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Column | Sangh's Idea of India Is to Take Collective Responsibility To Build a Better Future For Bharat: Sunil Ambekar

Column | Sangh’s Idea of India Is to Take Collective Responsibility To Build a Better Future For Bharat: Sunil Ambekar

Bharat is not merely a modern nation-state; it is a living civilisation shaped by a deep commitment to collective well-being. For thousands of years, successive generations have inherited and carried forward a vision centred on the pursuit of lasting material, moral and spiritual fulfilment for all. This civilisational continuity, sustained despite numerous challenges and disruptions,…

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जनसाधारण के माध्यम से परिवर्तन की प्रक्रिया है ‘संघ – सुनील आंबेकर जी

जनसाधारण के माध्यम से परिवर्तन की प्रक्रिया है ‘संघ – सुनील आंबेकर जी

पुणे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि “हिन्दू समाज में व्याप्त दोषों के परिपूर्ण उपाय के रूप में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ यद्यपि व्यापक सामाजिक परिवर्तन के लिए कार्यरत है, फिर भी यह प्रक्रिया अत्यंत स्वाभाविक और साधारण है।…

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'अहम् पितरं सुवे' 'अहं सुवे पितरम्'

‘अहम् पितरं सुवे’ ‘अहं सुवे पितरम्’

ऋग्वेद दशम मण्डल ‘देवी-सूक्त’ में यह स्वयं देवी का वचन है। पितृ तत्व नित्य है। यह कोई अनुपस्थित की क्षणिक उपस्थिति नहीं है। यह अस्तित्व के बाद का काव्यात्मक या भावात्मक नैरन्तर्य नहीं यह नित्य उपास्य प्राण का ही स्वरूप है। भारतीय उत्सवजीविता उत्सवधर्मिता, इसको जरा डूब कर देखें। पितृपक्ष हो या सर्वपितृ अमावस्या यह…

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हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है – रामलाल जी

हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है – रामलाल जी

कानपुर। कानपुर दक्षिण जिले के माधव नगर स्थित हरदेव नगर (कर्रही) बस्ती में आयोजित ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी ने कहा कि हिन्दू संस्कृति ने सदैव विश्व को सत्य, उदारता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है। जब तक हम अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास…

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भारतीय शिल्पकला के प्रणेता भगवान विश्वकर्मा

भारतीय शिल्पकला के प्रणेता भगवान विश्वकर्मा

अ नेक पौराणिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा का उल्लेख प्राप्त होता है जिन्हें उत्कृष्ट वास्तु कला और भवनों का निर्माण करने के लिए जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम शिल्पी, दिव्य वास्तुकार तथा निर्माण-कला के अधिष्ठाता देवता के रूप में सम्मान दिया जाता है। वे शिल्प, वास्तुकला, अभियंत्रिकी, धातु-कला,…

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समीक्षा : धुरंधर द रिवेंज – कुछ लोगों का धुआं निकलने वाला है

समीक्षा : धुरंधर द रिवेंज – कुछ लोगों का धुआं निकलने वाला है

‘धुरंधर’ सवा सात घंटे की  फिल्म है। जिसका साढ़े तीन घंटे का हिस्सा 05 दिसंबर, 2025 को आया था और अब पौने चार घंटे का पार्ट रिलीज़ हुआ है। जिसका नाम ‘धुरंधर द रिवेंज’ (Dhurandhar – The Revenge) है। ‘रिवेंज’ यानी बदला। कह सकते हैं कि ‘धुरंधर’ इंटरवल से पहले की फिल्म थी, जिसमें भारत…

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संभल हिंसा की रिपोर्ट ने किया देशद्रोहियों का पर्दाफाश; विहिप ने की कठोर कार्रवाई की मांग

संभल हिंसा की रिपोर्ट ने किया देशद्रोहियों का पर्दाफाश; विहिप ने की कठोर कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली। अगस्त 6, 2026। विश्व हिंदू परिषद ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत संभल हिंसा संबंधी न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का स्वागत करते हुए इसे सत्य की विजय कहा है। विहिप के केंद्रीय संयुक्त महा मंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा कि यह रिपोर्ट उन देशद्रोही शक्तियों के चेहरे से नकाब उतारती है…

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बीते 100 वर्ष से हिन्‍दू समाज को संगठित एवं जागृत कर रहा है संघ : दत्‍तात्रेय जी होसबाले

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ लखनऊ विभाग की ‘शाखा टोली का एकत्रीकरण’ लखनऊ के आशियाना क्षेत्र स्थित स्‍मृति उपवन में आयोजित किया गया।

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प्रौद्योगिकी का उपयोग समाजहित में होना चाहिए - डॉ. मोहन भागवत जी

प्रौद्योगिकी का उपयोग समाजहित में होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

छत्रपति संभाजीनगर, 17 जनवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने युवा उद्यमी संवाद में कहा कि प्रौद्योगिकी आज की अपरिहार्य आवश्यकता है। स्वदेशी का उपयोग करने का अर्थ प्रौद्योगिकी का त्याग करना नहीं है, किंतु हमें प्रौद्योगिकी का दास नहीं बनना चाहिए। हम उद्योग केवल अपने लाभ के लिए नहीं,…

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मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत के संकल्प को मजबूत बनाएं - डॉ. मोहन भागवत जी

मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत के संकल्प को मजबूत बनाएं – डॉ. मोहन भागवत जी

मुंबई, 08 फरवरी। देश विरोधी शक्तियों के देश विभाजन के मंसूबों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने कहा कि आप 2047 में देश विभाजन का डर पालने की बजाय, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो। जो 500 साल में सुल्तान बादशाह यहां रहकर नहीं कर सके, 200 साल में अंग्रेज नहीं कर…

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