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… और आदि शंकर ने उस अनूठे व्यक्ति को अपना गुरु बना लिया

शंकराचार्य नित्य-प्रति गंगा में स्नान करके तर्पण किया करते थे। सूर्योदय से पूर्व उनकी संध्या-पूजा पूर्ण हो जाती। एक दिन सूर्योदय होते-होते वे पूजा समाप्त करके विश्वनाथ मंदिर जा रहे थे। उन्होंने देखा कि गली में शमशान घाट में काम करने वाला एक व्यक्ति चार कुत्तों को चारों दिशाओं में बिठाए हुए रास्ता रोके खड़ा…

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श्रीगुरुजी को संन्यासी जीवन से वापस खींच लाया संघ कार्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ के जीवन का एक दौर ऐसा भी है, जब वे दुनियादारी छोड़कर अध्यात्म के मार्ग पर संन्यासी हो गए। लेकिन उनकी नियति और संघ कार्य की आवश्यकता उन्हें पुन: राष्ट्रीय आंदोलन में खींच लाई। संघ कार्य को विस्तार देते हुए भी उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन…

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माता सीता की संकल्पशीलता, दायित्व बोध और मर्यादा का पालन आज भी प्रासंगिक

माता सीता के जीवन और उनके जीवन में घटी घटनाओं को हजारों वर्ष बीत गये हैं। लेकिन स्मृति में वे आज भी जीवन्त हैं। उनका व्यक्तिगत जीवन त्याग, तपस्यामय, संकल्पशीलता, दायित्वबोध, कुटुम्ब समन्वय, पर्यावरण संरक्षण, संस्कारित सन्तान का निर्माण, सतत ज्ञानार्जन, श्रमशीलता के साथ समय एवं परिस्थिति के अनुरूप उचित निर्णय लेने का अद्भुत सन्देश…

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आदि शंकराचार्य: सनातन धर्म के पुनर्जागरण के दिव्य प्रकाश स्तंभ

‘शंकरो शंकर: साक्षात्’। एक संन्यासी बालक, जिसकी आयु मात्र 7 वर्ष थी, गुरुगृह के नियमानुसार एक ब्राह्मण के घर भिक्षा माँगने पहुँचा। उस ब्राह्मण के घर में भिक्षा देने के लिए अन्न का दाना तक न था। ब्राह्मण पत्नी ने उस बालक के हाथ पर एक आँवला रखा और रोते हुए अपनी विपन्नता का वर्णन…

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कृष्ण की लीला और भीष्म का आशीर्वाद: द्रौपदी की रक्षा का अद्भुत प्रसंग

महाभारतका युद्ध प्रारम्भ हो गया था। सहसा एक रात्रिको धर्मराजके चरोंने समाचार दिया कि दुर्योधनके द्वारा उत्तेजित किये जानेपर भीष्मपितामहने प्रतिज्ञा की है कि कल वे समस्त सैन्यके साथ पाँचों पाण्डवोंको मार देंगे। पाण्डवोंमें अत्यन्त व्याकुलता फैल गयी। धर्मराजने श्रीकृष्णके पास अर्जुनको भेजा, किंतु रूखा उत्तर मिला। अन्तमें द्रौपदीने माधवके शिविरमें जाकर उनसे प्रार्थना की…

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संत रामानुजाचार्य: जीवन, दर्शन और सामाजिक समरसता के महान प्रवर्तक

संत रामानुजाचार्य का जन्म श्रीपेरुंबुडूर, तमिलनाडु में 1074 ईस्वी (वैशाख शुक्ल षष्ठी,1017) में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवाचार्य व माता जी का नाम कान्तिमती था। बचपन से ही संत रामानुजाचार्य की बुद्धि अत्यंत विलक्षण थी। 15 वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने सभी शास्त्रों का गहन अध्ययन कर लिया था।   16 वर्ष की आयु में संत रामानुजाचार्य का विवाह रक्षम्बा जी के साथ हुआ। 23 वर्ष…

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आदि शंकराचार्य: अद्वैत दर्शन और वैदिक धर्म के पुनर्जागरण के महान प्रवर्तक

शंकराचार्य के जीवन का प्रधान लक्ष्य वैदिक धर्म की प्रतिष्ठा तथा प्रचार था। उन्होंने अपने प्रखर व्यक्तित्व के बल पर इन समस्त अवैदिक अथवा अर्धवैदिक तथा नास्तिक सिद्धान्तों को जन सामान्य में अलोकप्रिय बना दिया और उनकी निःसारता प्रमाणित कर दी तथा वेद-प्रतिपाद्य अद्वैतमत का विपुल सृजन कर वैदिक धर्म को लोकप्रिय बना दिया। यही…

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ईश्वर का साक्षात् अनुभव करने वाले सूरदास

यह कथा केवल एक महान कवि की नहीं, बल्कि एक ऐसे संत की भी है, जिनकी वाणी आज भी हर भक्त के हृदय में गूंजती है। माना जाता है कि सूरदास का जन्म 1478 ईस्वी में रुणकता या सीही गाँव में सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सूरदास जन्म से नेत्रहीन थे। सूरदास के पिता…

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बाबा साहब अंबेडकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: सामाजिक समरसता का आधार

सामाजिक समरसता के अग्रदूत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर अपनत्व की भावना रखते थे और विश्वास करते थे कि यह संगठन सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन बनेगा। उन्हें विश्वास था कि संघ हिन्दू समाज में एकजुटता और सामाजिक समरसता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बाबा साहब डॉ. अंबेडकर संघ…

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घुमक्कड़ साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन

घुमक्कड़ साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन

9 अप्रैल, जयंती महापंडित राहुल सांकृत्यायन का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के ग्राम पन्दहा में नौ अप्रैल, 1893 को हुआ था। बचपन में इनका नाम केदार पांडेय था। माता कुलवन्ती देवी तथा पिता श्री गोवर्धन पांडेय की असमय मृत्यु के कारण इनका पालन ननिहाल में हुआ। 15 वर्ष की अवस्था में आजमगढ़ से…

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