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Global Science Innovation Conference – RSS Sarkaryavah’s call for ethical technology resonates with the experts

Stanford Faculty Club, California. “Scientific advancement must be evaluated not just through economic outcomes but through a broader lens of economy, ecology and ethics… If traditional knowledge is not properly understood, all those scientific inquiries of the past will be concluded as only superstitions,” said Dattatreya Hosabale Ji, Sarkaryavah (General Secretary) of RSS. Speaking on…

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श्रीगुरुजी को संन्यासी जीवन से वापस खींच लाया संघ कार्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ के जीवन का एक दौर ऐसा भी है, जब वे दुनियादारी छोड़कर अध्यात्म के मार्ग पर संन्यासी हो गए। लेकिन उनकी नियति और संघ कार्य की आवश्यकता उन्हें पुन: राष्ट्रीय आंदोलन में खींच लाई। संघ कार्य को विस्तार देते हुए भी उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन…

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थ्राइव सम्मेलन 2026: माननीय सरकार्यवाह जी के विज्ञान, ज्ञान-प्रणालियाँ और सभ्यतागत नेतृत्व पर विचार

कैलिफ़ोर्नियाराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने थ्राइव सम्मेलन 2026 में “विज्ञान, ज्ञान-प्रणालियाँ एवं सभ्यतागत नेतृत्व” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। यह सम्मेलन स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका में आयोजित हुआ, जहाँ वैश्विक स्तर पर होसबाले जी और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञ एकत्र हुए। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने ग्लोबल साइंस एंड इनोवेशन…

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बाबा साहब अंबेडकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: सामाजिक समरसता का आधार

सामाजिक समरसता के अग्रदूत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर अपनत्व की भावना रखते थे और विश्वास करते थे कि यह संगठन सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन बनेगा। उन्हें विश्वास था कि संघ हिन्दू समाज में एकजुटता और सामाजिक समरसता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बाबा साहब डॉ. अंबेडकर संघ…

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संघ समाज को जोड़ने वाला 100 वर्षों का सशक्त अभियान – राम माधव जी

जबलपुर। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त नर्मदा भाग में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारम्भ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। तत्पश्चात राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन हुआ। मुख्य वक्ता राम माधव जी ने कहा कि संघ विश्व का एकमात्र ऐसा संगठन है जो…

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सेवा कार्य में समाज को भी सक्रिय सहभागी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

पुणे, १६ अप्रैल २०२६।नांदोशी में ‘लता-आशा मंगेशकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस’ के भूमि पूजन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि निःस्वार्थ बुद्धि और प्रामाणिकता हो, तभी सेवाकार्य सफल होते हैं। सच्ची सेवा अपनेपन के भाव से ही पैदा होती है और इसी अपनेपन के कारण समाज में…

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संघ का ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है – रामलाल जी

संघ का ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है – रामलाल जी

रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त प्रमुख जन गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। गोष्ठी में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि व दीप प्रज्ज्वलन से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू जी ने…

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आश्रमों में जीवन को दीप जैसा बनाया जाता है जो खुद जलकर सबको प्रकाशित करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

आश्रमों में जीवन को दीप जैसा बनाया जाता है जो खुद जलकर सबको प्रकाशित करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

वृन्दावन (मथुरा)। जीवन दीप आश्रम वृन्दावन के लोकार्पण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि आश्रम केवल पेट भरने का नहीं, बल्कि वास्तविक ज्ञान का केन्द्र होते हैं। इनसे व्यक्ति को जीवन में इतना साहस मिलता है कि वह जीवन के थपेड़ों से लड़ने में सक्षम बनता है।…

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जनसाधारण के माध्यम से परिवर्तन की प्रक्रिया है ‘संघ – सुनील आंबेकर जी

जनसाधारण के माध्यम से परिवर्तन की प्रक्रिया है ‘संघ – सुनील आंबेकर जी

पुणे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि “हिन्दू समाज में व्याप्त दोषों के परिपूर्ण उपाय के रूप में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ यद्यपि व्यापक सामाजिक परिवर्तन के लिए कार्यरत है, फिर भी यह प्रक्रिया अत्यंत स्वाभाविक और साधारण है।…

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युग प्रवर्तक स्वतंत्रता सेनानी डॉ. हेडगेवार

युग प्रवर्तक स्वतंत्रता सेनानी डॉ. हेडगेवार

वतंत्रता संग्राम के अग्रणी योद्धा डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जन्मजात स्वतंत्रता सेनानी थे। बाल्यकाल से लेकर जीवन के अन्तिम श्वास तक देश की स्वतंत्रता के लिये संघर्षरत रहे डॉक्टर हेडगेवार ने- “नहीं चाहिये पद, यश, गरिमा, सभी चढ़े माँ के चरणों में। भारत माता की जय केवल, शब्द पड़े जग के कणों में।।” के सिद्धान्त…

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