राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक गौरव एवं हिन्दुत्व चिंतन की प्रधानता है सावरकर जी के लेखन में
स्वातंत्र्यवीर विनायक सावरकर का पूरा जीवन राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा के लिये समर्पित रहा। बालवय से जीवन की अंतिम श्वाँस तक वे कभी रुके नहीं और न कहीं झुके। उनका अभियान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं था। उनका लक्ष्य एक ऐसे सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण करना था जैसा अतीत…