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जब डराने वाले ही डर गए थे

जब डराने वाले ही डर गए थे

1946 के सैन्य विद्रोह से कांप गई ब्रिटिश सत्ता 80 वर्ष पूर्व 1946 में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध हुआ सैन्य विद्रोह स्वाधीनता संग्राम का अंतिम युद्ध माना जाता है। सेना व पुलिस के बल पर ही अंग्रेज शासन करते थे और उनके बल पर ही 1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम, 1920-22 के असहयोग आंदोलन एवं…

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सद्भावना भारत का स्वभाव है – डॉ. मोहन भागवत जी

सद्भावना भारत का स्वभाव है – डॉ. मोहन भागवत जी

जयपुर, 14 नवम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सद्भावना भारत का स्वभाव है। नियम और तर्क के आधार पर समस्याएं ठीक नहीं हो सकती, इसके लिए सद्भावना चाहिए और हमें यही काम करना है। उन्होंने कहा कि स्वार्थ भावना यह दुनिया का स्वभाव है। स्वार्थ भावना के आधार…

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Operation Sindoor : युद्ध काल में लक्ष्मणरेखा लांघता विपक्ष

Operation Sindoor : पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए क्रूर आतंकी हमले की सूचना मिलते ही गृह मंत्री अमित शाह कश्मीर पहुंच गए…

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कार्पोरेट जिहाद: कई कम्पनियों में चल रहा धर्मान्तरण का खेल

कार्पोरेट जिहाद: कई कम्पनियों में चल रहा धर्मान्तरण का खेल

गर आपको लगता है कि आपके बगल में बैठा अब्दुल सेक्युलर है। सभी धर्म को समान रूप से देखा है। उसके सोशल मीडिया पोस्ट भी यही कहते हैं, तो यह आँखों का धोखा हो सकता है। हाल ही में नासिक टीसीएस की घटना ने झकझोड़कर रख दिया। इसके बाद अन्य कम्पनियों के भी हिन्दुओं के…

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Global Science Innovation Conference – RSS Sarkaryavah’s call for ethical technology resonates with the experts

Stanford Faculty Club, California. “Scientific advancement must be evaluated not just through economic outcomes but through a broader lens of economy, ecology and ethics… If traditional knowledge is not properly understood, all those scientific inquiries of the past will be concluded as only superstitions,” said Dattatreya Hosabale Ji, Sarkaryavah (General Secretary) of RSS. Speaking on…

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आचार्य मिथिलेशनन्दिनी शरण जी का प्रेरक मार्गदर्शन

समसामयिक विचार अन्धकार और मलिनता में पनपने वाले, छिपकर निकलने वाले तथा झुण्ड को शक्ति मानने वाले वितृष्णा के पर्याय, जब तथाकथित क्रान्ति के प्रतीक बनने लगें, तो यह समझना कठिन नहीं रह जाता कि क्रान्ति कितनी निर्विचार है। पीडाएँ परिवर्तन नहीं लातीं, परिवर्तन लाती है जीवनी शक्ति, वह जीवनी शक्ति जो पवित्रता और प्रकाश…

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अमेरिकी कांग्रेस-मैन राइली मूर को FCRA से परेशानी क्यों ?

अमेरिकी कांग्रेस-मैन राइली मूर को FCRA से परेशानी क्यों?

भारत सरकार ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) में बदलाव का प्रस्ताव क्या दिया अमेरिकी कांग्रेस-मैन राइली मूर के माथे पर बल पड़ गया। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि ये सीधे-सीधे ईसाईयों को निशाना बनाने की कोशिश है और यह मुद्दा भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव की वजह बन सकता है।…

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कृष्ण और अर्जुन संवाद : सबसे बड़ा दानी कौन?

कृष्ण और अर्जुन संवाद : सबसे बड़ा दानी कौन?

एक बार भगवान कृष्ण और अर्जुन कहीं सैर पर जा रहे थे. इस दौरान उन दोनों के बीच बातचीत भी हो रही थी। तभी बातों बातों में कृष्ण ने कर्ण को सबसे बड़ा दानी कह डाला। इस पर अर्जुन ने कृष्ण से कहाकि क्यों कर्ण को दानवीर कहा जाता है और अर्जुन को नहीं। जबकि…

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प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस: भारतीय इतिहास का एक रक्तरंजित अध्याय

प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस: भारतीय इतिहास का एक रक्तरंजित अध्याय

अमन दुबे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लम्बे और संघर्षपूर्ण इतिहास में कई ऐसी घटनाएँ दर्ज हैं जिन्होंने देश की दिशा और दशा को हमेशा के लिये बदल कर रख दिया। इन्हीं हृदयविदारक घटनाओं में से एक है- 16 अगस्त 1946 का ‘प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस’ (Direct Action Day), जिसे इतिहास में ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ के भयावह…

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जब केशवराव पहुँचे क्रांति की भूमि कलकत्ता

प्रसन्नचित्त से केशवराव कलकत्ता पहुँचे। कलकत्ता उनकी दृष्टि में केवल महानगरी नहीं थी। वह आत्मबलिदान की वेदी थी। वहाँ के युवक मातृभूमि को विदेशी शासन से मुक्त करना चाहते थे। उन्होंने बंगभूमि की धूलि अपने माथे पर लगाई। क्योंकि इस भूमि पर चैतन्य महाप्रभु घूमे, झूमे, नाचे थे। वहाँ का हर बालक और युवक महिषासुरमर्दिनी…

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