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संत रविदास के जीवन-संदेश को समझकर देश और समाज की एकात्मता हेतु कार्य करने का संकल्प आवश्यक है : श्री दत्तात्रेय होसबाले जी

संत रविदास के जीवन-संदेश को समझकर देश और समाज की एकात्मता हेतु कार्य करने का संकल्प आवश्यक है : श्री दत्तात्रेय होसबाले जी

सन्त शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर मा. सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी का वक्तव्य ” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है। हमारी श्रेष्ठ संत परंपरा ईश्वर की भारत को एक विशिष्ट देन है। हमारे…

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संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज से मिल रहा प्रतिसाद प्रेरणादायी – सी. आर. मुकुंद जी, सह सरकार्यवाह

संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज से मिल रहा प्रतिसाद प्रेरणादायी – सी. आर. मुकुंद जी, सह सरकार्यवाह

समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक प्रारंभ केरल राज्य में हजारों मुस्लिम एवं ईसाई परिवारों में किया गृहसंपर्क- परिवारों ने किया स्वागत-अभिनंदन पट्टीकल्याणा (समालखा), 13 मार्च 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक आज विधिवत रूप से प्रारंभ हो गई। सुबह नौ बजे राष्ट्रीय स्वयंसेवक…

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सनातन संस्कृति में संस्कारों का महत्व

सनातन संस्कृति में संस्कारों का महत्व

सनातन संस्कृति में संस्कारों का बड़ा महत्व है। संस्कारों की सम्पन्नता से शारीरिक, मानसिक आदि सभी परिशुद्धियाँ (पूर्ण शुद्धि) होती हैं। मानव जीवन को शुद्ध करने की चरणबद्ध प्रक्रिया का नाम संस्कार है। लौकिक जीवन में मनुष्य आनन्द का संचय करते हुए त्रुटि रहित परम लक्ष्य की प्राप्ति संस्कारों से ही करता है। ऐसे में…

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प्रतिनिधि सभा बैठक स्थल पर प्रदर्शनी का शुभारम्भ

प्रतिनिधि सभा बैठक स्थल पर प्रदर्शनी का शुभारम्भ

समालखा (पानीपत)। पट्टीकल्याणा स्थित माधव सृष्टि केंद्र में विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी में नौवें सिक्ख गुरु महान बलिदानी श्री गुरु तेगबहादुर जी के जीवन की झलकियां तथा हरियाणा प्रदेश के ऐतिहासिक, पौराणिक स्थलों के साथ विभिन्न महान विभूतियों के जीवन, विचारों और समाज के प्रति उनके योगदान को प्रदर्शित किया गया है। राष्ट्रीय…

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'द केरल स्टोरी-2': समाज की छिपी परतों को उजागर करती फिल्म

‘द केरल स्टोरी-2’: समाज की छिपी परतों को उजागर करती फिल्म

‘जो ताकत मुहब्बत में है, वो बारूद में नहीं। काफिर लड़की सिर्फ एक लड़की नहीं होती है, वह एक पोटेंशियल फैमिली ट्री होती है, उसे वहाँ से तोड़कर, अपने साथ जोड़ लो तो आने वाली पूरी नस्ल बदल जाती है।’ केरल स्टोरी-2 का यह संवाद उन कथित लोगों की मानसिकता को दर्शाने की कोशिश करता…

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परिवर्तनशील समाज में 'कुटुम्ब व्यवस्था'

परिवर्तनशील समाज में ‘कुटुम्ब व्यवस्था’

भारत एक ऐसा देश है जहाँ परिवार केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि जीवन का मूलाधार है। भारतीय समाज की आत्मा कुटुम्ब व्यवस्था है, जो व्यक्ति को पहचान, सुरक्षा, संस्कार और आत्मीयता प्रदान करती है। वैश्वीकरण और तकनीकी क्रान्ति के दौर में जहाँ पश्चिमी समाजों में परिवार विखण्डित होता गया, वहीं भारत में कुटुम्ब व्यवस्था ने…

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लेखन और रामायण सेवा हेतु समर्पित व्यक्तित्व लल्लनप्रसादव्यास

लेखन और रामायण सेवा हेतु समर्पित व्यक्तित्व लल्लनप्रसादव्यास

बचपन में पाँच वर्ष की उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ गया। जब उनके शव को श्मशान ले जाने की तैयारी की जा रही थी, उसी समय व्यास जी ने अपनी माँ से पूछा था-“अम्मा अब मुझे पढ़ाएगा कौन?” कुछ दिनों पहले ही मैंने क ख ग……. पढ़ना शुरू किया था। अम्मा…

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मातृभाषाओं के संरक्षण का पक्षधर है संघ

मातृभाषाओं के संरक्षण का पक्षधर है संघ

भारतीय भाषाओं पर संघ का दृष्टिकोण: सभी भारतीय भाषाएं, राष्ट्रीय भाषाएं हैं। किसी की अनदेखी न हो, सबको समान स्तर प्राप्त हो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सदैव भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके एकात्म पर जोर दिया है। संघ ने सभी भारतीय भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा माना है, जो भारत की समृद्ध संस्कृति की…

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राष्ट्रवादी लेखिका कमला चौधरी

राष्ट्रवादी लेखिका कमला चौधरी

लखनऊ में जन्मीं राष्ट्रवादी लेखिका व राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचारों से प्रेरित सविनय अवज्ञा आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कमला चौधरी सशक्त महिला थीं। कमला के पिता राम मनमोहन दयाल जहाँ डिप्टी कलेक्टर थे, वहीं उनके नाना 1857 के स्वाधीनता संग्राम में लखनऊ में स्वतंत्र अवध बलों के कमाण्डर थे। उस समय की…

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काशी की यात्रा अंतस की गहराइयों में उतरने वाला अनुभव

काशी की यात्रा अंतस की गहराइयों में उतरने वाला अनुभव

धर्म, अध्यात्म और ज्ञान रूपी त्रिवेणी की प्रवाहिका काशी की यात्रा केवल एक भौगोलिक भ्रमण नहीं अपितु अंतस की गहराइयों में उतरने वाला अनुभव है। काशी जिसे वाराणसी, बनारस, आनंदवन इत्यादि कई नामों से अभिहित किया जाता है, भारत की धार्मिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक तथा – विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरियों में अग्रगण्य यह नगरी…

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