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नक्सलवादः असंभव मान ली गई समस्या का समाधान बने अमित शाह

नक्सलवादः असंभव मान ली गई समस्या का समाधान बने अमित शाह

अब वैचारिक संघर्ष के मोर्चे पर भी दिखानी होगी प्रतिबद्धता लाल आतंक पराभव की ओर है। वर्ष 2025 को माओवाद के सशस्त्र संघर्ष के अंत के रूप में याद किया जाएगा। भारत में लाल आतंक का अंत असंभव मान लिया गया था। एक पूर्व प्रधानमंत्री ने हताशा प्रकट कर दी थी। कह दिया था यह…

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नेपालः कम्यूनिस्ट दिवास्वप्न का अंत

नेपालः कम्यूनिस्ट दिवास्वप्न का अंत

नेपाली राष्ट्रीय कम्यूनिस्ट पार्टी एकीकृत (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेता और प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा औली के त्यागपत्र के साथ ही एक दिवास्वप्न का अंत हो गया है। नेपाल की जनता ने गणतंत्र के नाम पर 17 साल तक कम्यूनिस्ट शासन को देखा। लगभग डेढ़ दशक के इस कालखण्ड में नेपाल में 14 बार सरकारों में बदलाव…

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समीक्षा : धुरंधर द रिवेंज – कुछ लोगों का धुआं निकलने वाला है

समीक्षा : धुरंधर द रिवेंज – कुछ लोगों का धुआं निकलने वाला है

‘धुरंधर’ सवा सात घंटे की  फिल्म है। जिसका साढ़े तीन घंटे का हिस्सा 05 दिसंबर, 2025 को आया था और अब पौने चार घंटे का पार्ट रिलीज़ हुआ है। जिसका नाम ‘धुरंधर द रिवेंज’ (Dhurandhar – The Revenge) है। ‘रिवेंज’ यानी बदला। कह सकते हैं कि ‘धुरंधर’ इंटरवल से पहले की फिल्म थी, जिसमें भारत…

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“वर्ग साधना स्थली है, हम सब साधक हैं” — क्षेत्र प्रचारक अनिल जी

लखनऊ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में आयोजित कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम सामान्य, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, लखनऊ का उद्घाटन दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ सम्पन्न हुआ।उद्घाटन सत्र में क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, वर्ग के सर्वाधिकारी सरदार स्वर्ण सिंह जी तथा क्षेत्र संघचालक कृष्ण मोहन जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ…

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जब डराने वाले ही डर गए थे

जब डराने वाले ही डर गए थे

1946 के सैन्य विद्रोह से कांप गई ब्रिटिश सत्ता 80 वर्ष पूर्व 1946 में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध हुआ सैन्य विद्रोह स्वाधीनता संग्राम का अंतिम युद्ध माना जाता है। सेना व पुलिस के बल पर ही अंग्रेज शासन करते थे और उनके बल पर ही 1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम, 1920-22 के असहयोग आंदोलन एवं…

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भेदभाव मन का विषय, व्यवहार में परिवर्तन से ही भेदभाव मिटेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

भेदभाव मन का विषय, व्यवहार में परिवर्तन से ही भेदभाव मिटेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

देहरादून, 22 फरवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज, नए आयाम” विषय पर प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद का आयोजन हिमालयन कल्चरल सेंटर के सभागार में हुआ। कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम…

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संत रामानुजाचार्य: जीवन, दर्शन और सामाजिक समरसता के महान प्रवर्तक

संत रामानुजाचार्य का जन्म श्रीपेरुंबुडूर, तमिलनाडु में 1074 ईस्वी (वैशाख शुक्ल षष्ठी,1017) में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवाचार्य व माता जी का नाम कान्तिमती था। बचपन से ही संत रामानुजाचार्य की बुद्धि अत्यंत विलक्षण थी। 15 वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने सभी शास्त्रों का गहन अध्ययन कर लिया था।   16 वर्ष की आयु में संत रामानुजाचार्य का विवाह रक्षम्बा जी के साथ हुआ। 23 वर्ष…

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Column | Sangh's Idea of India Is to Take Collective Responsibility To Build a Better Future For Bharat: Sunil Ambekar

Column | Sangh’s Idea of India Is to Take Collective Responsibility To Build a Better Future For Bharat: Sunil Ambekar

Bharat is not merely a modern nation-state; it is a living civilisation shaped by a deep commitment to collective well-being. For thousands of years, successive generations have inherited and carried forward a vision centred on the pursuit of lasting material, moral and spiritual fulfilment for all. This civilisational continuity, sustained despite numerous challenges and disruptions,…

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संघ के विस्तार का अर्थ राष्ट्रीय विचार का विस्तार – दत्तात्रेय होसबाले जी, सरकार्यवाह

संघ के विस्तार का अर्थ राष्ट्रीय विचार का विस्तार – दत्तात्रेय होसबाले जी, सरकार्यवाह

देश के नागरिकों का औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होना आवश्यक; भारतीय विमर्श समस्त विश्व के कल्याण का विचार समालखा (पानीपत), 15 मार्च 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन कार्य में विस्तार, राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति की अधिक सक्रियता और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ…

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“बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं"

“बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं”

डॉक्टर जी अपनी बैठक में यह बार-बार बताते थे कि “बताया हुआ काम करना चाहिए पर उसका ढोल पीटने की आवश्यकता नहीं” तथा “यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि यदि अकेले हमने काम से जी चुराया तो कौन-सा बड़ा बिगड़नेवाला है। यह काम की सही पद्धति नहीं है।” अपनी बात को पुष्ट करने के लिए…

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