लेखन और रामायण सेवा हेतु समर्पित व्यक्तित्व लल्लनप्रसादव्यास
बचपन में पाँच वर्ष की उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ गया। जब उनके शव को श्मशान ले जाने की तैयारी की जा रही थी, उसी समय व्यास जी ने अपनी माँ से पूछा था-“अम्मा अब मुझे पढ़ाएगा कौन?” कुछ दिनों पहले ही मैंने क ख ग……. पढ़ना शुरू किया था। अम्मा…