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संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों शुरू हुआ, डॉ. हेडगेवार और डॉ. मुंजे

संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों शुरू हुआ? जानिए इसका इतिहास

संघ में दण्ड का प्रयोग क्यों और कब से शुरू हुआ? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संघ में दण्ड का प्रयोग केवल शारीरिक प्रशिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मरक्षा और संगठनात्मक चेतना का भी प्रतीक माना जाता है। इसके पीछे एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, जो वर्ष 1924 की घटनाओं और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा…

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अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी...

अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी…

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में एक साधारण लेकिन संस्कारवान ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी संस्कृत के विद्वान थे और माता कृष्णा देवी गृहिणी थीं। बचपन से ही अटल जी में गहरी संवेदनशीलता, स्पष्टवादिता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार पनप रहे थे। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने ग्वालियर…

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सच्ची भक्ति का फल – कुएं में भगवान के दर्शन करते हुए भक्त की प्रेरणादायक धार्मिक कथा

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी मनुष्य के जीवन में सच्ची भक्ति का फल केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि आत्मिक शांति, ईश्वर का सान्निध्य और जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त करना होता है। इतिहास, पुराण और संत साहित्य ऐसे अनेक प्रसंगों से भरे पड़े हैं, जो बताते हैं…

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विदेशियों के लिए धर्म-विज्ञान की प्रयोगशाला रही काशी

विदेशियों के लिए धर्म-विज्ञान की प्रयोगशाला रही काशी

25 साल पहले तक काशी विदेशियों के लिए में धर्म-विज्ञान की एक प्रयोगशाला रही। यहां के शास्त्र, मंदिर, कथाएं, किस्से और किवदंतियां सब कुछ वैज्ञानिक जांच का हिस्सा हुआ करते थे। अमेरिका, जापान और ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों के लैब से वैज्ञानिक आकर काशी के मंदिरों में पूरे दिन पूजा और अनुष्ठानों को देखते…

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हिन्दू नव वर्ष का भव्य 8वाँ आयोजन करेगी राष्ट्रीय पर्व एवं उत्सव समिति…

हिन्दू नव वर्ष का भव्य 8वाँ आयोजन करेगी राष्ट्रीय पर्व एवं उत्सव समिति

लखनऊ। भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं सामाजिक चेतना के प्रतीक हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) के अवसर पर 19 मार्च 2026, गुरुवार को सायं 5:30 बजे गोमती नगर स्थित उत्सव (प्रतीक) स्थल, 1090 चौराहा के निकट भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शन में स्वामी विवेकानंद साप्ताहिक मिलन एवं…

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संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज से मिल रहा प्रतिसाद प्रेरणादायी – सी. आर. मुकुंद जी, सह सरकार्यवाह

संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज से मिल रहा प्रतिसाद प्रेरणादायी – सी. आर. मुकुंद जी, सह सरकार्यवाह

समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक प्रारंभ केरल राज्य में हजारों मुस्लिम एवं ईसाई परिवारों में किया गृहसंपर्क- परिवारों ने किया स्वागत-अभिनंदन पट्टीकल्याणा (समालखा), 13 मार्च 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक आज विधिवत रूप से प्रारंभ हो गई। सुबह नौ बजे राष्ट्रीय स्वयंसेवक…

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अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

अन्तर्निहित एकता की बात हमारी संस्कृति में चलती आई है – डॉ. मोहन भागवत जी

कोलकाता व्याख्यानमाला  – 100 वर्ष की संघ यात्रा ‘नए क्षितिज‘ दिनांक – 21 दिसंबर, 2025, प्रथम सत्र संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त कोलकाता में आयोजित एक दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के वक्तव्य के प्रमुख बिंदु –

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देवरहा बाबा कौन थे? जानिए उनकी रहस्यमयी आयु, सिद्धियां और चमत्कारों की पूरी कहानी

देवरहा बाबा कौन थे? जानिए उनकी रहस्यमयी आयु, सिद्धियां और चमत्कारों की पूरी कहानी

भारतीय हिंदू परंपरा में सदियों से ही ऋषि-मुनियों और साधु-संतों की परंपरा रही है. लेकिन साधु-संतों के चमत्कारों और लीलाओं को समझना आसान नहीं है. सिद्ध योग क्रिया से साधु-संतों ने दिव्य शक्तियां पाई और अद्भुत चमत्कार दिखाए. सिद्ध योग क्रिया से कोई ठंड में निर्वस्त्र रहता है, कोई केवल टाट पहनकर रहता है, कोई…

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भेदभाव छोड़िए, सबको अपना मानिए- डाॅ. मोहन भागवत जी

भेदभाव छोड़िए, सबको अपना मानिए- डाॅ. मोहन भागवत जी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत जी ने समाज, राष्ट्र और परिवार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि संघ का उदय नागपुर की एक छोटी शाखा से हुआ था, जो आज पूरे देश में फैल चुका है. डाॅ….

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श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

श्री गुरुजी का सामाजिक दर्शन – अस्पृश्यता का उपचार

अस्पृश्यता रोग की जड़ जन सामान्य के इस विश्वास में निहित है कि यह धर्म का अंग है और इसका उल्लंघन महापाप होगा। यह विकृत धारणा ही वह मूल कारण है, जिससे शताब्दियों से अनेक समाज- सुधारकों, धर्माचार्यों के समर्पित प्रयासों के बाद भी यह घातक परम्परा जनसामान्य के मन में आज भी घर किए…

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