल का पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। सहस्त्रों वर्षों से सेंगोल का वर्णन हमारे पौराणिक ग्रंथों में है, विशेषकर इसका वर्णन महाभारत में किया…

Read Full News
जनसहयोग से पुनर्जीवित हुई नून नदी, जालौन बना जल संरक्षण का मॉडल

जनसहयोग से पुनर्जीवित हुई नून नदी, जालौन बना जल संरक्षण का मॉडल

बुन्देलखण्ड के सूखाग्रस्त जालौन जिले में विलुप्त होती नून नदी को जनसहयोग से नया जीवन देने की मिसाल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिना सरकारी बजट और आर्थिक सहायता के जिले के प्रशासन, सामाजिक संगठनों, किसानों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से नून नदी फिर से बहने लगी है। इस…

Read Full News
हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

हवन-तीर्थ-कीर्तन-दर्शन के चार पहियों पर हिन्दू धर्म की बैलगाड़ी चलती है और चलती रहेगी निरन्तर

यह स्थापना हिन्दी के प्रख्यात ललित निबन्धकार आचार्य कुबेरनाथ राय की भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था और उनकी मौलिक चिन्तन-दृष्टि को प्रकट करती है। भारतीयता, सनातन धर्म, लोकजीवन और विश्वबन्धुत्व जैसे विषयों पर उन्होंने अपने निबन्धों के माध्यम से गम्भीर तथा ललित भाष्य प्रस्तुत किए। हिन्दी साहित्य की आधुनिक विधा ललित निबन्ध को समृद्ध…

Read Full News
साढ़े तीन की चाय पर चर्चा...

साढ़े तीन की चाय पर चर्चा…

चाय के बारे में बात करें तो परमपूजनीय डॉ. हेडगेवार तो चाय को ‘संघ का अधिकृत पेय’ कहते थे। महाल स्थित डॉ. हेडगेवार भवन के रसोईघर में दोपहर साढ़े तीन बजे चाय की घंटी बजती है। उस समय कार्यालय परिसर में उपस्थित सभी जन, अतिथि, आगंतुक, निवासी प्रचारक चाय पीने के लिए एकत्रित हो जाते…

Read Full News
संघ का किसी से कोई द्वेष नहीं, सबके साथ संवाद की भावना – सुनील आंबेकर जी

संघ का किसी से कोई द्वेष नहीं, सबके साथ संवाद की भावना – सुनील आंबेकर जी

नागपुर, 29 मई 2026। नागपुर में पत्रकारों व संपादकों की विशेष संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थों के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में अक्सर कई तरह की गलत जानकारी फैलाई जाती है। लेकिन, असल में संघ किसी से द्वेष नहीं करता…

Read Full News
युग-ऋषि, महंत अवेद्यनाथ: समरसता के महानाद और सनातन के संबल

युग-ऋषि, महंत अवेद्यनाथ: समरसता के महानाद और सनातन के संबल

​काल के अनंत प्रवाह में कुछ महापुरुषों का जीवन किसी एकांत निर्जन में ठहरा हुआ सरोवर नहीं होता, बल्कि वह पर्वतों की छाती चीरकर बहने वाले उस पावन झरने की तरह होता है, जो जब आगे बढ़ता है, तो सदियों की सूखी माटी में भी प्राण फूंक देता है। भारतीय संस्कृति के इतिहास में गोरक्षपीठ…

Read Full News
वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर

वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर

पानी पर लिखी हुई बातें लिखते- लिखते बह जाती हैं। नहीं शेष उनकी किंचित स्मृतियाँ भी रह जाती हैं। पर एक सदी से सागर के वक्षस्थल पर अंकित अब भी तुम सुनो लगाकर ध्यान कथा वह लहर- लहर दुहराती है।। हांँ पराधीन भारत का था तब, थी आग लगी जन के मन में। ‘कैसे माता…

Read Full News

वीर सावरकर कृत ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक का इतिहास

कहते हैं 1857 की क्रांति विफल हुई। क्या यह कहना सही है? नहीं! 1857 का महासंग्राम उसके बाद की पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए सतत प्रेरित करता रहा। सोचने का प्रश्न यह भी है कि आगे की पीढ़ियों को 1857 के महासंग्राम से जो प्रेरणा मिली, वह किस माध्यम से मिली? उत्तर एक ही…

Read Full News