… और आदि शंकर ने उस अनूठे व्यक्ति को अपना गुरु बना लिया
शंकराचार्य नित्य-प्रति गंगा में स्नान करके तर्पण किया करते थे। सूर्योदय से पूर्व उनकी संध्या-पूजा पूर्ण हो जाती। एक दिन सूर्योदय होते-होते वे पूजा समाप्त करके विश्वनाथ मंदिर जा रहे थे। उन्होंने देखा कि गली में शमशान घाट में काम करने वाला एक व्यक्ति चार कुत्तों को चारों दिशाओं में बिठाए हुए रास्ता रोके खड़ा…