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(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वतंत्र स्तंभकार है।)

राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक गौरव एवं हिन्दुत्व चिंतन की प्रधानता है सावरकर जी के लेखन में

स्वातंत्र्यवीर विनायक सावरकर का पूरा जीवन राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा के लिये समर्पित रहा। बालवय से जीवन की अंतिम श्वाँस तक वे कभी रुके नहीं और न कहीं झुके। उनका अभियान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं था। उनका लक्ष्य एक ऐसे सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण करना था जैसा अतीत…

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निष्ठावान कार्यकर्ता हो. वे. शेषाद्रि

निष्ठावान कार्यकर्ता हो. वे. शेषाद्रि

आज तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साहित्य हर भाषा में प्रचुर मात्रा में निर्माण हो रहा है; पर इस कार्य के प्रारम्भ में जिन कार्यकर्ताओं की प्रमुख भूमिका रही, उनमें श्री होंगसन्द्र वेंकटरमैया शेषाद्रि जी का नाम शीर्ष पर है। 26 मई, 1926 को बंगलौर में जन्मे शेषाद्रि जी 1943 में स्वयंसेवक बने। 1946 में…

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आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा

आत्मशुद्धि का भारतीय पर्व गंगा दशहरा

भारत की सांस्कृतिक चेतना में गंगा दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रकृति-सम्मान और नैतिक जीवन का संदेश देने वाला महापर्व है। भारतीय संस्कृति में समय केवल गणना का माध्यम नहीं, बल्कि चेतना का आयाम है। हिंदू धर्म में तिथियाँ मानव जीवन को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ने वाली आध्यात्मिक कड़ियाँ मानी गई हैं।…

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'स्वभाव में जीना अध्यात्म और प्रभाव में जीना भौतिकता है'

‘स्वभाव में जीना अध्यात्म और प्रभाव में जीना भौतिकता है’

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपालः पत्रकारिता का पेशा कोई आसान काम नहीं है। घर में, संबंधियों में और रिश्तों में आपेक्षाएं पूरी करते हुए कई बार लोग शिकायतों का अवसर छोड़ देते हैं। आप निरंतर उन लोगों के लिए काम करते हैं, जो आपके लिए प्रत्यक्ष नहीं हैं, लेकिन हैं बहुत ताकतवर। पत्रकार समाज के लिए काम…

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पोखरण परमाणु परीक्षण: भारत की वैज्ञानिक शक्ति और आत्मसम्मान का ऐतिहासिक क्षण

पोखरण परमाणु परीक्षण: भारत की वैज्ञानिक शक्ति और आत्मसम्मान का ऐतिहासिक क्षण

भारत के इतिहास में 11 मई और 13 मई 1998 की तिथियाँ स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं। इन्हीं दिनों राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित पोखरण परीक्षण स्थल में भारत ने सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी सामरिक और वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया। यह अभियान “ऑपरेशन शक्ति” के नाम से जाना गया। इन परीक्षणों…

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अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में 'प्रताप' होने का अर्थ

अजेय अस्मिता का अंगार: झुकती दुनिया में ‘प्रताप’ होने का अर्थ

जब स्वाधीनता ने स्वयं को मानवीय स्वरूप में प्रकट करना चाहा, जब समता और समन्वय ने ‘योद्धा’ के रूप में खुद को ढालने की आरजू की, जब ‘वीरता और वैराग्य’ ने संयुक्त रूप से प्रस्फुटित होने का संकल्प लिया तब 09 मई 1540 को कुंभलगढ़ के किले में महाराणा प्रताप नामक आलोक का उदय हुआ।…

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विदेशियों के लिए धर्म-विज्ञान की प्रयोगशाला रही काशी

विदेशियों के लिए धर्म-विज्ञान की प्रयोगशाला रही काशी

25 साल पहले तक काशी विदेशियों के लिए में धर्म-विज्ञान की एक प्रयोगशाला रही। यहां के शास्त्र, मंदिर, कथाएं, किस्से और किवदंतियां सब कुछ वैज्ञानिक जांच का हिस्सा हुआ करते थे। अमेरिका, जापान और ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों के लैब से वैज्ञानिक आकर काशी के मंदिरों में पूरे दिन पूजा और अनुष्ठानों को देखते…

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कार्पोरेट जिहाद: कई कम्पनियों में चल रहा धर्मान्तरण का खेल

कार्पोरेट जिहाद: कई कम्पनियों में चल रहा धर्मान्तरण का खेल

गर आपको लगता है कि आपके बगल में बैठा अब्दुल सेक्युलर है। सभी धर्म को समान रूप से देखा है। उसके सोशल मीडिया पोस्ट भी यही कहते हैं, तो यह आँखों का धोखा हो सकता है। हाल ही में नासिक टीसीएस की घटना ने झकझोड़कर रख दिया। इसके बाद अन्य कम्पनियों के भी हिन्दुओं के…

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हिंदुस्तानियों के हित के हेत

आज की भाषा में जिसे नैरेटिव सेट करना कहते हैं, भारत में छपे हिंदी के पहले अखबार के श्रद्धेय पितृपुरुष ने पहले ही अंक के मुख्य पृष्ठ पर पहली ही पंक्ति में यही काम किया था। वे युगलकिशोर शुक्ल थे और 30 मई 1826 को “उदंत मार्त्तण्ड’ नाम के अखबार में छपी वह अमर पंक्ति…

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महाभारत के संवाद लेखन का अर्धसत्य

महाभारत के संवाद लेखन का अर्धसत्य

कोरोना के कारण लॉकडाउन में लोगों के सामने बेहतरीन धारावाहिक प्रस्तुत करने के दूरदर्शन के प्रयासों के चलते ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के अलावा कई पुराने और लोकप्रिय रहे धारावाहिक फिर से प्रसारित किए जा रहे है। इस दौरान कई पुरानी कहानियां भी सामने आ रही है। ऐसी ही एक कहानी प्रचारित की गई कि महाभारत…

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